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11 कॉलेजों में एक छात्रावास, वो भी कंडम
Updated Wed, 21 Jun 2017 12:39 AM IST
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11 कॉलेजों में एक छात्रावास, वो भी कंडम
नारनौल। जिले के 11 राजकीय कॉलेजों में लड़कों के लिए छात्रावास की कोई सुविधा नहीं है। छात्रावास नहीं होने के कारण छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छात्र प्राइवेट पीजी में रहकर लुटने को मजबूर हैं।
अब कॉलेजों में दाखिले शुरू हो रहे हैं। ऐसे में नए विद्यार्थियों को फिर से छात्रावास की आवश्यकता होगी, लेकिन इस बार भी उन्हें निराशा ही हाथ लगेगी। वहीं नारनौल के पीजी कॉलेज में बने वर्षों पुराने एकमात्र छात्रावास की हालत भूत बंगले जैसी हो रही है। जहां पर तीन-चार वर्षों से कोई विद्यार्थी नहीं रह रहा।
जिले में 11 राजकीय कॉलेज बने हुए हैं। इनमें चार महिला कॉलेज भी शामिल हैं। वहीं एक महाविद्यालय निजामपुर तथा एक कनीना में बनना प्रस्तावित है। मगर इन कालेजों में से नारनौल के गर्ल कालेज में छोड़कर किसी में भी छात्रावास की सुविधा नहीं है। हालांकि सरकार द्वारा वर्षों पूर्व नारनौल के पीजी कॉलेज में छात्रावास बनाया था, जो आजकल भूत बंगला बना हुआ है। जहां पर गत तीन-चार साल से एक भी छात्र नहीं ठहरा है। ऐसे में जिला के 11 कालेजों के हजारों छात्रों को छात्रावास के लिए दरदर भटकना पड़ता है। जिसका फायदा प्राइवेट पीजी संचालक उठा रहे हैं। इन संचालकों के हाथों छात्र लुटने को भी मजबूर हो रहे हैं।
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अब नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुई है। ऐसे में कई बाहर के विद्यार्थी यहां रहना भी चाहते हैं, मगर छात्रावास न होने के कारण अब उन्हें बाहर किराए पर कमरे लेकर रहना पड़ेगा।
खंडहर होता जा रहा है नारनौल पीजी कॉलेज का छात्रावास
नारनौल के पीजी कॉलेज में बना छात्रावास प्रदेश के सबसे पुराने छात्रावासों में से एक है। नारनौल में बने हास्टल का उद्घाटन 15 अगस्त 1968 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चौ. बंशीलाल ने किया था। इसके बाद से 2012 तक इसमें बने 48 कमरों में विद्यार्थी रहा करते थे, मगर 2012 के बाद इस हास्टल की हालत खराब होने लगी। जिसके कारण न तो विद्यार्थी इसमें रहना पसंद कर रहे और न ही कालेज प्रशासन भी इस हास्टल में बच्चों को ठहराना चाहते। जिसके कारण अब 2013 से इस हास्टल में कोई भी विद्यार्थी नहीं रह रहा।
जर्जर हो चुका है यह हास्टल
नारनौल के पीजी कालेज में बना हास्टल बिल्कुल जर्जर हो चुका है। इसके कमरों के खिड़की व दरवाजे टूट गए हैं। बाथरूम का बुरा हाल है। वहीं छत टपकती हैं। खंडहर हो चुके इस हास्टल की अब दिवारों में भी सीलन आ चुकी है तथा यह गिरने के कगार पर पहुंच गई हैं। एक जगह से तो हास्टल की दीवार भी गिर गई है।
झाड़ियों का है साम्राज्य
