फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rewari News ›   health department Nourish tablate to school child

कुपोषित से बचाव के लिए खिलाई एलबेंडाजोल की गोली

Thu, 11 Feb 2016 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी Updated Thu, 11 Feb 2016 12:32 AM IST
विज्ञापन
जिले में कक्षा नौ से लेकर बारहवीं तक के विद्यार्थियों में कृमि की रोकथाम के लिए बुधवार को उपायुक्त डॉ. यश गर्ग ने राजकीय कन्या विद्यालय में अभियान का शुभारंभ किया। उपायुक्त ने छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए स्वयं अलबेंडाजोल की गोली खाई।
विज्ञापन


अभियान के तहत जिले में ये गोली जिले के सरकारी एवं गैर सरकारी स्कूलों के एक लाख 66 हजार 157 विद्यार्थियों को खिलाई गई। इसमें 88624 लड़के, 77165 लड़कियां भी शामिल हैं। गौरतलब है कि पेट में कृमि अर्थात पेट के कीड़े होने से बच्चों में एनीमिया, कुपोषण एवं मानसिक जैसी खतरनाक बीमारी होने का डर बना रहता है।
विज्ञापन


स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार देश के अधिकतर बच्चे कृमि से पीड़ित हैं। जिले में दस फरवरी के अलावा पंद्रह फरवरी को भी यह गोली खिलाई जाएगी। इस अवसर पर डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सर्वजीत थापर, डॉ.जेके सैनी, प्राचार्या मजुं पंवार, बीरमती एवं नवीन सहित अन्य स्टाफ उपस्थित रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

------------
ग्यारह रुपये की गोली हो सकती है बच्चे के विकास में लाभकारी
स्वास्थ्य विभाग की ओर से निशुल्क दी जाने वाली इस गोली का बाजार में कीमत महज दस रुपये है, लेकिन परिजनों की थोड़ी लापरवाही बच्चों के विकास में बाधक बन सकती है। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी स्कूलों एवं आंगनबाड़ियों में यह गोली खिलाई गई। ग्यारह रुपये की हिसाब से जिले में 18 लाख सत्तर हजार रुपये की एलबेंडाजोल की गोलियों पर खर्च किया गया। वहीं जो बच्चे दस फरवरी को रह गए, उन्हें पंद्रह फरवरी को यह गोली खिलाई जाएगी।
----------------------
कृमि की चपेट में क्यों आते हैं बच्चे
जब बच्चा एक साल का हो जाता है तो वह नीचे जमीन पर खेलने लगता है, इसी दौरान जमीन की गंदगी बच्चों के हाथों से बच्चों के पेट में चली जाती है। यहां से कीड़ा बच्चे की आंत में चला जाता है। जैसे-जैसे समय बढ़ता है तो इसकी संख्या कई गुणा तक बढ़ती जाती है। कीड़े का खाना खून होता है,इसलिए यह बच्चे के खून को चूसना शुरू कर देते हैं। जिसके कारण बच्चों में एनीमिया एवं कुपोषण की बीमारी हो जाती है।
-------------------------
यह हैं लक्षण
बच्चे की आंत में जाने के बाद जैसे ही इनकी संख्या में बढ़ोतरी शुरू होती है,बच्चों के पेट में दर्द शुरू होने के बाद बच्चे रोना शुरू कर देते हैं। वहीं बच्चों की ग्रोथ पर इसका सबसे बड़ा प्रभाव पड़ता है। बच्चो में खून बनने की बजाय बच्चों में इसकी कमी दिन प्रतिदिन बढ़ती जाती है। वहीं बच्चों में याद रखने की क्षमता भी बुरी तरह से प्रभावित होती है। वहीं बच्चों में चिड़चिड़ा पन भी बढ़ जाता है।

---------
पंद्रह फरवरी तक खिलाई जाएगी गोली
वर्जन- बच्चों को कुपोषण एंव खून की कमी से बचाने के लिए जरूरी हैं कि बच्चों को सफाई का विशेष ध्यान रखें ,वहीं सभी परिजन अपने बच्चों को यह गोली जरूर खिलाएं। जो बच्चे रह गए हैं, उन्हें पंद्रह फरवरी को यह गोली खिलाई जाएगी।
-डॉ. धमेंद्र कुमार, नोडल अधिकारी, कार्यक्रम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed