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Rewari News: स्त्री रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति के बाद प्रसव सेवा में वृद्धि
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नागरिक अस्पताल में भर्ती महिलाएं। संवाद
कोसली। नागरिक अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति यादव की नियुक्ति के बाद निरंतर प्रसव सेवा में वृद्धि हो रही है। जहां पहले इस अस्पताल में औसतन हर महीने केवल तीन प्रसव होते थे, अब प्रतिदिन तीन प्रसव होना एक बड़ा बदलाव है।
दरअसल, ग्रामीण क्षेत्रों में यह देखने को मिलता है कि प्रसव जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवाओं के लिए महिलाओं को शहर या निजी अस्पतालों की ओर रूख करना पड़ता है।
एसएमओ डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि इस बदलाव के पीछे अस्पताल प्रबंधन की सक्रियता, स्टाफ की उपलब्धता, स्वच्छता, आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था और सबसे बढ़कर मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार महत्वपूर्ण कारक हो सकते हैं।
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जब किसी सरकारी अस्पताल में भरोसे का माहौल बनता है तो लोग स्वाभाविक रूप से निजी संस्थानों की बजाय सरकारी सेवाओं को प्राथमिकता देने लगते हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी राहत मिलती है।
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उपलब्धि के साथ कुछ जिम्मेदारियां भी जुड़ी
डॉ. प्रीति यादव ने बताया कि इस उपलब्धि के साथ कुछ जिम्मेदारियां भी जुड़ी हैं। प्रसव की संख्या बढ़ने का अर्थ है कि अस्पताल पर कार्यभार भी बढ़ेगा। ऐसे में यह आवश्यक है कि पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ, दवाइयों की उपलब्धता, आपातकालीन सुविधाएं और नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए उचित इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। केवल संख्या बढ़ना ही सफलता का पैमाना नहीं होना चाहिए, बल्कि मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी तथा सुरक्षित प्रसव की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
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दरअसल, ग्रामीण क्षेत्रों में यह देखने को मिलता है कि प्रसव जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवाओं के लिए महिलाओं को शहर या निजी अस्पतालों की ओर रूख करना पड़ता है।
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एसएमओ डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि इस बदलाव के पीछे अस्पताल प्रबंधन की सक्रियता, स्टाफ की उपलब्धता, स्वच्छता, आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था और सबसे बढ़कर मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार महत्वपूर्ण कारक हो सकते हैं।
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जब किसी सरकारी अस्पताल में भरोसे का माहौल बनता है तो लोग स्वाभाविक रूप से निजी संस्थानों की बजाय सरकारी सेवाओं को प्राथमिकता देने लगते हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी राहत मिलती है।
उपलब्धि के साथ कुछ जिम्मेदारियां भी जुड़ी
डॉ. प्रीति यादव ने बताया कि इस उपलब्धि के साथ कुछ जिम्मेदारियां भी जुड़ी हैं। प्रसव की संख्या बढ़ने का अर्थ है कि अस्पताल पर कार्यभार भी बढ़ेगा। ऐसे में यह आवश्यक है कि पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ, दवाइयों की उपलब्धता, आपातकालीन सुविधाएं और नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए उचित इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। केवल संख्या बढ़ना ही सफलता का पैमाना नहीं होना चाहिए, बल्कि मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी तथा सुरक्षित प्रसव की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।