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Rewari News: अत्यधिक चमकीली एलईडी हेडलाइट का चलन बढ़ा, हादसों का खतरा
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फोटो : 8धारूहेड़ा में तेज सफेद लाइट जलाकर चल रहा वाहन चालक। स्रोत : स्थानीय नागरिक
धारूहेड़ा। गांव खरखड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश खरखड़ा ने सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को पत्र लिखा है।
इस पत्र में उन्होंने देशभर में वाहनों पर लगाई जा रही तेज सफेद और नीली एलईडी हेडलाइटों से बढ़ते प्रकाश प्रदूषण और सड़क दुर्घटनाओं के खतरे पर चिंता जताई है।
प्रकाश खरखड़ा ने अपने पत्र में लिखा है कि भारत में पिछले कुछ वर्षों में दोपहिया और चारपहिया वाहनों में अत्यधिक चमकीली एलईडी हेडलाइटों का चलन बढ़ गया है। ये लाइटें इतनी तेज होती हैं कि रात में सामने से आने वाले चालकों की आंखें चौंधिया जाती हैं जिससे कुछ क्षणों के लिए दृश्यता पूरी तरह समाप्त हो जाती है और दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
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उन्होंने कहा कि यह केवल सड़क सुरक्षा की समस्या नहीं है बल्कि एक गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट भी बनती जा रही है। तेज सफेद और नीली रोशनी से ब्लू लाइट प्रदूषण फैलता है जो मानव आंखों, नींद के संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
यह रात्रिचर पक्षियों और कीट-पतंगों की दिशा संवेदना को बाधित करता है जिससे पारिस्थितिक संतुलन पर नकारात्मक असर पड़ता है।
प्रकाश खरखड़ा ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मांग की है कि इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर ठोस नीति बनाई जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि सड़क परिवहन मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड संयुक्त रूप से एलईडी हेडलाइटों की तीव्रता और रंग तापमान तय करें ताकि यह आंखों के लिए सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल हो।
उन्होंने यह भी मांग की है कि देशभर के आरटीओ और पुलिस विभागों को सख्त निर्देश दिए जाएं कि वे आफ्टरमार्केट एलईडी या एचआईडी हेडलाइट लगाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करें। साथ ही, इस विषय पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि लोग स्वयं भी इन खतरनाक लाइटों का उपयोग बंद करें।
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इस पत्र में उन्होंने देशभर में वाहनों पर लगाई जा रही तेज सफेद और नीली एलईडी हेडलाइटों से बढ़ते प्रकाश प्रदूषण और सड़क दुर्घटनाओं के खतरे पर चिंता जताई है।
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प्रकाश खरखड़ा ने अपने पत्र में लिखा है कि भारत में पिछले कुछ वर्षों में दोपहिया और चारपहिया वाहनों में अत्यधिक चमकीली एलईडी हेडलाइटों का चलन बढ़ गया है। ये लाइटें इतनी तेज होती हैं कि रात में सामने से आने वाले चालकों की आंखें चौंधिया जाती हैं जिससे कुछ क्षणों के लिए दृश्यता पूरी तरह समाप्त हो जाती है और दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
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उन्होंने कहा कि यह केवल सड़क सुरक्षा की समस्या नहीं है बल्कि एक गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट भी बनती जा रही है। तेज सफेद और नीली रोशनी से ब्लू लाइट प्रदूषण फैलता है जो मानव आंखों, नींद के संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
यह रात्रिचर पक्षियों और कीट-पतंगों की दिशा संवेदना को बाधित करता है जिससे पारिस्थितिक संतुलन पर नकारात्मक असर पड़ता है।
प्रकाश खरखड़ा ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मांग की है कि इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर ठोस नीति बनाई जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि सड़क परिवहन मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड संयुक्त रूप से एलईडी हेडलाइटों की तीव्रता और रंग तापमान तय करें ताकि यह आंखों के लिए सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल हो।
उन्होंने यह भी मांग की है कि देशभर के आरटीओ और पुलिस विभागों को सख्त निर्देश दिए जाएं कि वे आफ्टरमार्केट एलईडी या एचआईडी हेडलाइट लगाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करें। साथ ही, इस विषय पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि लोग स्वयं भी इन खतरनाक लाइटों का उपयोग बंद करें।