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रेवाड़ी बना प्रदेश में सिटीजन चार्टर बनाने वाला पहला जिला
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उपायुक्त यशेंद्र सिंह।
- फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। गांव के लोगों की मुश्किलों को कम करने के लिए सरकार के बनाए सिटीजन चार्टर को लागू करने में रेवाड़ी जिला प्रदेश में अग्रणी बन गया है। यहां सभी 365 ग्राम पंचायतों में सिटीजन चार्टर बना लिए गए हैं।
उपायुक्त यशेंद्र सिंह ने बताया कि सिटीजन चार्टर के लागू होने से ग्राम पंचायत के सरपंचों के साथ सचिवों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। अब न केवल नागरिक सुविधाओं और समस्याओं के लिए वे जवाबदेह होंगे, बल्कि उन्हें तय समय सीमा में सभी कार्य करने होंगे।
समस्याओं का होगा समयबद्ध निराकरण
डीसी यशेंद्र सिंह ने कहा कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सबसे बड़ी समस्या गांव की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण न होना थी। इसके लिए जवाबदेही भी तय नहीं हो पा रही थी। इसको देखते हुए केन्द्र के पंचायती राज मंत्रालय ने एक मॉडल सिटीजन चार्टर तैयार किया है। इसके लागू होने के साथ ही ग्राम पंचायतों में निर्धारित समय में सेवाओं का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। ऐसा न करने पर संबधित पंचायतों पर जवाबदेही भी तय होगी। सिटीजन चार्टर के तहत काम की मांग, सार्वजनिक स्वास्थ्य, कराधान, स्ट्रीट लाइट, जलापूर्ति, सामुदायिक संपत्ति, सड़क व नाली आदि धन की उपलब्धता के आधार पर सेवाएं शामिल की जा रही हैं।
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ग्राम सभा होगी प्रभावी
उपायुक्त ने कहा कि सिटीजन चार्टर के लागू होने के बाद मनरेगा का जॉब कार्ड बनवाने से लेकर हैंडपंप मरम्मत, स्ट्रीट लाइट मरम्मत, हर तरह की पेंशन व दिव्यांग प्रमाण पत्र लेने की सुविधाएं भी ग्राम पंचायतें उपलब्ध कराएंगी। गांव का कोई भी निवासी अपनी ग्राम सभा से संपत्ति के स्वामित्व का प्रमाण पत्र आसानी से निर्धारित समय सीमा में ले सकेगा।
15 दिन में होगी हैंड पंप की मरम्मत
सिटीजन चार्टर लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप की मरम्मत, पशुओं के पानी की व्यवस्था, मनरेगा जॉब कार्ड, सामुदायिक शौचालय की मरम्मत, ठोस कचरा प्रबंधन, बाजार की सफाई, विद्यालयों व आंगनबाड़ी केन्द्रों में वर्षा जल संचयन के बुनियादी ढांचे के निर्माण जैसे कार्य 15 दिनों में किए जाने का प्रावधान है।
30 दिन में होगी स्वामित्व टाइटल डीड
स्वामित्व योजना के तहत टाइटल डीड का कार्य ग्राम सभा में फाइनल नक्शा पारित होने के 30 दिन के अंदर होगा। नए इलाके में स्ट्रीट लाइट के खंभे, खेल मैदान व सार्वजनिक पार्क, योग केन्द्र, सार्वजनिक संपत्तियों से अतिक्रमण हटाना, विभिन्न पेंशन के लिए आवेदन संबंधित विभाग को भेजना, नए राशन कार्ड के आवेदन, बच्चों व माता का टीकाकरण, गांव की सड़कों की रख-रखाव इत्यादि कार्य के लिए भी समय सीमा निर्धारित की गई है।
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उपायुक्त यशेंद्र सिंह ने बताया कि सिटीजन चार्टर के लागू होने से ग्राम पंचायत के सरपंचों के साथ सचिवों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। अब न केवल नागरिक सुविधाओं और समस्याओं के लिए वे जवाबदेह होंगे, बल्कि उन्हें तय समय सीमा में सभी कार्य करने होंगे।
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समस्याओं का होगा समयबद्ध निराकरण
डीसी यशेंद्र सिंह ने कहा कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सबसे बड़ी समस्या गांव की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण न होना थी। इसके लिए जवाबदेही भी तय नहीं हो पा रही थी। इसको देखते हुए केन्द्र के पंचायती राज मंत्रालय ने एक मॉडल सिटीजन चार्टर तैयार किया है। इसके लागू होने के साथ ही ग्राम पंचायतों में निर्धारित समय में सेवाओं का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। ऐसा न करने पर संबधित पंचायतों पर जवाबदेही भी तय होगी। सिटीजन चार्टर के तहत काम की मांग, सार्वजनिक स्वास्थ्य, कराधान, स्ट्रीट लाइट, जलापूर्ति, सामुदायिक संपत्ति, सड़क व नाली आदि धन की उपलब्धता के आधार पर सेवाएं शामिल की जा रही हैं।
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ग्राम सभा होगी प्रभावी
उपायुक्त ने कहा कि सिटीजन चार्टर के लागू होने के बाद मनरेगा का जॉब कार्ड बनवाने से लेकर हैंडपंप मरम्मत, स्ट्रीट लाइट मरम्मत, हर तरह की पेंशन व दिव्यांग प्रमाण पत्र लेने की सुविधाएं भी ग्राम पंचायतें उपलब्ध कराएंगी। गांव का कोई भी निवासी अपनी ग्राम सभा से संपत्ति के स्वामित्व का प्रमाण पत्र आसानी से निर्धारित समय सीमा में ले सकेगा।
15 दिन में होगी हैंड पंप की मरम्मत
सिटीजन चार्टर लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप की मरम्मत, पशुओं के पानी की व्यवस्था, मनरेगा जॉब कार्ड, सामुदायिक शौचालय की मरम्मत, ठोस कचरा प्रबंधन, बाजार की सफाई, विद्यालयों व आंगनबाड़ी केन्द्रों में वर्षा जल संचयन के बुनियादी ढांचे के निर्माण जैसे कार्य 15 दिनों में किए जाने का प्रावधान है।
30 दिन में होगी स्वामित्व टाइटल डीड
स्वामित्व योजना के तहत टाइटल डीड का कार्य ग्राम सभा में फाइनल नक्शा पारित होने के 30 दिन के अंदर होगा। नए इलाके में स्ट्रीट लाइट के खंभे, खेल मैदान व सार्वजनिक पार्क, योग केन्द्र, सार्वजनिक संपत्तियों से अतिक्रमण हटाना, विभिन्न पेंशन के लिए आवेदन संबंधित विभाग को भेजना, नए राशन कार्ड के आवेदन, बच्चों व माता का टीकाकरण, गांव की सड़कों की रख-रखाव इत्यादि कार्य के लिए भी समय सीमा निर्धारित की गई है।