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Rewari News: सार्वजनिक स्थानों पर चार्जिंग पोर्ट का उपयोग खतरे से खाली नहीं
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रेवाड़ी। पुलिस अधीक्षक हेमेंद्र कुमार मीणा की ओर से पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों से जुड़े साइबर खतरे जूस जैकिंग को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है। उन्होंने बताया कि बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और मॉल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर लगे यूएसबी चार्जिंग पोर्ट का उपयोग करना खतरे से खाली नहीं है।
पुलिस अधीक्षक के अनुसार साइबर अपराधी इन पब्लिक यूएसबी पोर्ट के जरिए मोबाइल फोन में मैलवेयर इंस्टॉल कर सकते हैं। इसके माध्यम से यूजर का पर्सनल डेटा जैसे फोटो, कॉन्टैक्ट, पासवर्ड और बैंकिंग जानकारी चोरी की जा सकती है। इस तरह की ठगी को जूस जैकिंग कहा जाता है जिसमें कई बार यूजर को भनक तक नहीं लगती।
उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे हमेशा अपना निजी चार्जर और एडॉप्टर इस्तेमाल करें। यदि जरूरत हो तो पावर बैंक का उपयोग करें और किसी अनजान यूएसबी केबल या पोर्ट से फोन कनेक्ट करने से बचें। साथ ही मोबाइल में यूएसबी डिबगिंग और फाइल ट्रांसफर मोड को बंद रखने की भी सलाह दी गई है।
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इंसेट
संकेतों को पहचानने की सलाह
पुलिस ने कुछ संकेतों को पहचानने की भी सलाह दी है। जैसे चार्जिंग के दौरान अचानक पॉप-अप आना, अनजान एप इंस्टॉल होना, फोन का धीमा होना या बिना अनुमति डेटा का इस्तेमाल होना। ऐसे संकेत मिलने पर तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति इस तरह की साइबर ठगी का शिकार होता है, तो वह राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराए। साथ ही नजदीकी थाना या साइबर थाना में भी सूचना दें।
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पुलिस अधीक्षक के अनुसार साइबर अपराधी इन पब्लिक यूएसबी पोर्ट के जरिए मोबाइल फोन में मैलवेयर इंस्टॉल कर सकते हैं। इसके माध्यम से यूजर का पर्सनल डेटा जैसे फोटो, कॉन्टैक्ट, पासवर्ड और बैंकिंग जानकारी चोरी की जा सकती है। इस तरह की ठगी को जूस जैकिंग कहा जाता है जिसमें कई बार यूजर को भनक तक नहीं लगती।
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उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे हमेशा अपना निजी चार्जर और एडॉप्टर इस्तेमाल करें। यदि जरूरत हो तो पावर बैंक का उपयोग करें और किसी अनजान यूएसबी केबल या पोर्ट से फोन कनेक्ट करने से बचें। साथ ही मोबाइल में यूएसबी डिबगिंग और फाइल ट्रांसफर मोड को बंद रखने की भी सलाह दी गई है।
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संकेतों को पहचानने की सलाह
पुलिस ने कुछ संकेतों को पहचानने की भी सलाह दी है। जैसे चार्जिंग के दौरान अचानक पॉप-अप आना, अनजान एप इंस्टॉल होना, फोन का धीमा होना या बिना अनुमति डेटा का इस्तेमाल होना। ऐसे संकेत मिलने पर तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति इस तरह की साइबर ठगी का शिकार होता है, तो वह राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराए। साथ ही नजदीकी थाना या साइबर थाना में भी सूचना दें।