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Rewari News: विकास की बात तो दूर रही, बुनियादी सुविधाएं भी अच्छी नहीं
Sun, 16 Feb 2025 12:22 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 16 Feb 2025 12:22 AM IST
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फोटो : 03हरिओम अग्रसेन परिसर में आयोजित संवाद कार्यक्रम। संवाद
- फोटो : एसोसिएशन
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। रेलवे रोड पर स्थित हरिओम अग्रसेन परिसर में अमर उजाला की ओर से संवाद का आयोजन शनिवार को किया गया। इसमें लोक जन सेवा मंच, प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, सेवा भारती, भगवान परशुराम शिक्षा समिति, पतंजलि योग समिति, आर्य समाज, भारत विकास परिषद, अखिल भारतीय मानव कष्ट निवारण समिति व वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन के पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने शहर की समस्याएं उठाईं।
सभी संस्थाओं के पदाधिकारियों ने शहर की समस्याएं रखीं। सभी ने गंदगी, पार्किंग की समस्या, अतिक्रमण, ट्रैफिक जाम पर चिंता जताई। कहा कि पेयजल का संकट है। सड़कें जर्जर हैं। विकास की बात तो दूर रही, बुनियादी सुविधाएं भी अच्छी नहीं हैं। संस्थाओं के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार विकास कार्यों पर पैसा खर्च कर रही है, लेकिन अधिकारी कार्य करने में नाकाम हैं। विभिन्न विकास कार्यों के लिए लाखों, करोड़ों रुपये के टेंडर जारी होते हैं, फिर विकास कार्य नजर नहीं आ रहे हैं।
यह भी कहा कि टेंडर जारी होने के बाद जो कार्य होता है, सरकार की तरफ से इसकी समीक्षा नहीं की जाती है। अगर समय रहते समीक्षा की जाए और कितना पैसा कहां पर खर्च हुआ है, इस पर ध्यान दिया जाए तो काफी हद तक सुधार हो सकता है। पदाधिकारियों ने बताया कि इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर वर्ष कूड़ा उठाने, बेसहारा पशुओं को पकड़ने, सड़कों की मरम्मत करने, नालों की सफाई करने के नाम पर लाखों रुपये खर्च होते हैं। उसके बाद भी सुधार नहीं हो रहा है।
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विकास कार्यों के टेंडर छोड़े जाते हैं, लेकिन इस पर हुए कार्य की सुध नहीं ली जाती है। सरकार पैसा दे रही है, लेकिन कई विभागों के अधिकारी काम नहीं कराते हैं। जो टेंडर छोड़े जाएं, बाद में उसका फीडबैक लिया जाए। काम हुआ है या नहीं, इसकी जांच हो। अगर ऐसा होगा तो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और काम भी ठीक से होगा। -मुरारी लाल शर्मा, प्रधान, वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन।
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समाधान शिविर में डीसी समस्याओं का समाधान करा रहे हैं। अन्य अधिकारी आम जन की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते हैं। सरकारी कार्यालय में लोगों को अपने कार्य करवाने के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं। जब समाधान शिविर में पहुंचकर ही लोगों के कार्य होने हैं। जब डीसी को ही सभी कार्य करने हैं तो बाकी अधिकारियों का क्या कार्य है। -रमेश मुदगिल, प्रधान, लोक जन सेवा मंच।
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शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है। पेयजल की समस्या बरकरार है। सड़कें भी खराब हैं। सड़कों की मरम्मत होनी बहुत जरूरी है। शहर में मूलभूत सुविधाएं ही नहीं रहेगी तो जनता कैसे गुजारा करेगी। -महेंद्र गोयल, कोषाध्यक्ष, लोक जन सेवा मंच।
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शहर में जाम की समस्या गंभीर है। सर्कुलर रोड पर कई अस्पताल व शिक्षण संस्थान हैं जिनके पास खुद के पार्किंग स्थल नहीं हैं। बाहर वाहन खड़े होने के कारण दिनभर जाम की समस्या बनी रहती है। जाम के कारण सबसे ज्यादा बुजुर्गों को परेशानी होती है। इसका निदान होना जरूरी है। -वीके राम सिंह, प्रचारक, प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय।
