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Rewari News: देसी उपचार से ठीक हुआ रीढ़ की हड्डी का जख्म तो पाली की ज्योति ने शुरू कर दी जैविक खेती

Thu, 22 Dec 2022 11:48 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 22 Dec 2022 11:48 PM IST
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Spinal cord wound was cured by indigenous treatment, then Pali's Jyoti started organic farming
ज्योति यादव-किसान - फोटो : Rewari
रेवाड़ी। तकनीकी खेती कर कम जमीन में भी अच्छी आमदनी की जा सकती है। यह कर दिखाया गांव पाली की महिला किसान ज्योति यादव ने। वह खुद प्रगतिशील किसान तो हैं ही साथ में जिले की अन्य महिला किसानों को भी प्रशिक्षण दे रही हैं। ज्योति को इस उपलब्धि के चलते किसान दिवस पर हिसार में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा।
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गांव पाली निवासी ज्योति ने बताया कि वर्ष 2016 में उसक की रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई थी। कई स्थानों पर इलाज कराया, लेकिन आराम नहीं मिला। इसके बाद कुछ देशी उपचार लिया, उसके बाद आराम मिला। इसके बाद से ही जैविक खाद बनाने व जैविक खेती करने की ठान ली थी। शरीर साथ नहीं दे रहा था, लेकिन खुद को साबित भी करना था। इसलिए कमजोरी को भी आड़े नहीं आने दिया।
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ज्योति ने बताया कि वर्ष 2017 में कृषि विज्ञान केंद्र बावल में जैविक खाद व मशरूम की खेती सहित अन्य खेती करने का प्रशिक्षण लिया था। इसके पश्चात वर्ष 2018 में जैविक खेती के साथ ही जैविक खाद तैैयार करना शुरू दिया था। इसके कुछ समय बाद ही मशरूम उत्पादन पर काम किया। आज इसी की बदौलत ज्योति की ओर से तैयार किया जाने वाला मशरूम व जैविक खेती व खाद आसपास के गांवों किसानों द्वारा उपयोग किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि ज्योति खुद प्रगतिशील होने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही है। जिन्हें महिलाएं जैविक खाद व मशरूम की खेती कर आत्मनिर्भर बन रही है। ज्योति ने बताया कि शरीर में कमजोरी की वजह से वह दूर नहीं जा सकती थी। इसलिए घर के सामने खाली जमीन में ही जैविक खेती व खाद तैयार करना शुरू कर दिया था। हालांकि वह आमदनी के लिए यह खेती नहीं कर रही है, लेकिन वह अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है।
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‘लागत से दोगुना आमदनी कर सकते हैं किसान’
बावल क्षेत्र के गांव मोहम्मदपुर निवासी प्रगतिशील किसान महेश कुमार जैविक खेती कर क्षेत्र के किसानों के लिए प्ररेणास्रोत बन रहे हैं। 40 वर्षीय महेश कुमार 2003 में बावल के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में जैविक खेती का प्रशिक्षण लिया था। उसके बाद से महेश ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। महेश बताते हैं कि शुरूआत में लोग उसके गंभीरता से नहीं लेते थे, लेकिन वह न केवल किसानों को प्रशिक्षण दे रहे हैं बल्कि आसपास के गांवों के किसान भी आर्गेनिक खेती पर जोर दे रहे हैं। महेेश मशरूम की खेती के लिए आसपास के गांवों के किसानों के मिशाल बन रहे हैं। महेश का कहना हैक कि मशरूम की खेती से लागत मूल्य से ढाई गुणा लाभ कमाया जा सकता है। महेश ने गांव में मास्टर जी आर्गेनिक फार्मर नाम से किसानों को ग्रुप बनाया हैं। यह ग्रुप न केवल गांव में बल्कि आसपास के गांवों के किसानों को खेती से संबंधि जानकारी देने के साथ ही उनकी खेती से संबंधित अन्य मदद भी करते हैं। महेश को बावल में आयोजित किसान मेले में भी दो बार सम्मानित किया जा चुका है।

महेश कुमार-किसान

महेश कुमार-किसान- फोटो : Rewari

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