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पूर्व निदेशक को भारी पड़ सकता है कार्यकारी परिषद में निदेशक पद का दावा करना
Updated Thu, 17 May 2018 03:32 AM IST
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पूर्व निदेशक को कार्यकारी परिषद में निदेशक होने का दावा पेश करना पड़ सकता है भारी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पीजीआईएमएस के पूर्व निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता की मुश्किलें कार्यकारी परिषद की बैठक के बाद बढ़ती जा रही हैं। बैठक में सीनियर प्रोफेसर ने राज्यपाल को भेजे गये पत्र को सार्वजनिक किया था। इसमें उन्होंने लिखा था कि उन्होंने अपना पद शैक्षणिक कार्यों के लिए छोड़ा था। अब उनका वह कार्य पूरा हो गया है, इसलिये वह वापस अपना पद चाहते हैं। इस पर बैठक में बैठे सभी डॉक्टरों के होश उड़ गये थे कि यह क्या हो रहा है। क्योंकि अधिकारी अपने पद से त्यागपत्र दे चुके थे। अब सवाल उठ रहा है कि डॉ. गुप्ता ने निदेशक के पद पर न होते हुए निदेशक का पैड और मुहर कैसे प्रयोग की। सूत्रों की मानें तो इस संबंध में संस्थान ने राज्यपाल, सीएम, स्वास्थ्य मंत्री और चीफ सेक्रेटरी हरियाणा को भी इससे अवगत करा दिया है। इसके साथ ही हेल्थ विवि ने डॉक्टर के संबंधित विभागाध्यक्ष को भी पत्र जारी कर इसका जवाब मांगा है। अब प्रशासन निदेशक कार्यालय के स्टाफ से भी बात कर रहा है कि निदेशक का पैड और मुहर का प्रयोग कोई पद पर न रहते हुए कैसे कर सकता है।
संस्थान के एक सीनियर डॉक्टर उठा रहे सवाल
संस्थान के एक सीनियर डॉक्टर ने प्रशासन पर सवालिया निशाना उठाते हुए कहा कि उनकी बगैर जांच के अधिकारियों ने मामला दर्ज करने की सिफारिश कर दी। जबकि सबूतों की कोई जांच नहीं कराई गई। अब अधिकारी अपने सामने साक्ष्यों के साथ हो रही गलत बातों को भी अनदेखा कर रहे हैं। यह प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किया जा रहा पक्षपात है। हालांकि, इन मामले में कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पीजीआईएमएस के पूर्व निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता की मुश्किलें कार्यकारी परिषद की बैठक के बाद बढ़ती जा रही हैं। बैठक में सीनियर प्रोफेसर ने राज्यपाल को भेजे गये पत्र को सार्वजनिक किया था। इसमें उन्होंने लिखा था कि उन्होंने अपना पद शैक्षणिक कार्यों के लिए छोड़ा था। अब उनका वह कार्य पूरा हो गया है, इसलिये वह वापस अपना पद चाहते हैं। इस पर बैठक में बैठे सभी डॉक्टरों के होश उड़ गये थे कि यह क्या हो रहा है। क्योंकि अधिकारी अपने पद से त्यागपत्र दे चुके थे। अब सवाल उठ रहा है कि डॉ. गुप्ता ने निदेशक के पद पर न होते हुए निदेशक का पैड और मुहर कैसे प्रयोग की। सूत्रों की मानें तो इस संबंध में संस्थान ने राज्यपाल, सीएम, स्वास्थ्य मंत्री और चीफ सेक्रेटरी हरियाणा को भी इससे अवगत करा दिया है। इसके साथ ही हेल्थ विवि ने डॉक्टर के संबंधित विभागाध्यक्ष को भी पत्र जारी कर इसका जवाब मांगा है। अब प्रशासन निदेशक कार्यालय के स्टाफ से भी बात कर रहा है कि निदेशक का पैड और मुहर का प्रयोग कोई पद पर न रहते हुए कैसे कर सकता है।
संस्थान के एक सीनियर डॉक्टर उठा रहे सवाल
संस्थान के एक सीनियर डॉक्टर ने प्रशासन पर सवालिया निशाना उठाते हुए कहा कि उनकी बगैर जांच के अधिकारियों ने मामला दर्ज करने की सिफारिश कर दी। जबकि सबूतों की कोई जांच नहीं कराई गई। अब अधिकारी अपने सामने साक्ष्यों के साथ हो रही गलत बातों को भी अनदेखा कर रहे हैं। यह प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किया जा रहा पक्षपात है। हालांकि, इन मामले में कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।
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