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घर के अंदर पहुंचा प्रदूषण का असर, मित्र पौधों से कर सकते हैं बचाव
Updated Mon, 18 Jun 2018 02:51 AM IST
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घर के अंदर पहुंचा प्रदूषण का असर, मित्र पौधों से कर सकते हैं बचाव
- एमडीयू की छात्रा ने शोध में सुझाए मित्र पौधे के लाभ, पर्यावरण संरक्षण व पौधरोपण पर दिया जोर
- शहर का सुखपुरा चौक इलाजा सबसे ज्यादा प्रदूषित, सेक्टर में एक प्रदूषण का स्तर कम
विकास सैनी
रोहतक। प्रदूषण की मार घर के अंदर तक असर कर रही है। ग्लोबल वॉर्मिंग व हवा में घुलते जहर से हम बाहर ही नहीं घर में भी असुरक्षित हैं। धूल के महीन कण बेहद धीमी गति से रोगों की ओर धकेल रहे हैं। हमारे घरों की आकर्षक लुक देने व सुविधा देने वाले टीवी, फ्रिज, कंप्यूटर, सोफे, पर्दे भी हमें बीमार बना रहे हैं। यह हमारा नहीं, एमडीयू के पर्यावरण विभाग की छात्रा राजबाला की रिसर्च का दावा है। रिसर्च में इंडोर पॉल्यूशन से बचने के लिए मित्र पौधों को घर में जगह देने की सलाह दी गई है। इसमें ड्रेसिना, रिफ्लेक्सा, स्नेक, स्पाइडर सरीखे पौधे शामिल हैं। यह रिसर्च छात्रा ने विवि में जमा करा दी है।
7 दिनों से छाई है धूल की चादर
वायुमंडल में पिछले करीब एक सप्ताह से धूल कणों की चादर फैली हुई है। इसके असर से रोहतक में एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 383 तक पहुंच गया था। रविवार को यह स्तर
रहा। इसका असर सीधा लोगों पर पड़ा। अस्थमा व श्वास रोगियों के साथ एलर्जी केस इन दिनों अचानक बढ़ गए। ऐसे में ज्यादातर लोगों ने घर से बाहर निकलने से परहेज बरता।
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रिहायशी इलाके में ज्यादा है प्रदूषण
एमडीयू में की गई रिसर्च में शहर के कुछ इलाके शामिल किए गए। इसमें हुडा कॉम्प्लेक्स, सुखपुरा चौक, सोनीपत चौक, सुनारिया चौक, विजय नगर मुख्य है। इन इलाकों में अलग अलग जगह जाकर प्रदूषण का स्तर मापा गया। हाई वॉल्यूम एयर सैंपलर के जरिए हवा की गुणवत्ता मापने पर रिहायशी इलाके में प्रदूषण ज्यादा पाया गया। यह हुडा कॉम्प्लेक्स में उच्च स्तर पर मिला। सुखपुरा चौक व सोनीपत चौक पर मध्य और सुनारिया चौक व विजय नगर में निचले स्तर पर रहा।
सुनारिया चौक पर सबसे ज्यादा पीएम 10 की मात्रा
शोध के मुताबिक, सुनारिया चौक पर सबसे ज्यादा पीएम-10 की मात्रा पाई गई। यह 90.22 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। यह स्तर 60 से कम होना चाहिए। इसके बाद सुखपुरा चौक, फिर विजय नगर, सोनीपत रोड, विकास नगर, हुडा कॉम्प्लेक्स व सबसे कम स्तर सेक्टर एक में रहा। यह 26 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। ये धूल कण महीन कणों से मोटे होते हैं।
सुखपुरा चौक पर सबसे ज्यादा पीएम 2.5 की मात्रा
शोध के मुताबिक, शहर के सुखपुरा चौक पर सबसे अधिक पीएम-2.5 की मात्रा पाई गई। यह 44.02 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। इसके बाद विजय नगर, सुनारिया चौक, सोनीपत रोड, हुडा कॉम्प्लेक्स व सबसे कम सेक्टर-एक में रहा। यह 16.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। ये धूल कण महीन होते हैं।
सुविधाजनक सामान भी बना रहा बीमार