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शहर तभी सुंदर होगा, जब चारों तरफ सफाई रहेगी। विधायक जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं, यह अच्छी बात है। लोग कूड़ा इधर-उधर ना फेकें। एक जिम्मेदार नागरिक बनकर ही शहर को साफ सुथरा रखा जा सकता है। -लक्ष्मी नारायण, कार्यकारी अध्यक्ष, सेवा भारती संस्था।
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शहर के अंडरपास के पास 4 से 5 कालोनियां हैं। लोगों को छोटे-मोटे कार्य के लिए इधर-उधर जाना पड़ता है। अक्सर देखने को मिलता है कि अंडरपास के पास पुलिसकर्मी चालान काटते हैं, जो उचित नहीं है। कॉलोनियों के लोग परेशान हैं। चालान ही काटना है तो चौक-चौराहों पर काट सकते हैं। स्थानीय लोग परेशान हैं। -सत्यप्रकाश गौतम, अध्यक्ष, भगवान परशुराम शिक्षा समिति।
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शहर में जगह-जगह पर गड्ढे बने हुए हैं। लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। गड्ढों को भरा जाना चाहिए, इससे दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है। जहां तक बात साफ सफाई की है तो लोगों को खुद ही जागरूक होना पड़ेगा। इस पर मिलजुल कार्य करना होगा। -धर्मवीर आर्य, सदस्य, पतंजलि योग समिति व आर्य समाज।
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शहर में पार्किंग नहीं है। लोग जहां-तहां गाड़ी खड़ा कर चले जाते हैं। इससे जाम लगता है। पार्किंग की समस्या अगर दूर हो जाए तो काफी हद तक ट्रैफिक को नियंत्रित किया जा सकता है। मगर अभी तक इस पर कोई भी ध्यान नहीं दिया गया है। -रमेश सचदेवा, संरक्षक, भारत विकास परिषद मुख्य शाखा ( रेवाड़ी) ।
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शहर में बेसहारा पशुओं की वजह से हादसे होते रहते हैं। कागजों में तो हमेशा काम दिखाई देता है लेकिन जमीनी स्तर पर भी कार्य दिखना चाहिए। सुना है कि पशुओं को पकड़ने का काम चल रहा है। देखना होगा कि इससे लोगों को कितना फायदा होता है। -एमपी शर्मा, सदस्य, लोक जन सेवा मंच।
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कुछ समस्याएं तो लोगों ने खुद पैदा कर रखी हैं। लोग जहां-तहां वाहन खड़ा कर चले जाते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। बाजार में भीड़ लगने का एक कारण वाहनों को इधर-उधर खड़ा करना है। गाड़ी इस तरीके से खड़ी करनी चाहिए कि जाम ना लगे। -सावल राम, सदस्य, लोक जन सेवा मंच।
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शहर के विभिन्न बाजारों में गंदगी देखने को मिलती है। सुबह कूड़ा उठाने वाले कर्मचारी आकर चले जाते हैं। दुकाने 9 बजे के बाद खुलती हैं। अगर कर्मचारियों का समय बदल दिया जाए तो इससे काफी हद तक फायदा हो सकता है। व्यापारियों की भी यही मांग रही है। -श्योकरण मेहरा, प्रधान, अखिल भारतीय मानव कष्ट निवारण समिति।
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नारनौल और महेंद्रगढ़ फाटक के पास जो पुल बन रहा है, वहां पर कई कालोनियां हैं। पुल बनने के कारण आवागमन बाधित हो गया है। सर्विस रोड नहीं दी गई है। इससे लोग परेशान हैं। कई किलोमीटर का चक्कर लगाकर आना जाना पड़ता है। इसका समाधान होना काफी जरूरी है। -आर्य महेंद्र सिंह, नेता, दलित समाज।
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शहर में गंदगी, अतिक्रमण और बेसहारा पशुओं की समस्या है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए प्रशासन को व्यापक रूप से रणनीति बनाती होगी, ताकि सुधार किया जा सके। लोग भी अगर अपने आप में सुधार करें तो बड़े स्तर पर लाभ देखने को मिलेगा।-नरेंद्र जोशी, महासचिव, लोक जन सेवा मंच।
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बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए लाखों रुपये खर्च होते हैं, इसके बाद भी सड़कों पर पशु नजर आते हैं। लगातार हादसे हो रहे हैं। लोग डर के साए में जीने को मजबूर हैं। कई हादसों में तो मौत भी हो चुकी है। पशुओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। इस पर ध्यान देने की प्रशासन को विशेष जरूरत है।-रविंद्र मुदगिल, सचिव, लोक जन सेवा मंच।
