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चरखी दादरी डिपो को पांच नई रोडवेज बसें मिली
Updated Wed, 30 Aug 2017 01:48 AM IST
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चरखी दादरी डिपो को पांच नई रोडवेज बसें मिलीं
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
चरखी दादरी रोडवेज डिपो को पांच नई बसें मिली हैं। अब डिपो के बेड़े में बसों की संख्या बढ़कर 157 हो गई है। नई बसें आने से डिपो को प्रति माह करीब 23 लाख रुपये तक के राजस्व की प्राप्ति हो सकेगी। ये नई बसें लंबे रूटों पर चलाई जानी हैं जबकि इन रूटों पर चलने वाली पुरानी बसों को लॉकल रूटों पर चलाया जाएगा। इससे लॉकल रूटों में बसों की किल्लत से छुटकारा भी मिलेगा। तीन दिनों में इन नई बसों का इंश्योरेंस होने के बाद यह सड़क पर दौड़ने लगेंगी। डिपो में इस समय 35 परिचालकों की कमी बनी हुई है। चरखी दादरी रोडवेज डिपो में नई बसों की काफी समय से जरूरत बनी रही है। इससे लंबे रूटों पर बसों की कमी बनी रही है। चरखी दादरी जिला बन जाने पर अब यहां से लंबे रूटों की बसों की ज्यादा जरूरत बनने लगी है।
चरखी दादरी जिला महेंद्रगढ़, झज्जर, रेवाड़ी, भिवानी व रोहतक सहित पांच जिलों से घिरा है। राजस्थान से चंडीगढ़, पानीपत, रोहतक जाने वाले अधिकतर यात्री चरखी दादरी होकर जाते हैं। ऐसे में यहां लंबे रूटों की बसों की ज्यादा जरूरत बनी रहती है। लंबे रूट की बसों पर विभाग को भी ज्यादा फायदा होता है। अब डिपो को तीन बसें मिल चुकी हैं जबकि कुल पांच बसें मिलनी हैं। दो बसें अगले दो-तीन दिनो में डिपो में पहुंच जाएंगी। यह नई बसें आधुनिक सुविधाओं से युक्त हैं। नया मॉडल तैयार कर भेजा गया है। यह बसें गुरुग्राम से आई हैं।
लंबे रूटों पर चलाने की है प्लानिंग
इन बसों के लंबे रूटों पर चलाए जाने की प्लानिंग विभाग की है। राजस्थान के जयपुर, पुष्कर, अजमेर, कालका, चंडीगढ़ आदि रूटों पर इन बसों के चलाए जाने पर प्लानिंग की जा रही है ताकि क्षेत्र के यात्रियों को यातायात की बढ़िया सुविधा मिल सके। फिलहाल यह तीन नई बसें डिपो में खड़ी हैं। इन बसों के इंश्योरेंस की कागज प्रक्रिया चल रही है। इस सप्ताह में यह इंश्योरेंस की प्रक्रिया भी साथ पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है। इंश्योरेंस होने पर ही यह गाड़ियां सड़कों पर दौड़ सकेंगी।
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== डिपो में 35 परिचालकों की
डिपो में इस समय 210 चालक व 202 परिचालक कार्यरत हैं लेकिन डिपो में इस समय 35 परिचालकों की कमी बनी हुई है। इससे कामकाज प्रभावित हो रहा है। काफी परिचालक तो एडवांस बुकिंग के काम में लगे हैं तथा कई परिचालकों की विभिन्न ब्रांचों में ड्यूटी लगी है इस वजह डिपो में 35 परिचालकों की कमी बनी हुई है। डिपो अधिकारियों ने इस संबंध में हैड ऑफिस को लिख रखा है। अधिकारियों के मुताबिक कुछ दिनो में जींद डिपो से 25 परिचालकों को चरखी दादरी डिपो में भेजे जाने की प्लानिंग है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द यह 25 परिचालक चरखी दादरी डिपो में ज्वाइन कर लेंगे।
== बसों की संख्या बढ़कर हुई 157
अब डिपो में बसों की संख्या बढ़कर 157 हो गई है। डिपो के जरिए इस समय तकरीबन सभी लोकल रूटों का कवर किया जा रहा है। बस डिपो के समय चरखी दादरी में करीब 60 बसें ही थी। इन नई पांच बसों के सड़कों पर दौडने पर डिपो को प्रति माह 23 लाख रुपये की आमदनी हो सकेगी। एक बस औसतन रोजाना 500 किलोमीटर की दूरी तय करती है जबकि एक बस से प्रति किलोमीटर 30 रुपये राजस्व मिलता है।
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वर्जन - डिपो को नई बसें मिली हैं। जैसे ही इन बसों का इंश्योरेंस हो जाएगा इन्हें लंबे रूटों पर लगा दिया जाएगा। इससे डिपो के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी तथा यात्रियों को भी सुविधा होगी।
नर सिंह, एसए, चरखी दादरी डिपो
वर्जन