शोध के मुताबिक, घर में साज सज्जा व सुविधा के लिए खरीदा जाने वाला सामान भी हमें बीमार बनता है। इसमें कंप्यूटर, प्रिंटर, फ्रिज, एसी, सोफे, पर्दे, गद्दे व अन्य सामान शामिल हैं। इनमें मौजूद बेंजीन तत्व कैंसर का कारण बनता है। इसके अलावा आंखों को नजर नहीं आने वाले धूल के बारीक कण पर्दे, सोफे व अन्य सामान पर चिपके रहते हैं। ये हानिकारक तत्व सांस के साथ ही नहीं त्वचा के जरिये भी शरीर में प्रवेश करते हैं।
मित्र पौधे लगाएं पर्यावरण के साथ खुद को भी बचाएं
शोध में बाहरी प्रदूषण रोकने के लिए पेड़ पौधों की अधिकता पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही इंडोर पॉल्यूशन यानी घर के अंदर प्रदूषण रोकने के भी सुझाव दिए गए हैं। मित्र पौधे इसमें सबसे सहायक साबित होते हैं। इसमें ड्रेसिना, रिफ्लेक्सा, क्लोरो फाइटम, स्पाइडर, स्नेक, मनी प्लांट व अन्य पौधे शामिल हैं। ये हवा में मौजूद प्रदूषण फैलाने वाले हानिकारक तत्वों को सोख लेते हैं। इससे हवा शुद्ध हो जाती है और हम सुरक्षित रहते हैं।
पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। पिछले एक सप्ताह में हवा में धूल कणों ने लोगों की परेशानी बढ़ाई है। ग्लोबल वॉर्मिंग के अलावा वाहनों की भीड़, घटता वन क्षेत्र और सुविधाजनक होता मानव प्रदूषण के बड़े कारण हैं। विवि की छात्रा के शहर के पिछले साल किए गए शोध में रिहायशी क्षेत्र में पीएम-10 अधिक पाया गया है। शहर के बाहर सुनारिया चौक पर वाहनों की अधिकता के कारण पीएम-2.5 अधिक मिला। यह ज्यादा हानिकारक है। यह प्रदूषण बाहर ही नहीं घर के अंदर भी असर करने लगा है। घर में मौजूद एसी, फ्रीज, कंप्यूटर, पर्दे, गद्दे भी हमें बीमार करते हैं। प्रकृति ने हमें कुछ मित्र पौधे दिए हैं। ये हमें इंडोर पॉल्यूशन से बचाने में सहायक हैं।
- प्रो. राजेश धनखड़, पर्यावरण विभाग एवं डायरेक्टर बायो इन्फॉर्मेटिक्स, एमडीयू।
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- एमडीयू की छात्रा ने शोध में सुझाए मित्र पौधे के लाभ, पर्यावरण संरक्षण व पौधरोपण पर दिया जोर
- शहर का सुखपुरा चौक इलाजा सबसे ज्यादा प्रदूषित, सेक्टर में एक प्रदूषण का स्तर कम
विकास सैनी
रोहतक। प्रदूषण की मार घर के अंदर तक असर कर रही है। ग्लोबल वॉर्मिंग व हवा में घुलते जहर से हम बाहर ही नहीं घर में भी असुरक्षित हैं। धूल के महीन कण बेहद धीमी गति से रोगों की ओर धकेल रहे हैं। हमारे घरों की आकर्षक लुक देने व सुविधा देने वाले टीवी, फ्रिज, कंप्यूटर, सोफे, पर्दे भी हमें बीमार बना रहे हैं। यह हमारा नहीं, एमडीयू के पर्यावरण विभाग की छात्रा राजबाला की रिसर्च का दावा है। रिसर्च में इंडोर पॉल्यूशन से बचने के लिए मित्र पौधों को घर में जगह देने की सलाह दी गई है। इसमें ड्रेसिना, रिफ्लेक्सा, स्नेक, स्पाइडर सरीखे पौधे शामिल हैं। यह रिसर्च छात्रा ने विवि में जमा करा दी है।
7 दिनों से छाई है धूल की चादर
वायुमंडल में पिछले करीब एक सप्ताह से धूल कणों की चादर फैली हुई है। इसके असर से रोहतक में एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 383 तक पहुंच गया था। रविवार को यह स्तर
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रहा। इसका असर सीधा लोगों पर पड़ा। अस्थमा व श्वास रोगियों के साथ एलर्जी केस इन दिनों अचानक बढ़ गए। ऐसे में ज्यादातर लोगों ने घर से बाहर निकलने से परहेज बरता।
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रिहायशी इलाके में ज्यादा है प्रदूषण
