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‘रनिंग बिटवीन द विकेट ने छीन लिया इंडिया से विश्व कप’
Updated Sun, 30 Jul 2017 02:30 AM IST
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‘रनिंग बिटवीन द विकेट ने छीन लिया इंडिया से विश्व कप’
विनीत तोमर
रोहतक। महिला विश्वकप में हमारी बेटियों ने आखिरी दम तक मुकाबला कर देशवासियों का दिल जीत लिया। हालांकि टीम के खिलाड़ी रनिंग बिटवीन द विकेट को फाइनल में हुई हार का करण मान रही हैं। टीम इंडिया का हिस्सा रही डीएवी कॉलेज फरीदाबाद की छात्रा मानषी जोशी ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में यही बात कही। वह एमडीयू से संबद्ध डीएवी कॉलेज से एमए कर रही है।
मूलरूप से देहरादून की रहने वाली मानषी हरियाणा से आल राउंडर कैटेगिरी में खेलती हैं। वह विश्व कप में इंडिया टीम के 15 खिलाड़ियों में शामिल थी। बकौल मानषी, विश्व कप में उसने पाकिस्तान के खिलाफ छह ओवर में नौ रन दिए और दो विकेट चटकाए। श्रीलंका के खिलाफ पांच ओवर में 31 रन दिए। मानषी का मानना है कि इस विश्व कप में भले ही हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन इससे एक नई क्रांति को जन्म मिला है।
पूरी टीम यह विश्व कप कप्तान मिताली राज और बॉलर झूलन गोस्वामी को समर्पित करना चाहती थी। दोनों ने क्रिकेट के लिए बहुत कुछ किया है। पूरी टीम इसी उद्देश के साथ मैदान पर उतरी थी कि देश के साथ इन दोनों खिलाड़ियों को यह समर्पित कर सके। 170 रनों तक पूरी टीम बेहतर परफारमेंस कर रही थी, लेकिन आखिर में टीम की लय बिगड़ गई। कई खिलाड़ियों का रन आउट होना गलत रहा, जिसने पूरा मैच पलट दिया। रनिंग बिटवीन द विकेट में तालमेल की कमी ने हमसे कप छीन लिया। इस हार से भी उन्होंने सीख ली है। अब अगले वर्ष होने वाले टी-20 की तैयारियों में अभी से जुट गए हैं। मानषी ने जल्द ही एमडीयू में आने की बात कही है।
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यहां बेटियों को मिलता है सपोर्ट, इसलिए खेलती हूं हरियाणा से
बकौल मानषी, वह देहरादून से है। हरियाणा से खेलने का मकसद यह है कि यहां के खिलाड़ियों को अच्छा सपोर्ट मिलता है। मां-बाप भी बेटियों को चौका-चूल्हा की बजाय खेल के मैदान में देखने की इच्छा रखते हैं। इसीलिए हरियाणा से खेलने का फैसला लिया था।
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विनीत तोमर
रोहतक। महिला विश्वकप में हमारी बेटियों ने आखिरी दम तक मुकाबला कर देशवासियों का दिल जीत लिया। हालांकि टीम के खिलाड़ी रनिंग बिटवीन द विकेट को फाइनल में हुई हार का करण मान रही हैं। टीम इंडिया का हिस्सा रही डीएवी कॉलेज फरीदाबाद की छात्रा मानषी जोशी ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में यही बात कही। वह एमडीयू से संबद्ध डीएवी कॉलेज से एमए कर रही है।
मूलरूप से देहरादून की रहने वाली मानषी हरियाणा से आल राउंडर कैटेगिरी में खेलती हैं। वह विश्व कप में इंडिया टीम के 15 खिलाड़ियों में शामिल थी। बकौल मानषी, विश्व कप में उसने पाकिस्तान के खिलाफ छह ओवर में नौ रन दिए और दो विकेट चटकाए। श्रीलंका के खिलाफ पांच ओवर में 31 रन दिए। मानषी का मानना है कि इस विश्व कप में भले ही हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन इससे एक नई क्रांति को जन्म मिला है।
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पूरी टीम यह विश्व कप कप्तान मिताली राज और बॉलर झूलन गोस्वामी को समर्पित करना चाहती थी। दोनों ने क्रिकेट के लिए बहुत कुछ किया है। पूरी टीम इसी उद्देश के साथ मैदान पर उतरी थी कि देश के साथ इन दोनों खिलाड़ियों को यह समर्पित कर सके। 170 रनों तक पूरी टीम बेहतर परफारमेंस कर रही थी, लेकिन आखिर में टीम की लय बिगड़ गई। कई खिलाड़ियों का रन आउट होना गलत रहा, जिसने पूरा मैच पलट दिया। रनिंग बिटवीन द विकेट में तालमेल की कमी ने हमसे कप छीन लिया। इस हार से भी उन्होंने सीख ली है। अब अगले वर्ष होने वाले टी-20 की तैयारियों में अभी से जुट गए हैं। मानषी ने जल्द ही एमडीयू में आने की बात कही है।
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यहां बेटियों को मिलता है सपोर्ट, इसलिए खेलती हूं हरियाणा से
बकौल मानषी, वह देहरादून से है। हरियाणा से खेलने का मकसद यह है कि यहां के खिलाड़ियों को अच्छा सपोर्ट मिलता है। मां-बाप भी बेटियों को चौका-चूल्हा की बजाय खेल के मैदान में देखने की इच्छा रखते हैं। इसीलिए हरियाणा से खेलने का फैसला लिया था।