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Rewari News: शिक्षा विभाग की नीतियां ही नामांकन अभियान को कर रहीं फेल

Thu, 11 Apr 2024 01:41 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Thu, 11 Apr 2024 01:41 AM IST
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The policies of the education department are making the enrollment campaign fail.
रेवाड़ी। शिक्षा विभाग का कार्यालय। फाइल फोटो
रेवाड़ी। मौजूदा समय में निजी से लेकर सरकारी विद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया चल रही है। प्राइवेट स्कूल भी छात्र संख्या बढ़ाने के लिए अभिभावकों को लुभावने ऑफर दे रहे हैं। दूसरी तरफ शिक्षा विभाग भी नामांकन बढ़ाने को लेकर कवायद कर रहा है।
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एक तरफ खंडस्तर से लेकर निदेशालय के विभागीय अधिकारी अध्यापकों पर दबाव बना रहे हैं कि छात्र संख्या बढ़ाई जाए। इसके लिए अध्यापक पुरजोर कोशिश करते हुए डोर टू डोर बच्चों और अभिभावकों के पास जा रहे हैं, लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिल रही है। इसका मुख्य कारण विभाग की नीतियां ही नामांकन अभियान को फेल कर रही हैं।
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आजकल माता-पिता बच्चे की उम्र 3 या 4 वर्ष होते ही स्कूल भेज देते हैं। सरकारी स्कूलों में इस प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं है कि इस उम्र के बच्चे का नामांकन विद्यालय में किया जा सके। इसके लिए सरकार द्वारा केवल आंगनबाड़ी का ही विकल्प दिया गया है। जहां ज्यादातर अभिभावक बच्चे को भेजकर खुश नहीं है, क्योंकि उनको लगता है कि वहां पर इस कार्य के लिए कोई टीचर उपलब्ध नहीं है। इसका फायदा प्राइवेट विद्यालय उठाते हैं। बच्चों का दाखिल कर लेते हैं। फिर जब अध्यापक नामांकन के लिए जाते हैं तो पता चलता है कि बच्चा तो पिछले 3 साल से निजी विद्यालय में जा रहा है।
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इंसेट

शिक्षकों पर अत्यधिक कार्यों का रहता है बोझ

शिक्षक अपने आप को बहुउद्देशीय वर्कर समझने लगे हैं। कुछ शिक्षकों ने बताया कि ज्यादातर विद्यालयों में दो से तीन अध्यापक हैं। प्रत्येक अध्यापक को दो या तीन क्लास पढ़ानी होती है। चाहे बुढ़ापा पेंशन बनानी हो, आय सत्यापन का कार्य, परिवार पहचान पत्र का कार्य, बीएलओ ड्यूटी, विद्यालय में मिड-डे मील बनवाना और उसका रिकॉर्ड रखना, एसएमसी का रिकॉर्ड मेंटेन करना, कंस्ट्रक्शन और रिपेयर का कार्य आदि और भी बहुत से गैर शैक्षणिक कार्य में एक अध्यापक को व्यस्त कर दिया कि वह अपने आप को ठगा सा महसूस करता है। ऊपर से विभाग द्वारा दिनभर में विद्यालय और शिक्षकों से संबंधित इतनी सूचनाएं मांगी जाती है कि इंचार्ज शिक्षक का तो पूरा दिन इन्ही कार्यों में निकल जाता है।

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वर्जन

शिक्षा विभाग की तरफ से सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे हैं। अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। उम्मीद है कि छात्र संख्या में अपेक्षाकृत इजाफा होगा।-कपिल पूनिया, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रेवाड़ी




वर्जन

माॅडल संस्कृति स्कूलों में फीस लागू करना भी नामांकन प्रक्रिया में बाधक है। आरटीई के अनुसार 14 वर्ष तक के बच्चों को फ्री शिक्षा का प्रावधान है। फिर जबरदस्ती बच्चों पर अनावश्यक बोझ क्यों डाला जा रहा है। सरकार द्वारा चलाई जा रही चिराग योजना भी सरकारी विद्यालयों में गिरती छात्र संख्या का एक बड़ा कारण है।-धर्मेंद्र यादव, जिला प्रधान, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ रेवाड़ी।
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