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Rewari News: ग्वार की पैदावार पर गाल मीज का प्रकोप
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फोटो : 7ग्वार की फसल। संवाद
रेवाड़ी। ग्वार की फसल इस बार गाल मीज कीट के प्रकोप से प्रभावित हो रही है। जिले में करीब 1 हजार एकड़ भूमि पर ग्वार की बुआई की गई है, लेकिन कई जगहों पर यह कीट फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि गाल मिज नामक कीट पत्तियों व तनों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे पौधे की वृद्धि रुक जाती है और फली बनने की क्षमता प्रभावित होती है।
इसके कारण फलियों के स्थान पर गोल आकृति के दाने से दिखाई पड़ते हैं। अनुमान है कि यदि समय रहते उन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादकता में 40 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। उधर, किसानों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण फसल कमजोर हो गई और कीट प्रकोप तेजी से फैल गया।
कृषि विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि किसान प्रभावित खेतों की नियमित निगरानी करें और कीट नियंत्रण के लिए 15 से 20 दिन के अंतराल पर दवाइयों का छिड़काव अवश्य करें।
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पौध रोग वैज्ञानिक कपूर सिंह ने बताया कि यह बीमारी विशेषकर वर्षा में तेजी से फैलती है और पत्तियों व फलियों पर गहरा असर डालती है। यह रोग तनों और फलियों तक भी पहुंच जाता है, जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि रोग की रोकथाम के लिए फसल की नियमित निगरानी करें। यदि यह रोग दिखाई दे तो रोगोर (डाइमेथोट) 300 मिली दवा 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। इस छिड़काव को 15-20 दिन के अंतराल पर दोहराना चाहिए। यदि समय पर रोकथाम हो तो बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकते हैं।
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इसके कारण फलियों के स्थान पर गोल आकृति के दाने से दिखाई पड़ते हैं। अनुमान है कि यदि समय रहते उन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादकता में 40 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। उधर, किसानों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण फसल कमजोर हो गई और कीट प्रकोप तेजी से फैल गया।
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कृषि विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि किसान प्रभावित खेतों की नियमित निगरानी करें और कीट नियंत्रण के लिए 15 से 20 दिन के अंतराल पर दवाइयों का छिड़काव अवश्य करें।
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पौध रोग वैज्ञानिक कपूर सिंह ने बताया कि यह बीमारी विशेषकर वर्षा में तेजी से फैलती है और पत्तियों व फलियों पर गहरा असर डालती है। यह रोग तनों और फलियों तक भी पहुंच जाता है, जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि रोग की रोकथाम के लिए फसल की नियमित निगरानी करें। यदि यह रोग दिखाई दे तो रोगोर (डाइमेथोट) 300 मिली दवा 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। इस छिड़काव को 15-20 दिन के अंतराल पर दोहराना चाहिए। यदि समय पर रोकथाम हो तो बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकते हैं।