{"_id":"65ff317459634299e105f0c4","slug":"martyrdom-day-celebrated-as-save-democracy-day-rewari-news-c-198-1-rew1001-202434-2024-03-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: शहादत दिवस को लोकतंत्र बचाओ दिवस के रूप में मनाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: शहादत दिवस को लोकतंत्र बचाओ दिवस के रूप में मनाया
Sun, 24 Mar 2024 01:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 24 Mar 2024 01:15 AM IST
विज्ञापन
डहीना। गांव निमोठ में ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन की ओर से शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु तथा सुखदेव के 94वें शहादत दिवस को लोकतंत्र बचाओ दिवस के रूप में मनाया गया। इस दौरान श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
संगठन के जिला अध्यक्ष रामकुमार निमोठ व सचिव राकेश कुमार सुनारिया ने बताया कि 23 मार्च 1931 की रात में ब्रिटिश साम्राज्यवाद ने देश की जनता के सच्चे सपूत, क्रांतिकारी योद्धा, समझौताहीन संघर्ष की धारा के अगुआ भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी के तख्ते पर लटका दिया था। भगत सिंह एवं उनके दल हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्यवाद को देश से भगाने के साथ-साथ देश में शोषण मुक्त समाजवादी व्यवस्था स्थापित करना था, लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका।
15 अगस्त 1947 को समझौते से आजादी तो मिल गई, लेकिन राजसत्ता पर अंग्रेज साम्राज्यवादियों की जगह भारतीय पूंजीपति काबिज़ हो गए। इस तरह शासक व शोषक तो बदल गए, लेकिन शोषण, जुल्म बदस्तूर जारी रहा। इस अवसर पर राजबीर, ओमप्रकाश, सतनारायण, योगेन्द्र, हजारी, संतोष आदि अन्य उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
संगठन के जिला अध्यक्ष रामकुमार निमोठ व सचिव राकेश कुमार सुनारिया ने बताया कि 23 मार्च 1931 की रात में ब्रिटिश साम्राज्यवाद ने देश की जनता के सच्चे सपूत, क्रांतिकारी योद्धा, समझौताहीन संघर्ष की धारा के अगुआ भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी के तख्ते पर लटका दिया था। भगत सिंह एवं उनके दल हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्यवाद को देश से भगाने के साथ-साथ देश में शोषण मुक्त समाजवादी व्यवस्था स्थापित करना था, लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका।
विज्ञापन
15 अगस्त 1947 को समझौते से आजादी तो मिल गई, लेकिन राजसत्ता पर अंग्रेज साम्राज्यवादियों की जगह भारतीय पूंजीपति काबिज़ हो गए। इस तरह शासक व शोषक तो बदल गए, लेकिन शोषण, जुल्म बदस्तूर जारी रहा। इस अवसर पर राजबीर, ओमप्रकाश, सतनारायण, योगेन्द्र, हजारी, संतोष आदि अन्य उपस्थित रहे।
विज्ञापन