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रेवाड़ी। रेलवे रोड पर स्थित हरिओम अग्रसेन परिसर में अमर उजाला की ओर से संवाद का आयोजन शनिवार को किया गया। इसमें लोक जन सेवा मंच, प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, सेवा भारती, भगवान परशुराम शिक्षा समिति, पतंजलि योग समिति, आर्य समाज, भारत विकास परिषद, अखिल भारतीय मानव कष्ट निवारण समिति व वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन के पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने शहर की समस्याएं उठाईं।
सभी संस्थाओं के पदाधिकारियों ने शहर की समस्याएं रखीं। सभी ने गंदगी, पार्किंग की समस्या, अतिक्रमण, ट्रैफिक जाम पर चिंता जताई। कहा कि पेयजल का संकट है। सड़कें जर्जर हैं। विकास की बात तो दूर रही, बुनियादी सुविधाएं भी अच्छी नहीं हैं। संस्थाओं के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार विकास कार्यों पर पैसा खर्च कर रही है, लेकिन अधिकारी कार्य करने में नाकाम हैं। विभिन्न विकास कार्यों के लिए लाखों, करोड़ों रुपये के टेंडर जारी होते हैं, फिर विकास कार्य नजर नहीं आ रहे हैं।
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यह भी कहा कि टेंडर जारी होने के बाद जो कार्य होता है, सरकार की तरफ से इसकी समीक्षा नहीं की जाती है। अगर समय रहते समीक्षा की जाए और कितना पैसा कहां पर खर्च हुआ है, इस पर ध्यान दिया जाए तो काफी हद तक सुधार हो सकता है। पदाधिकारियों ने बताया कि इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर वर्ष कूड़ा उठाने, बेसहारा पशुओं को पकड़ने, सड़कों की मरम्मत करने, नालों की सफाई करने के नाम पर लाखों रुपये खर्च होते हैं। उसके बाद भी सुधार नहीं हो रहा है।
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विकास कार्यों के टेंडर छोड़े जाते हैं, लेकिन इस पर हुए कार्य की सुध नहीं ली जाती है। सरकार पैसा दे रही है, लेकिन कई विभागों के अधिकारी काम नहीं कराते हैं। जो टेंडर छोड़े जाएं, बाद में उसका फीडबैक लिया जाए। काम हुआ है या नहीं, इसकी जांच हो। अगर ऐसा होगा तो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और काम भी ठीक से होगा। -मुरारी लाल शर्मा, प्रधान, वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन।
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समाधान शिविर में डीसी समस्याओं का समाधान करा रहे हैं। अन्य अधिकारी आम जन की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते हैं। सरकारी कार्यालय में लोगों को अपने कार्य करवाने के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं। जब समाधान शिविर में पहुंचकर ही लोगों के कार्य होने हैं। जब डीसी को ही सभी कार्य करने हैं तो बाकी अधिकारियों का क्या कार्य है। -रमेश मुदगिल, प्रधान, लोक जन सेवा मंच।
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शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है। पेयजल की समस्या बरकरार है। सड़कें भी खराब हैं। सड़कों की मरम्मत होनी बहुत जरूरी है। शहर में मूलभूत सुविधाएं ही नहीं रहेगी तो जनता कैसे गुजारा करेगी। -महेंद्र गोयल, कोषाध्यक्ष, लोक जन सेवा मंच।
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शहर में जाम की समस्या गंभीर है। सर्कुलर रोड पर कई अस्पताल व शिक्षण संस्थान हैं जिनके पास खुद के पार्किंग स्थल नहीं हैं। बाहर वाहन खड़े होने के कारण दिनभर जाम की समस्या बनी रहती है। जाम के कारण सबसे ज्यादा बुजुर्गों को परेशानी होती है। इसका निदान होना जरूरी है। -वीके राम सिंह, प्रचारक, प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय।
