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Rewari News: पति कम जेब खर्च देता था, पत्नी पहुंच गई कोर्ट

Mon, 13 May 2024 04:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Mon, 13 May 2024 04:28 AM IST
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Husband used to pay less pocket money, wife reached court
रेवाड़ी। जिला न्यायालय स्थित पारिवारिक न्यायालय। संवाद
रेवाड़ी। छोटी-छोटी बातों पर पति-पत्नी को आपसी रिश्ते खराब नहीं करने चाहिए। रिश्ते तो बाद में सुधर सकते हैं, लेकिन यह अनमोल समय जो निकल गया वह लौटकर नहीं आएगा। जिला पारिवारिक न्यायालय में अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश डॉक्टर अब्दुल मजीद ने अतिरिक्त जेब खर्च के लिए वाद दायर करने वाली महिला और उसके पति से यह बातें कही। उन्होंने दंपती को प्यार से समझाया तो वे फिर से एक साथ रहने के लिए राजी हो गए और तीन साल से चला आ रहा केस खारिज हो गया।
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जिला पारिवारिक न्यायालय में चल रही लोक अदालत में पिछले एक सप्ताह में कई मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया है। ऐसे ही एक मामले में पत्नी ने पिछले तीन साल से महज इसलिए कोर्ट में वाद दायर कर रखा था, क्योंकि उसका पति कम जेब खर्च देता था। दोनों में मासिक खर्च को लेकर अनबन चल रही थी। पति-पत्नी पिछले तीन साल से अलग रहे रहे थे। पति का कहना था कि पत्नी फिजूलखर्ची करती है, इससे घर चलाना मुश्किल हो गया है। वहीं, पत्नी का आरोप था कि पति जरूरत के हिसाब से जेब खर्च नहीं देता है। जज के समझाने के बाद दोनों एक साथ रहने को राजी हो गए।
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तीन साल में नहीं मिला तलाक तो फिर साथ रहने को हो गए राजी
एक अन्य मामले में एक दंपती पिछले तीन साल से तलाक के लिए कोर्ट के चक्कर लगा रहा था। यह दंपती कोर्ट-कचहरी की लंबी बहस और सुनवाई से परेशान होकर फिर से एक साथ घर बसाने पर राजी हो गया। कोर्ट ने भी पति-पत्नी के इस कदम की सराहना की और दंपती को एक साथ रहने के लिए स्वतंत्र कर दिया। दरअसल, दंपती में पिछले तीन साल से छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद चल रहा था। दोनों में दूरियां इतनी बढ़ गई थी कि एक बेटा होने के बाद भी पत्नी, पति से अलग रह रही थी। इस मामले में नौबत तलाक लेने तक पहुंच गई थी। कोर्ट ने छोटी-छोटी बात पर लड़ने को लेकर बहुत ही मजाकिया अंदाज में सुलह करा दी।
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लोक अदालत ने 21 परिवारों का फिर से बसाया
जिला पारिवारिक न्यायालय में अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश डॉक्टर अब्दुल मजीद के प्रयासों से 21 परिवारों को टूटने से बचाने में कामयाबी मिली है। जिला पारिवारिक न्यायालय में 15 तलाक और 6 भरण पोषण के मामलों का पिछले एक सप्ताह में निपटारा किया गया है। जज ने आपसी सहमति से समझा-बुझाकर 21 जोड़ों के बीच चल रहा विवाद खत्म करा दिया।
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