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Rewari News: पुलिस ने सार्वजनिक स्थान की गिरफ्तारी दिखाई और स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं किए...आरोपी बरी

Tue, 23 Dec 2025 12:58 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 23 Dec 2025 12:58 AM IST
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Police showed arrest in public place and did not include independent witnesses...accused acquitted
कोर्ट रोड स्थित जिला न्यायालय रेवाड़ी। संवाद
रेवाड़ी। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जोगिंद्री की अदालत ने जुआ अधिनियम के तहत दर्ज एक पुराने मामले में अहम फैसला सुनाते हुए धारूहेड़ा निवासी आरोपी सुरेश को बरी कर दिया। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
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यह मामला वर्ष 2022 में दर्ज हुआ था और करीब साढ़े तीन साल तक विचाराधीन रहने के बाद इसका निपटारा हुआ। अदालत ने अपने फैसले में अभियोजन की कहानी को सामान्य और अस्पष्ट करार दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस यह तक स्पष्ट नहीं कर सकी कि कथित घटना किस समय हुई और उस दौरान पुलिसकर्मी किस आधार पर गश्त पर थे।
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अदालत ने स्वतंत्र गवाहों को शामिल न किए जाने को भी गंभीर कमी मानी। न्यायालय ने कहा कि जिस स्थान से आरोपी की गिरफ्तारी दिखाई गई, वह सार्वजनिक स्थान था और वहां आम लोग उपलब्ध हो सकते थे।
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पुलिस ने किसी भी स्वतंत्र व्यक्ति को जांच में शामिल नहीं किया। केवल यह कहना कि कोई भी सार्वजनिक व्यक्ति जांच में शामिल होने को तैयार नहीं था, पर्याप्त नहीं माना गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति जांच में शामिल होने से मना करता है तो उसकी पहचान और विवरण दर्ज करना पुलिस की जिम्मेदारी होती है।
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थाना धारूहेड़ा पुलिस ने 8 मई 2022 को की थी एफआईआर दर्ज
थाना धारूहेड़ा पुलिस ने 8 मई 2022 को एक एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस का आरोप था कि भगत सिंह चौक धारूहेड़ा क्षेत्र में गश्त के दौरान एक गुप्त सूचना के आधार पर बास रोड पर आरोपी सुरेश को सार्वजनिक स्थान पर ताश के पत्तों पर पैसे लगाकर जुआ खेलते हुए पकड़ा गया। आरोपी के पास से कथित रूप से नगदी, सट्टा पर्चियां और अन्य सामान बरामद होने का दावा किया गया था। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जुआ अधिनियम में चालान पेश किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल चार गवाह अदालत में पेश किए। इनमें पुलिस अधिकारी और जांच अधिकारी शामिल थे। अभियोजन का तर्क था कि आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा गया और बरामदगी पूरी तरह वैध है। वहीं, सुरेश ने शुरू से ही पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए और झूठा फंसाए जाने का आरोप लगाया था।

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स्वतंत्र गवाहों की अनुपस्थिति और प्रक्रिया संबंधी खामियां बनाती हैं कमजोर
अदालत ने अपने फैसले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि स्वतंत्र गवाहों की अनुपस्थिति और प्रक्रिया संबंधी खामियां अभियोजन के मामले को कमजोर बनाती हैं। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी के खिलाफ संदेह से परे अपराध सिद्ध नहीं हो सका। अदालत ने सुरेश को जुआ अधिनियम के आरोपों से बरी कर दिया।
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