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रेवाड़ी में आवारा कुत्ते हर दिन 55 से 60 लोगों को बना रहे अपना शिकार

Sat, 19 Jun 2021 12:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jun 2021 12:27 AM IST
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Stray dogs are making 55 to 60 people their prey every day
रेवाड़ी। जिले में कुत्तों का खौफ इस कदर फैला हुआ कि प्रत्येक दिन 55 से 60 लोग इनका शिकार बन रहे हैं। ये वो लोग हैं जो टिका लगवाने के लिए सरकारी अस्पतालों में पहुंचते हैं, निजी अस्पतालों में जाने वाले पीड़ितों को भी जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा बढ़ सकता है। अकेले नागरिक अस्पताल में ही प्रत्येक दिन कुत्तों के खौफ से परेशान औसतन 15 लोग पहुंचते हैं। अन्य पीएचसी-सीएचसी का आंकड़ा जोड़कर रोजाना 55 से 60 तक पहुंचता है। जब कोरोना चरम पर था, मई माह में भी नागरिक अस्पताल में 207 लोग रेबीज का टीका लगवाने पहुंचे। नसबंदी के लिए शहर में एक साल पहले टेंडर हुआ था, लेकिन एक साल में एक भी कुत्ते की नसबंदी नहीं की गई है।
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बता दें कि यदि पालतू कुत्ता होता है तो तीन इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं, यदि कुत्ता आवारा है तो 0, 3, 7, 14 व 28 दिन के दिन के अंतराल पर पांच टीके लगवाने पड़ते हैं। लेकिन अकेले शहर में आवारा कुत्तों की संख्या 10 हजार से अधिक हैं, यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। लेकिन नगर परिषद के पास इन कुत्तों पर अंकुश लगाने के लिए कोई योजना नहीं है। नसबंदी कर सकते हैं। लेकिन नसबंदी के लिए कुत्ते को जिस स्थान से पकड़ा जाता है, उसे वहीं पर छोड़ा जाता है। लोगों की मांग है कि आबादी से दूर आवारा कुत्तों को छोड़ा जाए। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार रेवाड़ी नागरिक अस्पताल से लेकर सभी सीएचसी व पीएचसी में रैबीज के टीके उपलब्ध हैं।
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कुत्तों की रोकथाम के लिए नसबंदी की जा सकती है। सरकार की नीति और एनिमल बर्थ कंट्रोल 2011 के तहत जिस क्षेत्र में इन आवारा कुत्तों का खौफ है, वहां इनकी नसबंदी के बाद उसे वापस भेजा जाएगा।
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एक साल में एक भी कुत्ते की नहीं हुई नसबंदी
शहर में घूम रहे 10 हजार से अधिक कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन नप अधिकारी लोगों की इस बड़ी समस्या के समाधान करने की बजाय आंखें बंद कर बैठे हुए हैं। एक साल पहले कुत्तों को पकड़कर नसबंदी करने के लिए टेंडर दिया गया था। लेकिन एक साल के दौरान एक भी कुत्ते की नसबंदी नहीं की गई है। ऐसे में समझा जा सकता है कि नप अधिकारी लोगों की समस्याओं को लेकर कितने गंभीर हैं, जबकि शहर में ही करीब 15 लोगों को कुत्ते अपना शिकार प्रत्येक दिन बना रहे हैैं।
आवारा कुत्तों को नसबंदी के बाद आबादी से दूर छोड़ा जाए
कुत्तों की बढ़ती संख्या से लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है। नियमानुसार नसबंदी के बाद उन्हें उसी स्थान पर वापस छोड़ना होगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था। इस नियम पर ही लोगों को ऐतराज है। जिसे लेकर बहस छिड़ गई है। दड़ौली के सरपंच जयभगवान व फतेहपुरी के जयभगवान का कहना है कि नसबंदी करने से कुत्तों की आक्रमकता कम नहीं होगी। वे फिर भी लोगों को काटकर घायल करेंगे। जनता के साथ-साथ अधिवक्ता भी मानते हैं कि अफसर, जनप्रतिनिधि और सरकार को यह नियम बदलने के लिए प्रयास करने होंगे। आवारा कुत्तों को आबादी से दूर ले जाकर सुरक्षित स्थान पर रखना होगा। तभी आमजन की सुरक्षा की कल्पना की जा सकती है।

अकेले मई महीने में 207 लोगों को आवारा कुत्तों ने शिकार बनाया है। अकेले नागरिक अस्पताल में ही प्रत्येक दिन 15 के करीब कुत्ते काटने के पीड़ित आते हैं। अन्य सीएचसी व पीएचसी के नंबर जोड़ दिए जाएं तो यह आंकड़ा प्रत्येक दिन 55-60 पर पहुंच जाता है। पालतू कुत्ते से काटने पर तीन व आवारा कुत्ते के काटने पर पांच डोज लगाई जाती है।
- उदय सिंह, फार्मासिस्ट, नागरिक अस्पताल
मेरे कार्यकाल से पहले टेंडर दिया गया था, एक साल से इस पर कोई काम नहीं हुआ है। अब एक बार फिर से इसका टेंडर देकर कुत्तों की नसबंदी कराई जाएगी।
- संदीप कुमार, मुख्य सफाई निरीक्षक, नप।
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