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एक ही राह चलती अंजू-गुरप्रीत, युवाओं के लिए मिसाल बनी दोस्ती
Updated Sun, 06 Aug 2017 01:32 AM IST
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एक ही राह चलती अंजू-गुरप्रीत, युवाओं के लिए मिसाल बनी दोस्ती
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जिले के दो महिलाओं की दोस्ती मिसाल है। मूक-बधिर बच्चों (दिव्यांगों) के बीच काम करने वाली संस्था उत्थान से जुड़ीं दोनों महिलाएं डॉ. अंजु वाजपेयी और डॉ. गुरप्रीत कौर 26 साल से एक ही छत के नीचे एक परिवार के सदस्य के रूप में साथ ही रह रहीं हैं। डॉ. अंजु वाजपेयी संस्था की डायरेक्टर और गुरप्रीत कौर सेक्रेटरी हैं। खास बात यह है कि, डॉ. अंजू ने जब दिव्यांगों की मदद का मन बनाया तो डॉ. गुरप्रीत ने भी वही राह पकड़ ली।
डॉ. अंजू वाजेपयी ने बताया कि, गुरप्रीत से उनकी दोस्ती स्कूल के समय से ही है। दोनों ने एक साथ ही कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। बड़ी होने पर डॉ. अंजू वाजपेयी की इसी शहर में शादी हो गई, जबकि प्रीत ने शादी न करने का निर्णय लिया। इधर, शादी के बाद डॉ. अंजू वाजपेयी ने मूक बधिर बच्चों के लिए संस्था खोलने का मन बनाया। इस पर उन्होंने डॉ. गुरप्रीत से बात की तो वह भी इसके लिए तैयार हो गईं। डॉ. अंजु वाजपेयी के पति डॉ. पीके वाजपेयी शहर के बाहर जॉब करते थे, जो अब जगाधरी अग्रसेन कॉलेज के प्राचार्य हैं। संस्था खोलने के बाद डॉ. अंजू वाजपेयी ने अपनी सहेली से कहा कि वह उनके साथ आकर रहे, क्योंकि उन्हें रोज संस्था के कार्य के लिए आना-जाना पड़ता है। इसके बाद डॉ. गुरप्रीत, डॉ. अंजू वाजेपयी के परिवार के साथ ही रहने लगीं। डॉ. अंजू वाजपेयी के बच्चे हुए तो वे भी डॉ. गुरप्रीत के साथ घुलमिल गए। इतने सालों इकट्ठा रहने के कारण डॉ. गुरप्रीत उस परिवार की सदस्य ही बन गईं। वहीं डॉ. गुरप्रीत कौर कहती हैं कि एजुकेशन पूरी करने के बाद हम समाजसेवा से जुड़ गए। जहां तक इतने लंबे समय तक दोस्ती निभाने की बात है तो मेरा मानना है कि किसी भी रिश्ते में जब तक बैलेंस बना रहेगा, तब तक उस पर कोई आंच नहीं आ सकती। वहीं, डॉ. अंजू वाजपेयी कहती हैं कि हमारी आपसी समझ ने दोस्ती और जिदंगी के बीच हमेशा सामंजस्य रखा।
1978 में पहली बार मिली थीं दोनों
डॉ. अंजु वाजपेयी ने बताया कि उनकी गुरप्रीत से पहली मुलाकात 1978 में गुरु नानक गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुई, जहां दोनों ने 11वीं क्लास में एडमिशन लिया था। यहां से शुरू हुआ दोस्ती का सफर 39 साल बीत जाने के बाद भी जारी है। इन दोनों ने ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी साथ-साथ की। शादी के बाद एक समय लगा कि अब अलग होना पड़ सकता है, लेकिन संयोग बनते चले गए और हम कभी अलग नहीं हुए।
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जिले के दो महिलाओं की दोस्ती मिसाल है। मूक-बधिर बच्चों (दिव्यांगों) के बीच काम करने वाली संस्था उत्थान से जुड़ीं दोनों महिलाएं डॉ. अंजु वाजपेयी और डॉ. गुरप्रीत कौर 26 साल से एक ही छत के नीचे एक परिवार के सदस्य के रूप में साथ ही रह रहीं हैं। डॉ. अंजु वाजपेयी संस्था की डायरेक्टर और गुरप्रीत कौर सेक्रेटरी हैं। खास बात यह है कि, डॉ. अंजू ने जब दिव्यांगों की मदद का मन बनाया तो डॉ. गुरप्रीत ने भी वही राह पकड़ ली।
डॉ. अंजू वाजेपयी ने बताया कि, गुरप्रीत से उनकी दोस्ती स्कूल के समय से ही है। दोनों ने एक साथ ही कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। बड़ी होने पर डॉ. अंजू वाजपेयी की इसी शहर में शादी हो गई, जबकि प्रीत ने शादी न करने का निर्णय लिया। इधर, शादी के बाद डॉ. अंजू वाजपेयी ने मूक बधिर बच्चों के लिए संस्था खोलने का मन बनाया। इस पर उन्होंने डॉ. गुरप्रीत से बात की तो वह भी इसके लिए तैयार हो गईं। डॉ. अंजु वाजपेयी के पति डॉ. पीके वाजपेयी शहर के बाहर जॉब करते थे, जो अब जगाधरी अग्रसेन कॉलेज के प्राचार्य हैं। संस्था खोलने के बाद डॉ. अंजू वाजपेयी ने अपनी सहेली से कहा कि वह उनके साथ आकर रहे, क्योंकि उन्हें रोज संस्था के कार्य के लिए आना-जाना पड़ता है। इसके बाद डॉ. गुरप्रीत, डॉ. अंजू वाजेपयी के परिवार के साथ ही रहने लगीं। डॉ. अंजू वाजपेयी के बच्चे हुए तो वे भी डॉ. गुरप्रीत के साथ घुलमिल गए। इतने सालों इकट्ठा रहने के कारण डॉ. गुरप्रीत उस परिवार की सदस्य ही बन गईं। वहीं डॉ. गुरप्रीत कौर कहती हैं कि एजुकेशन पूरी करने के बाद हम समाजसेवा से जुड़ गए। जहां तक इतने लंबे समय तक दोस्ती निभाने की बात है तो मेरा मानना है कि किसी भी रिश्ते में जब तक बैलेंस बना रहेगा, तब तक उस पर कोई आंच नहीं आ सकती। वहीं, डॉ. अंजू वाजपेयी कहती हैं कि हमारी आपसी समझ ने दोस्ती और जिदंगी के बीच हमेशा सामंजस्य रखा।
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1978 में पहली बार मिली थीं दोनों
डॉ. अंजु वाजपेयी ने बताया कि उनकी गुरप्रीत से पहली मुलाकात 1978 में गुरु नानक गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुई, जहां दोनों ने 11वीं क्लास में एडमिशन लिया था। यहां से शुरू हुआ दोस्ती का सफर 39 साल बीत जाने के बाद भी जारी है। इन दोनों ने ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी साथ-साथ की। शादी के बाद एक समय लगा कि अब अलग होना पड़ सकता है, लेकिन संयोग बनते चले गए और हम कभी अलग नहीं हुए।
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