डिपो को नई बसें मिली हैं। इन बसों से डिपो की आमदनी और बढ़ेगी। लंबे रूटों पर यात्रियों को सुविधा मिलेगी।
राजेश रावलधी, डिपो इंटक प्रधान
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
चरखी दादरी रोडवेज डिपो को पांच नई बसें मिली हैं। अब डिपो के बेड़े में बसों की संख्या बढ़कर 157 हो गई है। नई बसें आने से डिपो को प्रति माह करीब 23 लाख रुपये तक के राजस्व की प्राप्ति हो सकेगी। ये नई बसें लंबे रूटों पर चलाई जानी हैं जबकि इन रूटों पर चलने वाली पुरानी बसों को लॉकल रूटों पर चलाया जाएगा। इससे लॉकल रूटों में बसों की किल्लत से छुटकारा भी मिलेगा। तीन दिनों में इन नई बसों का इंश्योरेंस होने के बाद यह सड़क पर दौड़ने लगेंगी। डिपो में इस समय 35 परिचालकों की कमी बनी हुई है। चरखी दादरी रोडवेज डिपो में नई बसों की काफी समय से जरूरत बनी रही है। इससे लंबे रूटों पर बसों की कमी बनी रही है। चरखी दादरी जिला बन जाने पर अब यहां से लंबे रूटों की बसों की ज्यादा जरूरत बनने लगी है।
चरखी दादरी जिला महेंद्रगढ़, झज्जर, रेवाड़ी, भिवानी व रोहतक सहित पांच जिलों से घिरा है। राजस्थान से चंडीगढ़, पानीपत, रोहतक जाने वाले अधिकतर यात्री चरखी दादरी होकर जाते हैं। ऐसे में यहां लंबे रूटों की बसों की ज्यादा जरूरत बनी रहती है। लंबे रूट की बसों पर विभाग को भी ज्यादा फायदा होता है। अब डिपो को तीन बसें मिल चुकी हैं जबकि कुल पांच बसें मिलनी हैं। दो बसें अगले दो-तीन दिनो में डिपो में पहुंच जाएंगी। यह नई बसें आधुनिक सुविधाओं से युक्त हैं। नया मॉडल तैयार कर भेजा गया है। यह बसें गुरुग्राम से आई हैं।
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लंबे रूटों पर चलाने की है प्लानिंग
इन बसों के लंबे रूटों पर चलाए जाने की प्लानिंग विभाग की है। राजस्थान के जयपुर, पुष्कर, अजमेर, कालका, चंडीगढ़ आदि रूटों पर इन बसों के चलाए जाने पर प्लानिंग की जा रही है ताकि क्षेत्र के यात्रियों को यातायात की बढ़िया सुविधा मिल सके। फिलहाल यह तीन नई बसें डिपो में खड़ी हैं। इन बसों के इंश्योरेंस की कागज प्रक्रिया चल रही है। इस सप्ताह में यह इंश्योरेंस की प्रक्रिया भी साथ पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है। इंश्योरेंस होने पर ही यह गाड़ियां सड़कों पर दौड़ सकेंगी।
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== डिपो में 35 परिचालकों की
डिपो में इस समय 210 चालक व 202 परिचालक कार्यरत हैं लेकिन डिपो में इस समय 35 परिचालकों की कमी बनी हुई है। इससे कामकाज प्रभावित हो रहा है। काफी परिचालक तो एडवांस बुकिंग के काम में लगे हैं तथा कई परिचालकों की विभिन्न ब्रांचों में ड्यूटी लगी है इस वजह डिपो में 35 परिचालकों की कमी बनी हुई है। डिपो अधिकारियों ने इस संबंध में हैड ऑफिस को लिख रखा है। अधिकारियों के मुताबिक कुछ दिनो में जींद डिपो से 25 परिचालकों को चरखी दादरी डिपो में भेजे जाने की प्लानिंग है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द यह 25 परिचालक चरखी दादरी डिपो में ज्वाइन कर लेंगे।
== बसों की संख्या बढ़कर हुई 157
अब डिपो में बसों की संख्या बढ़कर 157 हो गई है। डिपो के जरिए इस समय तकरीबन सभी लोकल रूटों का कवर किया जा रहा है। बस डिपो के समय चरखी दादरी में करीब 60 बसें ही थी। इन नई पांच बसों के सड़कों पर दौडने पर डिपो को प्रति माह 23 लाख रुपये की आमदनी हो सकेगी। एक बस औसतन रोजाना 500 किलोमीटर की दूरी तय करती है जबकि एक बस से प्रति किलोमीटर 30 रुपये राजस्व मिलता है।
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वर्जन - डिपो को नई बसें मिली हैं। जैसे ही इन बसों का इंश्योरेंस हो जाएगा इन्हें लंबे रूटों पर लगा दिया जाएगा। इससे डिपो के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी तथा यात्रियों को भी सुविधा होगी।
नर सिंह, एसए, चरखी दादरी डिपो
वर्जन
डिपो को नई बसें मिली हैं। इन बसों से डिपो की आमदनी और बढ़ेगी। लंबे रूटों पर यात्रियों को सुविधा मिलेगी।
राजेश रावलधी, डिपो इंटक प्रधान