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Rewari News: सरकारी स्कूलों में पानी की होगी जांच, टीडीएस अधिक मिलने पर लगेंगे आरओ
Thu, 29 Oct 2026 11:50 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 29 Oct 2026 11:50 PM IST
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रेवाड़ी। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। जहां टीडीएस (टोटल टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स) अधिक होगी वहां आरओ सिस्टम लगाए जाएंगे। कुछ दिनों पहले ही जिले के 90 सरकारी स्कूलों में पानी के सैंपल फेल मिले थे।
हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद ने जिले के सभी सरकारी स्कूलों में पेयजल की जांच कराने और आवश्यक सुधार करने के निर्देश जारी किए हैं।
परिषद की ओर से जारी पत्र में सभी जिले के जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी और समग्र शिक्षा के जिला परियोजना समन्वयकों को इस संबंध में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों को इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना होगा। स्कूलों में उपलब्ध पेयजल के नमूनों की जांच जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के समन्वय से कराई जाएगी।
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जांच के माध्यम से पानी की गुणवत्ता का पता लगाया जाएगा। जिन स्कूलों में पानी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलेगा, उनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद संबंधित स्कूलों में पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
एमआईएस पोर्टल पर अपडेट करनी होगी रिपोर्ट
पेयजल की जांच के बाद रिपोर्ट को स्कूल के लॉग इन के माध्यम से एमआईएस पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इससे स्कूलों में पानी की गुणवत्ता से संबंधित जानकारी दर्ज रहेगी। राज्य परियोजना निदेशक की ओर से जारी निर्देशों में संबंधित अधिकारियों को आपसी तालमेल के साथ निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई पूरी कर समेकित रिपोर्ट मुख्यालय को भेजने को कहा गया है।
स्वच्छता एक्शन प्लान से होगा खर्च
पानी की जांच पर होने वाला खर्च समग्र शिक्षा के तहत मिलने वाली वार्षिक स्कूल ग्रांट के स्वच्छता एक्शन प्लान की 10 प्रतिशत राशि से किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिन स्कूलों में पानी पीने योग्य नहीं पाया जाएगा, वहां जरूरत के अनुसार आरओ सिस्टम या अन्य उपयुक्त वाटर प्यूरीफिकेशन की व्यवस्था की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
वर्जन:
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। पानी के नमूनों की जांच कराई जाएगी। जहां पानी की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलेगी, वहां आवश्यक सुधार किए जाएंगे। सभी स्कूलों को जांच रिपोर्ट एमआईएस पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए जाएंगे।-राजेंद्र शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी।
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हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद ने जिले के सभी सरकारी स्कूलों में पेयजल की जांच कराने और आवश्यक सुधार करने के निर्देश जारी किए हैं।
परिषद की ओर से जारी पत्र में सभी जिले के जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी और समग्र शिक्षा के जिला परियोजना समन्वयकों को इस संबंध में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
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अधिकारियों को इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना होगा। स्कूलों में उपलब्ध पेयजल के नमूनों की जांच जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के समन्वय से कराई जाएगी।
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जांच के माध्यम से पानी की गुणवत्ता का पता लगाया जाएगा। जिन स्कूलों में पानी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलेगा, उनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद संबंधित स्कूलों में पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
एमआईएस पोर्टल पर अपडेट करनी होगी रिपोर्ट
पेयजल की जांच के बाद रिपोर्ट को स्कूल के लॉग इन के माध्यम से एमआईएस पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इससे स्कूलों में पानी की गुणवत्ता से संबंधित जानकारी दर्ज रहेगी। राज्य परियोजना निदेशक की ओर से जारी निर्देशों में संबंधित अधिकारियों को आपसी तालमेल के साथ निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई पूरी कर समेकित रिपोर्ट मुख्यालय को भेजने को कहा गया है।
स्वच्छता एक्शन प्लान से होगा खर्च
पानी की जांच पर होने वाला खर्च समग्र शिक्षा के तहत मिलने वाली वार्षिक स्कूल ग्रांट के स्वच्छता एक्शन प्लान की 10 प्रतिशत राशि से किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिन स्कूलों में पानी पीने योग्य नहीं पाया जाएगा, वहां जरूरत के अनुसार आरओ सिस्टम या अन्य उपयुक्त वाटर प्यूरीफिकेशन की व्यवस्था की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
वर्जन:
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। पानी के नमूनों की जांच कराई जाएगी। जहां पानी की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलेगी, वहां आवश्यक सुधार किए जाएंगे। सभी स्कूलों को जांच रिपोर्ट एमआईएस पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए जाएंगे।-राजेंद्र शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी।