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मंडी से उपभोक्ता तक पहुंचने में 6 गुना महंगी हो जाती हैं सब्जियां
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ट्रैक्टर में सब्जी बेचता किसान।
- फोटो : Rewari
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किसानों से उपभोक्ता तक पहुंचने में सब्जियों के भाव 6 गुना तक बढ़ जाते हैं। पेट्रोल-डीजल के बढ़े दाम या फिर आवक में कमी की बजाय, सब्जियों के दामों में मनमानी बढ़ोतरी इसका मुख्य कारण है। इस मनमानी का मुख्य कारण निगरानी तंत्र का अभाव होना है। हालात ऐसे हैं कि एक ही सब्जी के प्रति किलोग्राम भाव एक कालोनी से दूसरी तक में दोगुना हो जाते हैं।
बुधवार को किसानों के खेत से लेकर सब्जी मंडी में थोक, खुदरा व कालोनियों में बिकने वाली सब्जियों के दामों पर अमर उजला की पड़ताल में ये तथ्य सामने आए। बता दें कि पहले मंडी प्रशासन की ओर से आढ़तियों व विक्रेताओं पर नियंत्रण रखा जाता था। लेकिन मंडी टैक्स बंद करने के बाद से मंडी प्रशासन महज साफ-सफाई तक ही सिमट कर रह गया है। मंडियों में इन दिनों सब्जियों का भाव काफी कम है। चार-पांच दिनों से सब्जियों के भाव लगातार गिर रहे हैं। हरी सब्जियों का दाम कम होने से किसानों को कोई फायदा नहीं हो रहा है। किसान परेशान हैं कि उसकी लागत भी पूरी नहीं हो रही। लेकिन मंडी में मंदी बिकने वाली ये सब्जी कुछ ही दूर रिटेल मार्केट में पहुंचते- पहुंचते कई गुना महंगी हो जाती हैं।
किसान की गोभी की मंडी में खरीद 10-12 रुपये किलो
सनसिटी के पास 20 साल से सब्जी उगाने वाले किसान ग्यारसा ने बताया कि सब्जी मंडी में औसतन गोभी 10-12 रुपये किलो बिक रही है। यदि गोभी 15 रुपये किलो से कम बिकती है तो लागत भी नहीं निकल पाती है। इसके अलावा पालक भी 10 रुपये किलो से ज्यादा में नहीं बिक रहा है। जबकि बाजार में इसकी 60 रुपये किलो तक की कीमत वसूली जा रही है। ऐसे ही हालात बैंगन के हैं, बैंगन किसान से 10 रुपये किलो में खरीदा जा रहा है, लेकिन खुदरा रेट 60 तक पहुंच जाता है।
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सब्जी मंडी और कालोनियों के रेट में भारी अंतर
ग्यारसा की गोभी शहर की सब्जी मंडी में 10 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से खरीद जाती है। मंडी में खुदरा सब्जी विक्रेता इस गोभी को 20 रुपये किलो में बेचते हैं। लेकिन सेक्टर-3 की मार्केट तक पहुंचने में इस गोभी के दाम 40 रुपये प्रति किलो हो जाते हैं। यही कारण है कि सब्जियों के दाम गिरने के बाद भी खुदरा मार्केट में भाव ज्यादा ही बने रहते हैं।
कीमतें नहीं मिलने से किसान खुद बाजार में बेच रहे सब्जी
सब्जी मंडी में किसानों को पूरा भाव नहीं मिलने का असर यह कि कुछ किसानों ने रिटेल में सब्जियां बेचना शुरू कर दिया है। इसका लाभ किसान के साथ उपभोक्ता को भी मिल रहा है। शहर के अभय सिंह चौक पर ट्रैक्टर में सब्जी बेचने वाले किसान राजनारायण ने बताया कि मंडी में गोभी 10 रुपये किलो में बिकती है, रिटेल में 20 रुपये किलो से ज्यादा में बिक जाती है। ऐसे में उपभोक्ता के साथ उसे भी दोगुना लाभ हो रहा है। इतना ही नहीं ट्रैक्टर से लेकर अन्य वाहनों में किसान भी सब्जी बेचने के लिए कालोनियों में पहुंच रहे हैं।
दुकानदारों का ये है तर्क
सब्जियों के महंगे दाम पर जब रिटेलर दुकानदार दिनेश से बात की गई। उसने कहा कि उन्हें मंडी शुल्क और विकास शुल्क भी देना पड़ता है। इसके अलावा थोक में खरीदी गई सब्जियों में काफी खराब भी निकलती है। खराब होने वाली सब्जी भी उन्हें फेंकनी पड़ती है। ये सब जोड़कर ही वे सब्जी का दाम तय करते हैं।