यहां के पीजी कालेज में बने हास्टल में अब झाडिय़ों का साम्राज्य है। यहां चारों ओर झाडिय़ां ही झाडेिय़ां खड़ी हुई हैं। हास्टल परिसर में भी कई जगह कांटेदार व गाजर घास बड़ी मात्रा में खड़ी हुई है। जिसके कारण यहां पर अब लोगों को जाने से भी डर लगने लगा है।
हो सकता है इसमें सुधार
नारनौल के पीजी कॉलेज में बने छात्रावास में सुधार हो सकता है। शहर के पीजी कालेज में पीजी के कई ऐसे कोर्स हैं, जो एमडीयू द्वारा एक या दो जगह ही कराए जाते हैं। ऐसे में पीजी करने वाले छात्रों के अलावा बाहर से यूजी करने वाले छात्र भी यहां के कॉलेज में पढ़ाई करते हैं। इसलिए उनको यहां की बजाए बाहर रहना पड़ता है। इससे उनको भारी परेशानी होती है।
महिला कालेज में है 100 छात्राओं के लिए छात्रावास
नारनौल के महिला कॉलेज में 100 छात्राओं के लिए छात्रावास की सुविधा है। यहां पर छात्रावास की सुविधा होने के कारण आसपास व दूरदराज से यहां पर 98 छात्राएं ठहरी हुई हैं। जिससे इन छात्राओं को काफी फायदा हो रहा है। इनमें से इस बार ब्वाय कालेज की भी चार से पांच छात्राएं यहां ठहरी हुई हैं।
जिले के कॉलेज
पीजी कॉलेज, महेंद्रगढ़
महिला कॉलेज, महेंद्रगढ़
पीजी कॉलेज, नारनौल
महिला कॉलेज, नारनौल
पीजी कॉलेज, अटेली
महिला कॉलेज, अटेली
राजकीय कॉलेज, कनीना
राजकीय कॉलेज, सतनाली
राजकीय कॉलेज, नांगल चौधरी
महिला कॉलेज, नांगल चौधरी
राजकीय कालेज, कृष्ण नगर
नोट :- निजामपुर व कनीना में भी कालेज बनना प्रस्तावित है, जिसके लिए टेंडर छोड़े जाने हैं।
तीन पीजी कॉलेज में नहीं है सुविधा
नारनौल, अटेली व महेंद्रगढ़ में पीजी कॉलेज हैं। जहां पर प्रदेश व राजस्थान के अन्य कई स्थानों से विद्यार्थी यहां कोर्स करने आते हैं। जिसके कारण उनको यहां रहने के लिए छात्रावास की सुविधा की जरूरत होती है, मगर कालेजों में छात्रावास न होने के कारण उन्हें मजबूरी में किराये पर कमरा लेकर या प्राइवेट पीजी में ज्यादा पैसे देकर रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
यहां का कॉलेज काफी पुराना है, मगर हॉस्टल की सुविधा नहीं है। इसके कारण बाहर से आने वाले विद्यार्थियों को परेशानी होती है। -विकास कुमार
कॉलेज में स्नातकोत्तर की कक्षाओं के अलावा स्नातक कक्षाओं में भी बाहर से बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। ऐसे में यहां हॉस्टल होना बहुत जरूरी है। -अमित कुमार
लड़कों के लिए जिला में कोई हॉस्टल नहीं है। ऐसे में युवा पीजी में जाकर महंगे दामों में रहते हैं। इससे युवाओं की जेब ढीली हो रही है। -अखिल कुमार
कॉलेज में बने होस्टल को ठीक करा दिया जाना चाहिए। यह सबसे पुराना होस्टल है। अगर यह ठीक हो जाता है तो बच्चों को बहुत फायदा होगा। -विजित कुमार
जल्द ही नारनौल के पीजी कॉलेज में खंडहर पड़े छात्रावास का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके लिए पीडब्ल्यूडी विभाग को लिखा हुआ है। यहां पर हास्टल बन जाएगा तो बच्चों को फायदा होगा। अनेक बच्चे हास्टल की डिमांड करते हैं। -एनएन यादव, प्राचार्य पीजी कॉलेज नारनौल।
महेंद्रगढ़ कालेज में फिलहाल कोई हास्टल सुविधा नहीं है। वे शिक्षा मंत्री से मिलकर यहां होस्टल बनाने की मांग करेंगे, ताकि विद्यार्थियों को फायदा हो। -एलएन शर्मा, प्राचार्य पीजी कॉलेज, महेंद्रगढ़
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नारनौल। जिले के 11 राजकीय कॉलेजों में लड़कों के लिए छात्रावास की कोई सुविधा नहीं है। छात्रावास नहीं होने के कारण छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छात्र प्राइवेट पीजी में रहकर लुटने को मजबूर हैं।
अब कॉलेजों में दाखिले शुरू हो रहे हैं। ऐसे में नए विद्यार्थियों को फिर से छात्रावास की आवश्यकता होगी, लेकिन इस बार भी उन्हें निराशा ही हाथ लगेगी। वहीं नारनौल के पीजी कॉलेज में बने वर्षों पुराने एकमात्र छात्रावास की हालत भूत बंगले जैसी हो रही है। जहां पर तीन-चार वर्षों से कोई विद्यार्थी नहीं रह रहा।
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जिले में 11 राजकीय कॉलेज बने हुए हैं। इनमें चार महिला कॉलेज भी शामिल हैं। वहीं एक महाविद्यालय निजामपुर तथा एक कनीना में बनना प्रस्तावित है। मगर इन कालेजों में से नारनौल के गर्ल कालेज में छोड़कर किसी में भी छात्रावास की सुविधा नहीं है। हालांकि सरकार द्वारा वर्षों पूर्व नारनौल के पीजी कॉलेज में छात्रावास बनाया था, जो आजकल भूत बंगला बना हुआ है। जहां पर गत तीन-चार साल से एक भी छात्र नहीं ठहरा है। ऐसे में जिला के 11 कालेजों के हजारों छात्रों को छात्रावास के लिए दरदर भटकना पड़ता है। जिसका फायदा प्राइवेट पीजी संचालक उठा रहे हैं। इन संचालकों के हाथों छात्र लुटने को भी मजबूर हो रहे हैं।
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अब नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुई है। ऐसे में कई बाहर के विद्यार्थी यहां रहना भी चाहते हैं, मगर छात्रावास न होने के कारण अब उन्हें बाहर किराए पर कमरे लेकर रहना पड़ेगा।
खंडहर होता जा रहा है नारनौल पीजी कॉलेज का छात्रावास
नारनौल के पीजी कॉलेज में बना छात्रावास प्रदेश के सबसे पुराने छात्रावासों में से एक है। नारनौल में बने हास्टल का उद्घाटन 15 अगस्त 1968 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चौ. बंशीलाल ने किया था। इसके बाद से 2012 तक इसमें बने 48 कमरों में विद्यार्थी रहा करते थे, मगर 2012 के बाद इस हास्टल की हालत खराब होने लगी। जिसके कारण न तो विद्यार्थी इसमें रहना पसंद कर रहे और न ही कालेज प्रशासन भी इस हास्टल में बच्चों को ठहराना चाहते। जिसके कारण अब 2013 से इस हास्टल में कोई भी विद्यार्थी नहीं रह रहा।
जर्जर हो चुका है यह हास्टल
नारनौल के पीजी कालेज में बना हास्टल बिल्कुल जर्जर हो चुका है। इसके कमरों के खिड़की व दरवाजे टूट गए हैं। बाथरूम का बुरा हाल है। वहीं छत टपकती हैं। खंडहर हो चुके इस हास्टल की अब दिवारों में भी सीलन आ चुकी है तथा यह गिरने के कगार पर पहुंच गई हैं। एक जगह से तो हास्टल की दीवार भी गिर गई है।
झाड़ियों का है साम्राज्य
यहां के पीजी कालेज में बने हास्टल में अब झाडिय़ों का साम्राज्य है। यहां चारों ओर झाडिय़ां ही झाडेिय़ां खड़ी हुई हैं। हास्टल परिसर में भी कई जगह कांटेदार व गाजर घास बड़ी मात्रा में खड़ी हुई है। जिसके कारण यहां पर अब लोगों को जाने से भी डर लगने लगा है।
