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Rewari News: शाम सात बजे के बाद पसर जाता है बस स्टैंड में सन्नाटा
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बस स्टैंड पर पसरा सन्नाटा। संवाद
रेवाड़ी। जिला एनसीआर में शामिल होने के बाद भी बस अड्डे से शाम सात बजे के बाद सरकारी बसें नामात्र की ही मिलती हैं। शाम सात बजते ही बस अड्डे पर सन्नाटा पसर जाता है। ऐसे में यात्रियों को निजी बसों में सफर कर गंतव्य स्थल तक पहुंचने को मजबूर होना पड़ता है।
जिले के बावल व धारूहेड़ा में औद्योगिक क्षेत्र होने के चलते देर रात तक बड़ी संख्या में रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नारनौल, कनीना सहित आसपास के एरिया से लोगों का आवागमन होता है। वहीं, दिल्ली-गुरुग्राम के लिए भी काफी लोगों का आना जाना रहता है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन की सुविधा ना मिल पाने कारण लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। रेवाड़ी डिपो से अंतिम बस करीब सवा सात बजे चंडीगढ़ के लिए पटौदी होकर चलती है। इसके बाद रोडवेज की बसें नहीं चलने के कारण लोगों को प्राइवेट बसों या फिर निजी वाहनों में सफर करने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
नौकरी पेशा लोगों के लिए काफी समस्या
शाम 7 बजे के बाद निजी बसें ही दिखाई देती हैं। ऐसे में लोगों को मजबूरी में निजी बसों में सफर करना पड़ता है। विभाग रोडवेज की तरफ से अगर जरूरत के हिसाब से बसें चलाई जाएं तो लोगों को काफी सहुलियत हो जाएगी, क्योंकि नौकरीपेशा लोग शाम के समय छुट्टी करके अपने घरों की ओर जाते हैं। नौकरीपेशा लोगों के लिए काफी समस्या होती है। राजीव ने बताया कि वह रेवाड़ी शहर में नौकरी करता है और धारूहेड़ा में रहता है। शाम 7 बजे नौकरी से छुट्टी होती है। उसके बाद सरकारी बस ही नहीं मिलती है। मजबूरी में निजी बस का सहारा लेना पड़ता है। निजी बस भी तब चलती है जब सवारी पूरी भर लेती है।
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वर्जन :
रात के समय सवारियां उतनी नहीं होती हैं। बिना सवारियों के बस का संचालन करने से विभाग को नुकसान उठाना पड़ सकता है। अगर रात के समय बस संचालन को लेकर डिमांड आती है तो रूट पर जांच के बाद बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
- प्रदीप कुमार, महाप्रबंधक, रोडवेज
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जिले के बावल व धारूहेड़ा में औद्योगिक क्षेत्र होने के चलते देर रात तक बड़ी संख्या में रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नारनौल, कनीना सहित आसपास के एरिया से लोगों का आवागमन होता है। वहीं, दिल्ली-गुरुग्राम के लिए भी काफी लोगों का आना जाना रहता है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन की सुविधा ना मिल पाने कारण लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। रेवाड़ी डिपो से अंतिम बस करीब सवा सात बजे चंडीगढ़ के लिए पटौदी होकर चलती है। इसके बाद रोडवेज की बसें नहीं चलने के कारण लोगों को प्राइवेट बसों या फिर निजी वाहनों में सफर करने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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नौकरी पेशा लोगों के लिए काफी समस्या
शाम 7 बजे के बाद निजी बसें ही दिखाई देती हैं। ऐसे में लोगों को मजबूरी में निजी बसों में सफर करना पड़ता है। विभाग रोडवेज की तरफ से अगर जरूरत के हिसाब से बसें चलाई जाएं तो लोगों को काफी सहुलियत हो जाएगी, क्योंकि नौकरीपेशा लोग शाम के समय छुट्टी करके अपने घरों की ओर जाते हैं। नौकरीपेशा लोगों के लिए काफी समस्या होती है। राजीव ने बताया कि वह रेवाड़ी शहर में नौकरी करता है और धारूहेड़ा में रहता है। शाम 7 बजे नौकरी से छुट्टी होती है। उसके बाद सरकारी बस ही नहीं मिलती है। मजबूरी में निजी बस का सहारा लेना पड़ता है। निजी बस भी तब चलती है जब सवारी पूरी भर लेती है।
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वर्जन :
रात के समय सवारियां उतनी नहीं होती हैं। बिना सवारियों के बस का संचालन करने से विभाग को नुकसान उठाना पड़ सकता है। अगर रात के समय बस संचालन को लेकर डिमांड आती है तो रूट पर जांच के बाद बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
- प्रदीप कुमार, महाप्रबंधक, रोडवेज