किसान व उपभोक्ता पर सबसे ज्यादा मार
सब्जी उत्पादक किसान इसलिए परेशान हैं कि उन्हें उचित कीमत नहीं मिल रही है। तीन माह में सब्जी तैयार करने के दौरान खाद व बीज महंगे दामों में खरीदकर दिनरात मेहनत के बाद भी कीमत पूरी न मिले तो किसानों का दर्ज झलक जाता है। वहीं दूसरी ओर इसकी सबसे ज्यादा मार उपभोक्ता पर पड़ती है, क्योंकि जो सब्जी किसान से 10 रुपये में मिल सकती है, उसे उन्हें 60 रुपये तक में खरीदना पड़ रहा है।
नासिक का प्याज है महंगा
मंडी में नासिक के प्याज की आवक बढ़ने से आढ़तियों के पास से 35 से 45 रुपये किलो तक प्याज मिल रहा है। वहीं मंडी में फड़ीवालों के पास भी प्याज 50 रुपये प्रतिकिलो बेचा जा रहा है। कुछ दिन पहले प्याज के भाव 125 रुपये किलो तक पहुंच गए थे। आने वाले दिनों में प्याज के दाम और घटने की संभावना है।
मंडी आढ़त सेेे बढ़ते हैं भाव
सब्जी उत्पादक किसान सब्जियों को बेचने के मंडी में लाते हैं तो उस पर मंडी आढ़त भी देना पड़ता है। ये पाचं से 10 प्रतिशत होता है। इससे सब्जियों के भाव में महंगाई आना स्वाभाविक है।
कोई टैक्स नहीं है, शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई करेंगे : सचिव
मार्केट कमेटी के सचिव सत्यप्रकाश का कहना है कि सरकार की ओर से सब्जी उत्पादक किसानों से किसी प्रकार को कोई कर नहीं लिया जाता है। न ही कोई आढ़त का प्रावधान है। फिर भी किसी किसान की शिकायत है तो शिकायत दें तुरंत कार्रवाई करेंगे।
दोनों की सहमति से होता है, कोई जबरदस्ती नहीं : मंडी प्रधान
सब्जी मंडी प्रधान हंसराज पोसवाल ने कहा कि सब्जी बेचने के लिए किसानों को कोई आढ़त चार्ज नहीं देना पड़ता है। किसान व आढ़ती दोनों की सहमति से ऐसा हो जाए तो कुछ नहीं कह सकते, लेकिन मंडी में ऐसा नहीं हो रहा है।
कहां पर चूक हो रही है, इसकी कराई जाएगी जांच : डीसी
डीसी यशेंद्र सिंह ने कहा कि मंडी से लेकर किसी भी स्तर पर कहीं चूक है तो इसकी जांच कराई जाएगी। इसके अलावा उपभोक्ताओं को भी जागरूक होने की जरूरत है।
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बुधवार को किसानों के खेत से लेकर सब्जी मंडी में थोक, खुदरा व कालोनियों में बिकने वाली सब्जियों के दामों पर अमर उजला की पड़ताल में ये तथ्य सामने आए। बता दें कि पहले मंडी प्रशासन की ओर से आढ़तियों व विक्रेताओं पर नियंत्रण रखा जाता था। लेकिन मंडी टैक्स बंद करने के बाद से मंडी प्रशासन महज साफ-सफाई तक ही सिमट कर रह गया है। मंडियों में इन दिनों सब्जियों का भाव काफी कम है। चार-पांच दिनों से सब्जियों के भाव लगातार गिर रहे हैं। हरी सब्जियों का दाम कम होने से किसानों को कोई फायदा नहीं हो रहा है। किसान परेशान हैं कि उसकी लागत भी पूरी नहीं हो रही। लेकिन मंडी में मंदी बिकने वाली ये सब्जी कुछ ही दूर रिटेल मार्केट में पहुंचते- पहुंचते कई गुना महंगी हो जाती हैं।
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किसान की गोभी की मंडी में खरीद 10-12 रुपये किलो
सनसिटी के पास 20 साल से सब्जी उगाने वाले किसान ग्यारसा ने बताया कि सब्जी मंडी में औसतन गोभी 10-12 रुपये किलो बिक रही है। यदि गोभी 15 रुपये किलो से कम बिकती है तो लागत भी नहीं निकल पाती है। इसके अलावा पालक भी 10 रुपये किलो से ज्यादा में नहीं बिक रहा है। जबकि बाजार में इसकी 60 रुपये किलो तक की कीमत वसूली जा रही है। ऐसे ही हालात बैंगन के हैं, बैंगन किसान से 10 रुपये किलो में खरीदा जा रहा है, लेकिन खुदरा रेट 60 तक पहुंच जाता है।
