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लापरवाही : लॉकडाउन में ढील देते ही बाजारों में जुटने लगी भीड़

Thu, 27 May 2021 01:25 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 27 May 2021 01:25 AM IST
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Negligence: Crowds started gathering in markets as soon as the lockdown was relaxed
रेवाड़ी। मार्च मध्य से लेकर मई मध्य तक यानी दो महीने तक कोरोना का भयावह रूप देखने के बाद भी लोग सबक लेने को तैयार नहीं हैं। लॉकडाउन में ढील मिलते ही बाजारों में बिना सामाजिक दूरी का पालन करे जुटने वाली भीड़ लोगों की लापरवाही का उदाहरण है। पहली, दूसरी लहर के बाद अब तीसरी लहर का अंदेशा विशेषज्ञों ने जताया है। ऐसे में यह लापरवाही भारी पड़ सकती है।
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तीसरी लहर की चेतावनी को ध्यान में रखकर दो माह तक उपचार का बोझ झेल चुके सरकारी व निजी अस्पतालों ने इससे निपटने के लिए पहले से तैयारी शुरू कर दी है। लिहाजा तीसरी लहर में बच्चों को खतरे का अंदेशा जताया जा रहा है तो नागरिक अस्पताल के नवजात सघन देखभाल यूनिट (नीकु) व विशेष नवजात देखभाल यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड में बेड बढ़ाने से लेकर बच्चों के निजी अस्पतालों को भी कोविड उपचार के पैनल में शामिल करने की सूची बुधवार को जारी कर दी गई। ताकि जरूरत पड़ने पर दूसरी लहर की तरह लोगों को बेड व ऑक्सीजन के अभाव में जान न गंवानी पड़े। डॉक्टरों का कहना है कि लोगों को डरने की बजाय सतर्कता बरतने की जरूरत है। लापरवाही ही तीसरी लहर का कारण बन सकती है।
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एक ओर जहां प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग तमाम दबाव के बावजूद तैयारियों में जुटा है, वहीं बुधवार को शहर के ऐतिहासिक मौती चौक पर भीड़ का नजारा डरावना है। कुछ लापरवाह लोगों के चलते अन्य लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है। लेकिन कोरोना से जान गंवाने वालों के परिजन ही इस दर्द को समझ सकते हैं। बता दें कि नागरिक अस्पताल में बच्चों को दो चिकित्सक के अलावा पीकु व एसएनसीयू में करीब 25 बेड हैं। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकों की भर्ती व बेड बढ़ाने की तैयारी में स्वास्थ्य विभाग लगा हुआ है।
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इन नए सात अस्पतालों की मिली कोविड उपचार की अनुमति
शहर के आंबेडकर चौक स्थित बच्चों का सावित्री देवी अस्पताल, वात्सल्य अस्पताल के अलावा अपेक्स अस्पताल, राव फूल सिंह अस्पताल, बावल, शंकुतला मल्टी स्पेशयलिटि व आदित्य न्यूरो सर्जन अस्पताल को कोविड उपचार के लिए चिह्नित किया गया है। बता दें इससे पहले करीब 21 अस्पताल पहले से ही कोविड उपचार की श्रेणी में शामिल किए गए हैं।
घर पर उपचार करने की बजाय डॉक्टर से करें परामर्श
पहली व दूसरी लहर में बुजुर्ग व युवा कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। ऐसे में अब लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। चिकित्सकों का मानना है कि बच्चों में उल्टी दस्त से लेकर अन्य लक्षण कोई भी हो डॉक्टर से जरूर परामर्श करें। अधिकतर केस में दवा लेने पर होम आइसोलेशन में ही बच्चे ठीक हो जाते हैं। लेकिन उपचार में देरी ठीक नहीं है। खांसी, जुुकाम, बुखार जैसे लक्षण तीन दिन से ज्यादा हैं तो बच्चों की जांच जरूर कराएं।
बच्चों को कोरोना से बचाने के लिए जरूरी है कि बड़े सावधानी रखें। घर से बाहर जाने वाले लोगों को कपड़े बदलने व नहाने के बाद ही बच्चों के पास जाना चाहिए। संभव हो तो बच्चों से दूरी बनाए रखें। घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। कोई भी बीमारी हो तो घर पर उपचार की बजाय चिकित्सकों से परामर्श करें।
-डॉ. अजीत यादव, सावित्री देवी अस्पताल
बीते दो माह में करीब 7 बच्चों के केस आए हैं। लेकिन इनमें से अधिकतर दवा देने के बाद होमआइसोलेशन में ही ठीक हो गए। कोरोनाकाल में पहले से ही रोगरोधक क्षमता कम है, एक दो मामलों में उल्टी दस्त के बाद भी बच्चों में कोरोना पाया गया है। ऐसे में बीमारी कोई भी जांच जरूर कराएं।
-डॉ. रवि यादव, वात्सलय अस्पताल
नागरिक अस्पताल में दूसरी लहर में भी जरूरत के हिसाब से बेड बढ़ाए गए थे। लोगों को डरने की बजाय सतर्कता बरतने की जरूरत है। यदि तीसरी लहर से बचना है तो बाजारों में लग रही भीड़ से दूर रहना होगा। कोरोना का दर्द चपेट में आए लोग ही बता सकते हैं। हमारे पास पीकु व नीकु वार्ड में 25 से अधिक बेड हैं। जरूरत पड़ने पर इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है।

-डॉ. सर्वजीत थापर, नागरिक अस्पताल
काफी हद तक कोरोना के मामलों में कमी आ चुकी है, लेकिन अभी सतर्क रहने की जरूरत है। लापरवाही लोगों पर भारी पड़ सकती है। तीसरी लहर जैसी कोई बात नहीं है, यदि लोक मास्क व सामाजिक दूरी का ध्यान रखेंगे तो कोरोना से बचे रहेंगे। इसके अलावा टीकाकरण भी तेजी से किया जा रहा है। लोगों से अपील है कि कोविड गाइडलाइन का पालन करें।
-डॉ. कृष्ण कुमार, सिविल सर्जन, रेवाड़ी।
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