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Rewari News: होली गायन में बढ़ती जा रही युवाओं की रुचि
Sun, 24 Mar 2024 02:08 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 24 Mar 2024 02:08 AM IST
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कोसली । भले ही आधुनिक युग में त्योहार के रीति-रिवाज बदल रहे हो, लेकिन क्षेत्र में आज भी कुछ गांवों में होली पर बजने वाला धमाल और होली गायन की परंपरा कायम है। होली गायन की शुरुआत नठेडा गांव से शिवरात्रि के दिन से होती है। इस वर्ष भी होली गायन का शुभारंभ गायन पार्टियों को गुड़ की भेली देकर किया गया था। जो हर वर्ष की भांति होली के दिन क्षेत्र के प्रसिद्ध मठ धाम कोसली पर समापन होगा।
विभिन्न गांवों की होली गायन पार्टियां गांव के बुलावे पर एक गांव से दूसरे गांव में होली गायन का अनूठा कार्यक्रम बदलती पुरानी परंपराओं में चार चांद लगा कर युवाओं को पुराने रीति रिवाजों से अवगत कराते हैं। युवाओं की रुचि होली गायन में बढ़ती जा रही है। जिस दिन क्षेत्र की होली गायन पार्टियां पहुंच कर आधुनिक युग में लुप्त होती परंपराओं को युवाओं की मौजूदगी में दिखा कर उन्हें आगे भी इसी तरह से चलाते रहने की सलाह देते हैं।
क्षेत्र के गांवों में बुलावे पर जाने वाली प्रत्येक होली गायन पार्टी को गुड़ की भेली और श्रद्धा अनुसार भेंट देकर विदा किया जाता है। गांव जाहिदपुर होली गायन पार्टी के सदस्य थावर सिंह बताते हैं कि गायन कि परंपरा उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है। क्षेत्र के सभी गांवों से होली गायन पार्टियां महाशिवरात्रि के दिन नठेडा में एकत्र होती हैं। वहां से होली गायन की शुरूआत होती है। इसका समापन कोसली मठ पर होली फाग के दिन होता है।
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उन्होंने बताया कि होली गायन में जहां बुजुर्ग शामिल होते हैं वहीं युवा भी होली गायन में बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं। होली गायन पार्टी को बुलाने से पहले उस गांव के सरपंच की तरफ से लिखित में निमंत्रण आने के बाद में गांव में होली गायन पार्टियां जुटती हैं। पार्टी सहित विभिन्न गांवों से हर साल नारनौल में रोहतक रेडियो के लिए होली गायन रिकाॅर्डिंग में भी भाग लेते हैं।
मिला शगुन धर्मार्थ में करते हैं खर्च
होली गायन के समय मिलने वाला पैसा और गुड़ समापन के बाद सभी होली गायन पार्टियां गोशाला में दान कर देती हैं। होली गायन के बारे में कोसली स्टेशन क्षेत्र के भगवान सिंह यादव का कहना है क्षेत्र के कुछ गांवों कि होली गायन पार्टियां आज भी पुरानी परंपरा को कायम रखे हुए हैं। जो सराहनीय है। श्यामनगर के राजेंद्र प्रधान का कहना है कि होली गायन कि पार्टियां गांव-गांव होनी चाहिए। कमोवेश यही बातें राजेंद्र प्रधान ने भी कही।
भाईचारा कायम रखने में अहम भूमिका निभा रहा
राज सिंगला का कहना है कि होली गायन का कार्य जिस तरह से हर साल होली से पहले शुरू होकर होली के बाद तक चलता है। वह बहुत अच्छा लगता है। लोग होली गायन को सुनने के लिए बड़ी संख्या में एकत्रित होते हैं। ये भाईचारा भी कायम रहने में अहम भूमिका निभा रहा है।
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विभिन्न गांवों की होली गायन पार्टियां गांव के बुलावे पर एक गांव से दूसरे गांव में होली गायन का अनूठा कार्यक्रम बदलती पुरानी परंपराओं में चार चांद लगा कर युवाओं को पुराने रीति रिवाजों से अवगत कराते हैं। युवाओं की रुचि होली गायन में बढ़ती जा रही है। जिस दिन क्षेत्र की होली गायन पार्टियां पहुंच कर आधुनिक युग में लुप्त होती परंपराओं को युवाओं की मौजूदगी में दिखा कर उन्हें आगे भी इसी तरह से चलाते रहने की सलाह देते हैं।
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क्षेत्र के गांवों में बुलावे पर जाने वाली प्रत्येक होली गायन पार्टी को गुड़ की भेली और श्रद्धा अनुसार भेंट देकर विदा किया जाता है। गांव जाहिदपुर होली गायन पार्टी के सदस्य थावर सिंह बताते हैं कि गायन कि परंपरा उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है। क्षेत्र के सभी गांवों से होली गायन पार्टियां महाशिवरात्रि के दिन नठेडा में एकत्र होती हैं। वहां से होली गायन की शुरूआत होती है। इसका समापन कोसली मठ पर होली फाग के दिन होता है।
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उन्होंने बताया कि होली गायन में जहां बुजुर्ग शामिल होते हैं वहीं युवा भी होली गायन में बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं। होली गायन पार्टी को बुलाने से पहले उस गांव के सरपंच की तरफ से लिखित में निमंत्रण आने के बाद में गांव में होली गायन पार्टियां जुटती हैं। पार्टी सहित विभिन्न गांवों से हर साल नारनौल में रोहतक रेडियो के लिए होली गायन रिकाॅर्डिंग में भी भाग लेते हैं।
मिला शगुन धर्मार्थ में करते हैं खर्च
होली गायन के समय मिलने वाला पैसा और गुड़ समापन के बाद सभी होली गायन पार्टियां गोशाला में दान कर देती हैं। होली गायन के बारे में कोसली स्टेशन क्षेत्र के भगवान सिंह यादव का कहना है क्षेत्र के कुछ गांवों कि होली गायन पार्टियां आज भी पुरानी परंपरा को कायम रखे हुए हैं। जो सराहनीय है। श्यामनगर के राजेंद्र प्रधान का कहना है कि होली गायन कि पार्टियां गांव-गांव होनी चाहिए। कमोवेश यही बातें राजेंद्र प्रधान ने भी कही।
भाईचारा कायम रखने में अहम भूमिका निभा रहा
राज सिंगला का कहना है कि होली गायन का कार्य जिस तरह से हर साल होली से पहले शुरू होकर होली के बाद तक चलता है। वह बहुत अच्छा लगता है। लोग होली गायन को सुनने के लिए बड़ी संख्या में एकत्रित होते हैं। ये भाईचारा भी कायम रहने में अहम भूमिका निभा रहा है।