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भारत के युवाओं में नवाचार की अपार क्षमता : डॉ. अजीत

Fri, 31 Oct 2025 12:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Fri, 31 Oct 2025 12:37 AM IST
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India's youth have immense potential for innovation: Dr. Ajit
कृषि महाविद्यालय बावल परिसर में एकत्रित हुए गणमान्य। स्रोत : कॉलेज
बावल। कृषि महाविद्यालय बावल में कृषि क्षेत्र में नवाचार और स्थायित्व की ओर से सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति विषय पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने किया।
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कुलपति ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि यह आयोजन आज के समय की आवश्यकता है, क्योंकि भारत कृषि परिवर्तन के एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और आर्थिक समृद्धि को साथ लेकर चलना अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर के 13 राज्यों और 34 विश्वविद्यालयों से लगभग 200 प्रतिभागी शामिल हैं।
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संगोष्ठी में कुल 292 शोध सारांश प्राप्त हुए हैं, जिनमें 67 मौखिक व 225 पोस्टर प्रस्तुतियाम शामिल हैं। डॉ. अजीत सिंह यादव (एडीजी, शिक्षा गुणवत्ता आश्वासन एवं सुधार) ने चुनौतियां ही अवसर हैं, विषय पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भारत के युवाओं में नवाचार की अपार क्षमता है और उन्हें कृषि क्षेत्र में परिवर्तन के वाहक के रूप में आगे आना चाहिए।
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अंतरराष्ट्रीय वक्ता प्रो. आर्थर रीडेकर (फ्रांस, नोबेल पुरस्कार विजेता 2017) ने जलवायु परिवर्तन और सतत विकास की चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि नवाचार ही कृषि को पारिस्थितिक रूप से मजबूत और जलवायु के अनुकूल बना सकता है।
इस अवसर पर डॉ. एसके शर्मा (एडीजी, मानव संसाधन विकास) ने विकसित भारत में कृषि का योगदान और स्टेवार्डशिप विषय पर विस्तृत चर्चा की और संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों के संदर्भ में कृषि की भूमिका पर प्रकाश डाला। डॉ. जगदीश राणे (निदेशक, आईसीएआर, नई दिल्ली) ने हरित क्रांति सतत कृषि की दिशा पर विचार रखते हुए कार्बन ट्रेडिंग जैसे नवाचारों को किसानों के लिए अवसर बताया।

शोध और अनुभव साझा किए
संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में डॉ. केपी. सिंह, प्रो. आरए कौशिक, प्रो. एस गणपथी, डॉ. सुनील शर्मा, डॉ. अमित गोस्वामी, प्रो. चांदगी राम और डॉ. दिनेश शर्मा सहित देशभर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने अपने शोध और अनुभव साझा किए। आगामी सत्रों में डिजिटल कृषि, जैविक खेती, जलवायु-स्मार्ट खेती, संसाधन संरक्षण और तकनीकी नवाचारों पर गहन चर्चा की जाएगी ताकि भारत की कृषि को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अधिक सशक्त और स्थायी बनाया जा सके। संगोष्ठी में वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, छात्रों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कृषि महाविद्यालय बावल परिसर में एकत्रित हुए गणमान्य। स्रोत : कॉलेज

कृषि महाविद्यालय बावल परिसर में एकत्रित हुए गणमान्य। स्रोत : कॉलेज

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