एमडीयू में की गई रिसर्च में शहर के कुछ इलाके शामिल किए गए। इसमें हुडा कॉम्प्लेक्स, सुखपुरा चौक, सोनीपत चौक, सुनारिया चौक, विजय नगर मुख्य है। इन इलाकों में अलग अलग जगह जाकर प्रदूषण का स्तर मापा गया। हाई वॉल्यूम एयर सैंपलर के जरिए हवा की गुणवत्ता मापने पर रिहायशी इलाके में प्रदूषण ज्यादा पाया गया। यह हुडा कॉम्प्लेक्स में उच्च स्तर पर मिला। सुखपुरा चौक व सोनीपत चौक पर मध्य और सुनारिया चौक व विजय नगर में निचले स्तर पर रहा।
सुनारिया चौक पर सबसे ज्यादा पीएम 10 की मात्रा
शोध के मुताबिक, सुनारिया चौक पर सबसे ज्यादा पीएम-10 की मात्रा पाई गई। यह 90.22 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। यह स्तर 60 से कम होना चाहिए। इसके बाद सुखपुरा चौक, फिर विजय नगर, सोनीपत रोड, विकास नगर, हुडा कॉम्प्लेक्स व सबसे कम स्तर सेक्टर एक में रहा। यह 26 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। ये धूल कण महीन कणों से मोटे होते हैं।
सुखपुरा चौक पर सबसे ज्यादा पीएम 2.5 की मात्रा
शोध के मुताबिक, शहर के सुखपुरा चौक पर सबसे अधिक पीएम-2.5 की मात्रा पाई गई। यह 44.02 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। इसके बाद विजय नगर, सुनारिया चौक, सोनीपत रोड, हुडा कॉम्प्लेक्स व सबसे कम सेक्टर-एक में रहा। यह 16.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। ये धूल कण महीन होते हैं।
सुविधाजनक सामान भी बना रहा बीमार
शोध के मुताबिक, घर में साज सज्जा व सुविधा के लिए खरीदा जाने वाला सामान भी हमें बीमार बनता है। इसमें कंप्यूटर, प्रिंटर, फ्रिज, एसी, सोफे, पर्दे, गद्दे व अन्य सामान शामिल हैं। इनमें मौजूद बेंजीन तत्व कैंसर का कारण बनता है। इसके अलावा आंखों को नजर नहीं आने वाले धूल के बारीक कण पर्दे, सोफे व अन्य सामान पर चिपके रहते हैं। ये हानिकारक तत्व सांस के साथ ही नहीं त्वचा के जरिये भी शरीर में प्रवेश करते हैं।
मित्र पौधे लगाएं पर्यावरण के साथ खुद को भी बचाएं
शोध में बाहरी प्रदूषण रोकने के लिए पेड़ पौधों की अधिकता पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही इंडोर पॉल्यूशन यानी घर के अंदर प्रदूषण रोकने के भी सुझाव दिए गए हैं। मित्र पौधे इसमें सबसे सहायक साबित होते हैं। इसमें ड्रेसिना, रिफ्लेक्सा, क्लोरो फाइटम, स्पाइडर, स्नेक, मनी प्लांट व अन्य पौधे शामिल हैं। ये हवा में मौजूद प्रदूषण फैलाने वाले हानिकारक तत्वों को सोख लेते हैं। इससे हवा शुद्ध हो जाती है और हम सुरक्षित रहते हैं।
पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। पिछले एक सप्ताह में हवा में धूल कणों ने लोगों की परेशानी बढ़ाई है। ग्लोबल वॉर्मिंग के अलावा वाहनों की भीड़, घटता वन क्षेत्र और सुविधाजनक होता मानव प्रदूषण के बड़े कारण हैं। विवि की छात्रा के शहर के पिछले साल किए गए शोध में रिहायशी क्षेत्र में पीएम-10 अधिक पाया गया है। शहर के बाहर सुनारिया चौक पर वाहनों की अधिकता के कारण पीएम-2.5 अधिक मिला। यह ज्यादा हानिकारक है। यह प्रदूषण बाहर ही नहीं घर के अंदर भी असर करने लगा है। घर में मौजूद एसी, फ्रीज, कंप्यूटर, पर्दे, गद्दे भी हमें बीमार करते हैं। प्रकृति ने हमें कुछ मित्र पौधे दिए हैं। ये हमें इंडोर पॉल्यूशन से बचाने में सहायक हैं।
- प्रो. राजेश धनखड़, पर्यावरण विभाग एवं डायरेक्टर बायो इन्फॉर्मेटिक्स, एमडीयू।