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Rewari News: प्राकृतिक खेती से बदली तस्वीर, निर्मला बनीं प्रगतिशील किसान की मिसाल
Thu, 19 Mar 2026 02:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 19 Mar 2026 02:02 AM IST
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किसान निर्मला
रेवाड़ी। गांव झारौदा की रहने वाली 38 वर्षीय प्रगतिशील किसान निर्मला ने खेती में नवाचार और प्राकृतिक तरीकों को अपनाकर एक नई पहचान बनाई है। पारंपरिक खेती से हटकर टिकाऊ और प्राकृतिक खेती को अपनाने वाली निर्मला आज न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं बल्कि अन्य किसानों के लिए प्रेरणा भी बन रही हैं।
निर्मला पिछले करीब 10 वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रही हैं। उन्होंने रासायनिक खाद और कीटनाशकों से दूरी बनाते हुए जैविक व प्राकृतिक तरीकों को अपनाया जिससे उनकी फसलों की गुणवत्ता बेहतर हुई और लागत में भी कमी आई। वर्तमान में वह करीब पांच एकड़ भूमि में सब्जियों का उत्पादन कर रही हैं। इसमें आलू, गोभी, टिंडा, करेला और प्याज प्रमुख फसलें हैं।
निर्मला बताती हैं कि उनकी सालाना आय करीब 8 से 10 लाख रुपये तक पहुंच जाती है जबकि कुल लागत 4 से 5 लाख रुपये के बीच रहती है। प्राकृतिक खेती ने उनकी आमदनी को दोगुना करने में अहम भूमिका निभाई है। उनका कहना है कि सही योजना, मेहनत और नई तकनीकों को अपनाकर खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है।
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15 से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए किया प्रेरित
निर्मला ने बताया कि खेती के इस सफर में उनके पति बुधराम का भी पूरा सहयोग रहा है। दोनों मिलकर खेतों का प्रबंधन करते हैं और आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करते हैं। निर्मला का मानना है कि परिवार का साथ और सही मार्गदर्शन मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहतीं।निर्मला ने अब तक 15 से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित किया है। वह आसपास के किसानों को सब्जी उत्पादन के गुर सिखाती हैं और उन्हें रासायनिक खेती से होने वाले नुकसान के बारे में भी जागरूक करती हैं। उनके प्रयासों से कई किसान प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
किसान दिवस पर मिला था सम्मान
निर्मला की मेहनत और उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में किसान दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जा चुका है। इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के 42 प्रगतिशील किसानों को सम्मान मिला था, जिसमें निर्मला का नाम भी शामिल रहा। निर्मला का कहना है कि आज के दौर में कोई भी काम मुश्किल नहीं है। महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और खेती भी इससे अलग नहीं है।
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निर्मला पिछले करीब 10 वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रही हैं। उन्होंने रासायनिक खाद और कीटनाशकों से दूरी बनाते हुए जैविक व प्राकृतिक तरीकों को अपनाया जिससे उनकी फसलों की गुणवत्ता बेहतर हुई और लागत में भी कमी आई। वर्तमान में वह करीब पांच एकड़ भूमि में सब्जियों का उत्पादन कर रही हैं। इसमें आलू, गोभी, टिंडा, करेला और प्याज प्रमुख फसलें हैं।
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निर्मला बताती हैं कि उनकी सालाना आय करीब 8 से 10 लाख रुपये तक पहुंच जाती है जबकि कुल लागत 4 से 5 लाख रुपये के बीच रहती है। प्राकृतिक खेती ने उनकी आमदनी को दोगुना करने में अहम भूमिका निभाई है। उनका कहना है कि सही योजना, मेहनत और नई तकनीकों को अपनाकर खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है।
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15 से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए किया प्रेरित
निर्मला ने बताया कि खेती के इस सफर में उनके पति बुधराम का भी पूरा सहयोग रहा है। दोनों मिलकर खेतों का प्रबंधन करते हैं और आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करते हैं। निर्मला का मानना है कि परिवार का साथ और सही मार्गदर्शन मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहतीं।निर्मला ने अब तक 15 से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित किया है। वह आसपास के किसानों को सब्जी उत्पादन के गुर सिखाती हैं और उन्हें रासायनिक खेती से होने वाले नुकसान के बारे में भी जागरूक करती हैं। उनके प्रयासों से कई किसान प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
किसान दिवस पर मिला था सम्मान
निर्मला की मेहनत और उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में किसान दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जा चुका है। इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के 42 प्रगतिशील किसानों को सम्मान मिला था, जिसमें निर्मला का नाम भी शामिल रहा। निर्मला का कहना है कि आज के दौर में कोई भी काम मुश्किल नहीं है। महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और खेती भी इससे अलग नहीं है।