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Rewari News: आंखों में पड़ जाए रंग तो साफ पानी से धोएं
Thu, 13 Mar 2025 12:29 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 13 Mar 2025 12:29 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। होली पर 14 मार्च को रंग खेलने के साथ ही सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। थोड़ी सी असावधानी से तबीयत बिगड़ सकती है। चिकित्सकों ने केमिकलयुक्त रंगों से आंखों को बचाने का सुझाव दिया है। कहा है कि अगर आंखों में रंग चला जाए तो आंखों को साफ पानी से धोए और चिकित्सक से संपर्क कर दवा लें।
होली पर लोग एक-दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर होली खेलते हैं। सबसे खतरनाक केमिकलयुक्त रंग होते हैं जिसका त्वचा और आंखों पर खराब असर पड़ता है। धुलेंडी से ही लोग एक दूसरे पर रंग डालने लगते हैं। होली पर कपड़ों पर रंग डालने के साथ ही चेहरे पर भी लगा देते हैं, जो त्वचा के लिए काफी नुकसानदायक है। ऐसे में जरूरी हो गया है कि इन रासायनिक रंगों को त्याग कर पूरी तरह इको फ्रेंडली होली मनाएं।
जानकार बताते हैं कि हरा रंग काॅपर सल्फेट, परपल क्रोमियम आयोडाइड, सिल्वर एलुमीनियम ब्रोमाइड और काला रंग लेड आक्साइड को मिलाकर तैयार किया जाता है। चमकदार बनाने के लिए अक्सर रंग में कांच का बुरादा भी मिलाया जाता है। हरे रंग में मौजूद काॅपर सल्फेट अगर आंखों में चला जाए तो यह एलर्जी और अस्थायी अंधेपन का कारण बन सकता है। काले रंग में मौजूद लेड ऑक्साइड किडनी खराब होने का कारण बन सकता है। बाजार में बिकने वाले बैंगनी रंग में क्रोमियम आयोडाइड होता है जो अस्थमा और एलर्जी पैदा कर सकता है। लाल रंग में इस्तेमाल होने वाला मर्करी सल्फाइट त्वचा के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए केमिकलयुक्त रंगों से बचना चाहिए।
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नागरिक अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कंचन ने होली खेलते समय आंखों का खयाल रखने की अपील की है। कहा कि अगर होली खेलते समय आंखों में रंग चला जाए तो एलर्जी हो सकती है। इससे आंख लाल हो जाती है और चुभन और जलन होने लगती है। इससे आंख खोलने तक में दिक्कत होने लगती है। अगर आंखों में रंग चला जाए तो बार-बार साफ पानी से धोना चाहिए। दिक्कत होने पर तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ की सलाह लें। आंखों में रंग चले जाने पर उसे रगड़े नहीं, उसे अच्छी तरह से साफ करते हुए विशेष डाक्टर की सलाह लेकर इलाज लें।
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वर्जन
रासायनिक रंगों के इस्तेमाल से शरीर पर लाल दाने निकल सकते हैं। शरीर में खुजली या जलन हो सकती हैं। थोड़ी सी लापरवाही से एलर्जी और त्वचा पर दाग बनने लगेंगे। होली खेलने से पहले शरीर में सरसों का तेल या कोई लोशन लगाना चाहिए। हर्बल रंगों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। किसी भी प्रकार के पानी में घोलने वाले रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। -डाॅ. अनु जैन, चर्म रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल रेवाड़ी।
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रेवाड़ी। होली पर 14 मार्च को रंग खेलने के साथ ही सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। थोड़ी सी असावधानी से तबीयत बिगड़ सकती है। चिकित्सकों ने केमिकलयुक्त रंगों से आंखों को बचाने का सुझाव दिया है। कहा है कि अगर आंखों में रंग चला जाए तो आंखों को साफ पानी से धोए और चिकित्सक से संपर्क कर दवा लें।
होली पर लोग एक-दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर होली खेलते हैं। सबसे खतरनाक केमिकलयुक्त रंग होते हैं जिसका त्वचा और आंखों पर खराब असर पड़ता है। धुलेंडी से ही लोग एक दूसरे पर रंग डालने लगते हैं। होली पर कपड़ों पर रंग डालने के साथ ही चेहरे पर भी लगा देते हैं, जो त्वचा के लिए काफी नुकसानदायक है। ऐसे में जरूरी हो गया है कि इन रासायनिक रंगों को त्याग कर पूरी तरह इको फ्रेंडली होली मनाएं।
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जानकार बताते हैं कि हरा रंग काॅपर सल्फेट, परपल क्रोमियम आयोडाइड, सिल्वर एलुमीनियम ब्रोमाइड और काला रंग लेड आक्साइड को मिलाकर तैयार किया जाता है। चमकदार बनाने के लिए अक्सर रंग में कांच का बुरादा भी मिलाया जाता है। हरे रंग में मौजूद काॅपर सल्फेट अगर आंखों में चला जाए तो यह एलर्जी और अस्थायी अंधेपन का कारण बन सकता है। काले रंग में मौजूद लेड ऑक्साइड किडनी खराब होने का कारण बन सकता है। बाजार में बिकने वाले बैंगनी रंग में क्रोमियम आयोडाइड होता है जो अस्थमा और एलर्जी पैदा कर सकता है। लाल रंग में इस्तेमाल होने वाला मर्करी सल्फाइट त्वचा के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए केमिकलयुक्त रंगों से बचना चाहिए।
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नागरिक अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कंचन ने होली खेलते समय आंखों का खयाल रखने की अपील की है। कहा कि अगर होली खेलते समय आंखों में रंग चला जाए तो एलर्जी हो सकती है। इससे आंख लाल हो जाती है और चुभन और जलन होने लगती है। इससे आंख खोलने तक में दिक्कत होने लगती है। अगर आंखों में रंग चला जाए तो बार-बार साफ पानी से धोना चाहिए। दिक्कत होने पर तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ की सलाह लें। आंखों में रंग चले जाने पर उसे रगड़े नहीं, उसे अच्छी तरह से साफ करते हुए विशेष डाक्टर की सलाह लेकर इलाज लें।
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वर्जन
रासायनिक रंगों के इस्तेमाल से शरीर पर लाल दाने निकल सकते हैं। शरीर में खुजली या जलन हो सकती हैं। थोड़ी सी लापरवाही से एलर्जी और त्वचा पर दाग बनने लगेंगे। होली खेलने से पहले शरीर में सरसों का तेल या कोई लोशन लगाना चाहिए। हर्बल रंगों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। किसी भी प्रकार के पानी में घोलने वाले रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। -डाॅ. अनु जैन, चर्म रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल रेवाड़ी।