हो सकता है इसमें सुधार
नारनौल के पीजी कॉलेज में बने छात्रावास में सुधार हो सकता है। शहर के पीजी कालेज में पीजी के कई ऐसे कोर्स हैं, जो एमडीयू द्वारा एक या दो जगह ही कराए जाते हैं। ऐसे में पीजी करने वाले छात्रों के अलावा बाहर से यूजी करने वाले छात्र भी यहां के कॉलेज में पढ़ाई करते हैं। इसलिए उनको यहां की बजाए बाहर रहना पड़ता है। इससे उनको भारी परेशानी होती है।
महिला कालेज में है 100 छात्राओं के लिए छात्रावास
नारनौल के महिला कॉलेज में 100 छात्राओं के लिए छात्रावास की सुविधा है। यहां पर छात्रावास की सुविधा होने के कारण आसपास व दूरदराज से यहां पर 98 छात्राएं ठहरी हुई हैं। जिससे इन छात्राओं को काफी फायदा हो रहा है। इनमें से इस बार ब्वाय कालेज की भी चार से पांच छात्राएं यहां ठहरी हुई हैं।
जिले के कॉलेज
पीजी कॉलेज, महेंद्रगढ़
महिला कॉलेज, महेंद्रगढ़
पीजी कॉलेज, नारनौल
महिला कॉलेज, नारनौल
पीजी कॉलेज, अटेली
महिला कॉलेज, अटेली
राजकीय कॉलेज, कनीना
राजकीय कॉलेज, सतनाली
राजकीय कॉलेज, नांगल चौधरी
महिला कॉलेज, नांगल चौधरी
राजकीय कालेज, कृष्ण नगर
नोट :- निजामपुर व कनीना में भी कालेज बनना प्रस्तावित है, जिसके लिए टेंडर छोड़े जाने हैं।
तीन पीजी कॉलेज में नहीं है सुविधा
नारनौल, अटेली व महेंद्रगढ़ में पीजी कॉलेज हैं। जहां पर प्रदेश व राजस्थान के अन्य कई स्थानों से विद्यार्थी यहां कोर्स करने आते हैं। जिसके कारण उनको यहां रहने के लिए छात्रावास की सुविधा की जरूरत होती है, मगर कालेजों में छात्रावास न होने के कारण उन्हें मजबूरी में किराये पर कमरा लेकर या प्राइवेट पीजी में ज्यादा पैसे देकर रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
यहां का कॉलेज काफी पुराना है, मगर हॉस्टल की सुविधा नहीं है। इसके कारण बाहर से आने वाले विद्यार्थियों को परेशानी होती है। -विकास कुमार
कॉलेज में स्नातकोत्तर की कक्षाओं के अलावा स्नातक कक्षाओं में भी बाहर से बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। ऐसे में यहां हॉस्टल होना बहुत जरूरी है। -अमित कुमार
लड़कों के लिए जिला में कोई हॉस्टल नहीं है। ऐसे में युवा पीजी में जाकर महंगे दामों में रहते हैं। इससे युवाओं की जेब ढीली हो रही है। -अखिल कुमार
कॉलेज में बने होस्टल को ठीक करा दिया जाना चाहिए। यह सबसे पुराना होस्टल है। अगर यह ठीक हो जाता है तो बच्चों को बहुत फायदा होगा। -विजित कुमार
जल्द ही नारनौल के पीजी कॉलेज में खंडहर पड़े छात्रावास का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके लिए पीडब्ल्यूडी विभाग को लिखा हुआ है। यहां पर हास्टल बन जाएगा तो बच्चों को फायदा होगा। अनेक बच्चे हास्टल की डिमांड करते हैं। -एनएन यादव, प्राचार्य पीजी कॉलेज नारनौल।
महेंद्रगढ़ कालेज में फिलहाल कोई हास्टल सुविधा नहीं है। वे शिक्षा मंत्री से मिलकर यहां होस्टल बनाने की मांग करेंगे, ताकि विद्यार्थियों को फायदा हो। -एलएन शर्मा, प्राचार्य पीजी कॉलेज, महेंद्रगढ़