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शहर तभी सुंदर होगा, जब चारों तरफ सफाई रहेगी। विधायक जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं, यह अच्छी बात है। लोग कूड़ा इधर-उधर ना फेकें। एक जिम्मेदार नागरिक बनकर ही शहर को साफ सुथरा रखा जा सकता है। -लक्ष्मी नारायण, कार्यकारी अध्यक्ष, सेवा भारती संस्था।
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शहर के अंडरपास के पास 4 से 5 कालोनियां हैं। लोगों को छोटे-मोटे कार्य के लिए इधर-उधर जाना पड़ता है। अक्सर देखने को मिलता है कि अंडरपास के पास पुलिसकर्मी चालान काटते हैं, जो उचित नहीं है। कॉलोनियों के लोग परेशान हैं। चालान ही काटना है तो चौक-चौराहों पर काट सकते हैं। स्थानीय लोग परेशान हैं। -सत्यप्रकाश गौतम, अध्यक्ष, भगवान परशुराम शिक्षा समिति।
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शहर में जगह-जगह पर गड्ढे बने हुए हैं। लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। गड्ढों को भरा जाना चाहिए, इससे दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है। जहां तक बात साफ सफाई की है तो लोगों को खुद ही जागरूक होना पड़ेगा। इस पर मिलजुल कार्य करना होगा। -धर्मवीर आर्य, सदस्य, पतंजलि योग समिति व आर्य समाज।
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शहर में पार्किंग नहीं है। लोग जहां-तहां गाड़ी खड़ा कर चले जाते हैं। इससे जाम लगता है। पार्किंग की समस्या अगर दूर हो जाए तो काफी हद तक ट्रैफिक को नियंत्रित किया जा सकता है। मगर अभी तक इस पर कोई भी ध्यान नहीं दिया गया है। -रमेश सचदेवा, संरक्षक, भारत विकास परिषद मुख्य शाखा ( रेवाड़ी) ।
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शहर में बेसहारा पशुओं की वजह से हादसे होते रहते हैं। कागजों में तो हमेशा काम दिखाई देता है लेकिन जमीनी स्तर पर भी कार्य दिखना चाहिए। सुना है कि पशुओं को पकड़ने का काम चल रहा है। देखना होगा कि इससे लोगों को कितना फायदा होता है। -एमपी शर्मा, सदस्य, लोक जन सेवा मंच।
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कुछ समस्याएं तो लोगों ने खुद पैदा कर रखी हैं। लोग जहां-तहां वाहन खड़ा कर चले जाते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। बाजार में भीड़ लगने का एक कारण वाहनों को इधर-उधर खड़ा करना है। गाड़ी इस तरीके से खड़ी करनी चाहिए कि जाम ना लगे। -सावल राम, सदस्य, लोक जन सेवा मंच।
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शहर के विभिन्न बाजारों में गंदगी देखने को मिलती है। सुबह कूड़ा उठाने वाले कर्मचारी आकर चले जाते हैं। दुकाने 9 बजे के बाद खुलती हैं। अगर कर्मचारियों का समय बदल दिया जाए तो इससे काफी हद तक फायदा हो सकता है। व्यापारियों की भी यही मांग रही है। -श्योकरण मेहरा, प्रधान, अखिल भारतीय मानव कष्ट निवारण समिति।
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नारनौल और महेंद्रगढ़ फाटक के पास जो पुल बन रहा है, वहां पर कई कालोनियां हैं। पुल बनने के कारण आवागमन बाधित हो गया है। सर्विस रोड नहीं दी गई है। इससे लोग परेशान हैं। कई किलोमीटर का चक्कर लगाकर आना जाना पड़ता है। इसका समाधान होना काफी जरूरी है। -आर्य महेंद्र सिंह, नेता, दलित समाज।
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शहर में गंदगी, अतिक्रमण और बेसहारा पशुओं की समस्या है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए प्रशासन को व्यापक रूप से रणनीति बनाती होगी, ताकि सुधार किया जा सके। लोग भी अगर अपने आप में सुधार करें तो बड़े स्तर पर लाभ देखने को मिलेगा।-नरेंद्र जोशी, महासचिव, लोक जन सेवा मंच।
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बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए लाखों रुपये खर्च होते हैं, इसके बाद भी सड़कों पर पशु नजर आते हैं। लगातार हादसे हो रहे हैं। लोग डर के साए में जीने को मजबूर हैं। कई हादसों में तो मौत भी हो चुकी है। पशुओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। इस पर ध्यान देने की प्रशासन को विशेष जरूरत है।-रविंद्र मुदगिल, सचिव, लोक जन सेवा मंच।