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Rewari News: रामगिरी के आंगन में फूलों के साथ खिलते हैं मन

Sun, 22 Feb 2026 11:05 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sun, 22 Feb 2026 11:05 PM IST
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In the courtyard of Ramgiri, the mind blossoms with the flowers
रामगीरी
कोसली। गांव झाल निवासी रामगिरी (48) ने अपने घर के आंगन में फूलों की बगिया लगाई है। गुलाब, गेंदा के फूलों से उठती खुशबू में न सिर्फ घर गमक उठता है बल्कि आंगन में फूलों के साथ मन भी खिल उठते हैं।
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अध्यापिका रामगिरी बताती हैं कि उन्होंने करीब 20 साल पहले बगिया की शुरुआत की थी। तब से लेकर आज तक शायद ही कोई दिन ऐसा गया हो, जब उन्होंने पौधों की देखभाल न की हो।
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सुबह-शाम नियमित रूप से पौधों को पानी देना, सूखी पत्तियां हटाना और खाद डालना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। रविवार को जब उन्हें पूरा समय मिलता है, तो वह दिनभर पौधों की खास देखरेख करती हैं।
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उनकी बगिया में गुडहल, गुलाब, गेंदा, गुलदाउदी समेत कई प्रकार के फूल लगे हुए हैं। रंग-बिरंगे फूलों से सजा आंगन न केवल घर की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि आसपास के वातावरण को भी ताजगी से भर देता है। ॉ
वह बच्चों और आसपास के लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती हैं। अध्यापिका होने के नाते वे विद्यार्थियों को पौधरोपण और प्रकृति संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक करती हैं।
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पौधों से जीवन में मिलता है सुकून
रामगिरी ने बताया कि बगिया में जैविक तरीकों को प्राथमिकता देती हैं। घर के किचन वेस्ट और गली हुई गोबर की खाद का उपयोग कर पौधों को पोषण दिया जाता है। उनका मानना है कि रासायनिक खाद के बजाय प्राकृतिक खाद पौधों और पर्यावरण दोनों के लिए बेहतर होती है। इसी कारण उनकी बगिया में पौधे स्वस्थ और हरे-भरे नजर आते हैं।

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परिवार का भी मिलता है पूरा सहयोग :
रामगिरी ने बताया कि परिवार का भी उन्हें पूरा सहयोग मिलता है। उनके पति भूप सिंह पूनिया, बेटा अश्विनी और बेटी विशू समय-समय पर बगिया की देखभाल में हाथ बंटाते हैं। परिवार के सहयोग से ही यह हरियाली संभव हो पाई है। यदि हर व्यक्ति अपने घर में कुछ पौधे भी लगा ले, तो पर्यावरण को काफी हद तक बचाया जा सकता है। बढ़ते प्रदूषण के दौर में हरियाली ही संतुलन बनाए रखने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है।

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ऐसे करें पौधों की देखभाल
सर्कुलर रोड स्थित नर्सरी के संचालक विरेंद्र कुमार ने बताया कि पौधों की देखभाल और बचाव के लिए नियमित रूप से पानी देना जरूरी है, लेकिन अधिक पानी से जड़ों को नुकसान हो सकता है, इसलिए संतुलन रखें। समय-समय पर सूखी पत्तियां और खरपतवार हटाएं। जैविक खाद जैसे गोबर की खाद या किचन वेस्ट का उपयोग करें। तेज धूप या पाले से बचाने के लिए जरूरत अनुसार छायादार जाल या कवर लगाएं। कीटों से बचाव के लिए नीम का घोल छिड़क सकते हैं। गमलों की मिट्टी को बीच-बीच में ढीला करें ताकि हवा पहुंचती रहे। नियमित देखरेख और सफाई से पौधे स्वस्थ और हरे-भरे बने रहते हैं।

रामगीरी

रामगीरी

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