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मनरेगा की अनदेखी मजदूरों के साथ अन्याय : दीपा डाबला
Tue, 12 Aug 2025 12:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 12 Aug 2025 12:32 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। युवा कांग्रेस की पूर्व प्रदेश महासचिव दीपा डाबला ने कहा कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का उद्देश्य गांवों के गरीब जरूरतमंद परिवारों को न्यूनतम 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित करना है। सरकार इस योजना की अनदेखी कर मजदूरों के साथ अन्याय कर रही है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में जारी आकड़ों से स्पष्ट हो रहा है कि हरियाणा सरकार इस योजना को कमजोर कर रही है, जिससे लाखों गरीब मजदूर परिवार प्रभावित हो रहे हैं। प्रदेश की भाजपा सरकार इस योजना की अनदेखी कर गरीबों और मजदूरों के साथ अन्याय कर रही है।
डाबला ने सरकार से अनुरोध किया कि मनरेगा सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर गरीब मजदूरों की जिंदगी सुधारने का साधन बननी चाहिए।उन्होंने कहा कि 2007-08 से लेकर 2022-23 तक के आंकड़े दर्शाते हैं कि पंजीकृत परिवारों की संख्या बढ़ने के बावजूद रोजगार मांगने और प्राप्त करने वालों की संख्या में भारी गिरावट आई है।
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विशेष रूप से 100 दिन का रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या चिंताजनक रूप से बेहद कम है। 2022-23 में पंजीकृत 12.35 लाख परिवारों में से केवल 4.72 लाख ने ही रोजगार मांगा और सिर्फ 1,331 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिला। यह स्थिति गरीबों के लिए अच्छी नहीं है।
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रेवाड़ी। युवा कांग्रेस की पूर्व प्रदेश महासचिव दीपा डाबला ने कहा कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का उद्देश्य गांवों के गरीब जरूरतमंद परिवारों को न्यूनतम 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित करना है। सरकार इस योजना की अनदेखी कर मजदूरों के साथ अन्याय कर रही है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में जारी आकड़ों से स्पष्ट हो रहा है कि हरियाणा सरकार इस योजना को कमजोर कर रही है, जिससे लाखों गरीब मजदूर परिवार प्रभावित हो रहे हैं। प्रदेश की भाजपा सरकार इस योजना की अनदेखी कर गरीबों और मजदूरों के साथ अन्याय कर रही है।
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डाबला ने सरकार से अनुरोध किया कि मनरेगा सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर गरीब मजदूरों की जिंदगी सुधारने का साधन बननी चाहिए।उन्होंने कहा कि 2007-08 से लेकर 2022-23 तक के आंकड़े दर्शाते हैं कि पंजीकृत परिवारों की संख्या बढ़ने के बावजूद रोजगार मांगने और प्राप्त करने वालों की संख्या में भारी गिरावट आई है।
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विशेष रूप से 100 दिन का रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या चिंताजनक रूप से बेहद कम है। 2022-23 में पंजीकृत 12.35 लाख परिवारों में से केवल 4.72 लाख ने ही रोजगार मांगा और सिर्फ 1,331 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिला। यह स्थिति गरीबों के लिए अच्छी नहीं है।