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सब्जी मंडी और कालोनियों के रेट में भारी अंतर
ग्यारसा की गोभी शहर की सब्जी मंडी में 10 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से खरीद जाती है। मंडी में खुदरा सब्जी विक्रेता इस गोभी को 20 रुपये किलो में बेचते हैं। लेकिन सेक्टर-3 की मार्केट तक पहुंचने में इस गोभी के दाम 40 रुपये प्रति किलो हो जाते हैं। यही कारण है कि सब्जियों के दाम गिरने के बाद भी खुदरा मार्केट में भाव ज्यादा ही बने रहते हैं।
कीमतें नहीं मिलने से किसान खुद बाजार में बेच रहे सब्जी
सब्जी मंडी में किसानों को पूरा भाव नहीं मिलने का असर यह कि कुछ किसानों ने रिटेल में सब्जियां बेचना शुरू कर दिया है। इसका लाभ किसान के साथ उपभोक्ता को भी मिल रहा है। शहर के अभय सिंह चौक पर ट्रैक्टर में सब्जी बेचने वाले किसान राजनारायण ने बताया कि मंडी में गोभी 10 रुपये किलो में बिकती है, रिटेल में 20 रुपये किलो से ज्यादा में बिक जाती है। ऐसे में उपभोक्ता के साथ उसे भी दोगुना लाभ हो रहा है। इतना ही नहीं ट्रैक्टर से लेकर अन्य वाहनों में किसान भी सब्जी बेचने के लिए कालोनियों में पहुंच रहे हैं।
दुकानदारों का ये है तर्क
सब्जियों के महंगे दाम पर जब रिटेलर दुकानदार दिनेश से बात की गई। उसने कहा कि उन्हें मंडी शुल्क और विकास शुल्क भी देना पड़ता है। इसके अलावा थोक में खरीदी गई सब्जियों में काफी खराब भी निकलती है। खराब होने वाली सब्जी भी उन्हें फेंकनी पड़ती है। ये सब जोड़कर ही वे सब्जी का दाम तय करते हैं।
किसान व उपभोक्ता पर सबसे ज्यादा मार
सब्जी उत्पादक किसान इसलिए परेशान हैं कि उन्हें उचित कीमत नहीं मिल रही है। तीन माह में सब्जी तैयार करने के दौरान खाद व बीज महंगे दामों में खरीदकर दिनरात मेहनत के बाद भी कीमत पूरी न मिले तो किसानों का दर्ज झलक जाता है। वहीं दूसरी ओर इसकी सबसे ज्यादा मार उपभोक्ता पर पड़ती है, क्योंकि जो सब्जी किसान से 10 रुपये में मिल सकती है, उसे उन्हें 60 रुपये तक में खरीदना पड़ रहा है।
नासिक का प्याज है महंगा
मंडी में नासिक के प्याज की आवक बढ़ने से आढ़तियों के पास से 35 से 45 रुपये किलो तक प्याज मिल रहा है। वहीं मंडी में फड़ीवालों के पास भी प्याज 50 रुपये प्रतिकिलो बेचा जा रहा है। कुछ दिन पहले प्याज के भाव 125 रुपये किलो तक पहुंच गए थे। आने वाले दिनों में प्याज के दाम और घटने की संभावना है।
मंडी आढ़त सेेे बढ़ते हैं भाव
सब्जी उत्पादक किसान सब्जियों को बेचने के मंडी में लाते हैं तो उस पर मंडी आढ़त भी देना पड़ता है। ये पाचं से 10 प्रतिशत होता है। इससे सब्जियों के भाव में महंगाई आना स्वाभाविक है।
कोई टैक्स नहीं है, शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई करेंगे : सचिव
मार्केट कमेटी के सचिव सत्यप्रकाश का कहना है कि सरकार की ओर से सब्जी उत्पादक किसानों से किसी प्रकार को कोई कर नहीं लिया जाता है। न ही कोई आढ़त का प्रावधान है। फिर भी किसी किसान की शिकायत है तो शिकायत दें तुरंत कार्रवाई करेंगे।
दोनों की सहमति से होता है, कोई जबरदस्ती नहीं : मंडी प्रधान
सब्जी मंडी प्रधान हंसराज पोसवाल ने कहा कि सब्जी बेचने के लिए किसानों को कोई आढ़त चार्ज नहीं देना पड़ता है। किसान व आढ़ती दोनों की सहमति से ऐसा हो जाए तो कुछ नहीं कह सकते, लेकिन मंडी में ऐसा नहीं हो रहा है।
कहां पर चूक हो रही है, इसकी कराई जाएगी जांच : डीसी
डीसी यशेंद्र सिंह ने कहा कि मंडी से लेकर किसी भी स्तर पर कहीं चूक है तो इसकी जांच कराई जाएगी। इसके अलावा उपभोक्ताओं को भी जागरूक होने की जरूरत है।