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किसानों ने सरकार का पुतला फूंककर मनाया काला दिवस

Thu, 27 May 2021 01:21 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 27 May 2021 01:21 AM IST
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The farmers celebrated the black day by blowing the effigy of the government
रेवाड़ी। कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों को छह माह पूरे होने तथा केंद्र की मोदी सरकार के सात साल पूरे होने पर संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर बुधवार को काला दिवस मनाया गया। इस दौरान खेड़ा बॉर्डर व बावल के छोटूराम चौक पर केंद्र सरकार का पुतला फूंका गया। वहीं क्षेत्र के किसानों ने अपने-अपने घरों के सामने काला झंडा लगाकर विरोध जताया। इसके साथ ही दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर धरना दे रहे किसानों को भी 164 दिन पूरे हो गए। किसानों ने धरना स्थल पर ही बुद्ध पूर्णिमा भी मनाई।
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कृषि कानून रद्द होने तक जारी रहेगा आंदोलन
स्वराज इंडिया के संयोजक योगेंद्र यादव, भारतीय किसान यूूनियन के प्रदेश महासचिव रामकिशन महलावत, अमराराम, राजाराम मील व डॉ. संजय माधव ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के कुशासन के 26 मई को सात साल पूरे हो गए हैं। इस दौरान हर वर्ग के लोग परेशान है। किसान, मजदूर, युवा, उद्योगपति व अन्य वर्गों के लोगों के सामने रोजी-रोटी के लाले पड़े हुए हैं। देशभर का किसान काले कानूनों को रद्द कराने के लिए पिछले छह साल से खुले आसमान के नीचे आंदोलन करने को मजबूर है, लेकिन केंद्र की जिद्दी सरकार न तो कानूनों को रद्द कर रही और न ही किसानों से सकारात्मक बातचीत करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि अब देश का किसान सरकार की मंशा को भलीभांति समझ गया है। किसान अब और अधिक मजबूत होकर आंदोलन को तेजी से आगे बढ़ाएगा।
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किसान नेताओं ने कहा हि हरियाणा सरकार द्वारा किसानों पर किए गए जुल्म और अत्याचार के खिलाफ मंगलवार को हजारों की संख्या में किसान हिसार में एकजुट हुए। सरकार ने पुलिस बल व आरएएफ के जरिए किसानों को डराने की भरपूर कोशिश की, लेकिन किसानों के हौसले बुलंद थे और हजारों की संख्या में किसान ट्रैक्टरों, कार, जीप ट्रकों में हिसार पहुंचे। वहीं दूसरी ओर समाज की 36 बिरादरियों की एकजुटता ने यह सिद्ध कर दिया है कि अब लोग जबर जुल्म नहीं सहेंगे और एकजुट होकर मुकाबला करेंगे।
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उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार लगातार किसानों को बदनाम करती आ रही है। अगर किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया है तो वह मुख्यमंत्री के जान बूझकर उकसाने पर किया है। मुख्यमंत्री और सरकार के मंत्री यदि अपनी हठधर्मिता छोड़ कर किसानों के खिलाफ उकसाने वाली बयानबाजी, दमन और झूठे मुकदमेबाजी बंद कर कोरोना का सही और प्रभावी ढंग से नियंत्रण करने पर ध्यान केंद्रित करते तो किसानों को भी इस तरह सड़कों पर नहीं उतरना पड़ता।

अब बनाएंगे आगे की रणनीति
दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसानों को 26 मई को छह माह पूरे हो गए हैं। करीब एक सप्ताह पूर्व किसान नेताओं ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर बातचीत का रास्ता खोलनेेे व कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की थी। किसानों ने बताया था कि 26 मई के बाद आंदोलन की आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
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