फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rewari News ›   Flood...rice, jowar and millet crops affected, walls of houses cracked

Rewari News: बाढ़...धान, ज्वार व बाजरा की फसल प्रभावित, मकानों की दीवारें दरकीं

Sun, 07 Sep 2025 02:27 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Sun, 07 Sep 2025 02:27 AM IST
विज्ञापन
Flood...rice, jowar and millet crops affected, walls of houses cracked
फोटो :: 26: बाढ़ और बारिश के दौरान गिरे घर की हालत। संवाद
सोनीपत। यमुना नदी का जलस्तर घटने के साथ ही बाढ़ से बर्बादी के निशान नजर आने लगे हैं। हथिनी कुंड बैराज से नदी में छोड़ा गया पानी आगे निकल गया है लेकिन बाढ़ प्रभावित लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। बाढ़ से नदी के किनारे स्थित गांवों में धान, ज्वार और बाजपा की फसल पूरी तरह से प्रभावित हुई है। मकानों की दीवारें दरक गई हैं। कुछ लोगों के घर गिर गए हैं।
विज्ञापन

उफनती यमुना के पानी में करीब 9 हजार एकड़ फसल डूब गई थी जिससे सब्जी व मक्का की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। अन्य फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन की ओर से गिरदावरी की रिपोर्ट आने के बाद ही नुकसान की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
विज्ञापन


किसानों का कहना है कि सब्जियों और मक्का की अच्छी पैदावार हुई थी लेकिन पानी भर जाने से सारी मेहनत मिट्टी में मिल गई। खेतों में अब भी पानी जमा है और यदि जल्द निकासी नहीं हुई तो बची-खुची फसल भी नष्ट हो जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

यमुना का जलस्तर घटने लगा है तो बाढ़ की तबाही की तस्वीरें धीरे-धीरे सामने आने लगी हैं। फसल बर्बाद होने के साथ दरकते मकान किसानों व ग्रामीणों की पीड़ा को बयां कर रहे हैं। अन्य फसलों के मुकाबले तुलनात्मक रूप से गन्ने की फसल को कम नुकसान पहुंचा है।

मनौली टोंकी, नांदनौर, असदपुर, बड़ौली और बख्तावरपुर जैसे गांव सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रेत खनन और मिट्टी उठाने से खेतों में कटाव बढ़ा है, जिससे पड़ोसी किसानों की जमीन भी प्रभावित हुई है।



हर साल दोहराई जाती है त्रासदी

ग्रामीणों ने कहा कि यह कोई नई स्थिति नहीं है। हर वर्ष बारिश में यमुना का जलस्तर बढऩे पर उन्हें गांव छोडकऱ सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ती है। मनौली टोंकी के किसानों ने आशंका जताई कि पहाड़ी इलाकों में फिर से बारिश शुरू हो गई है, ऐसे में यदि दोबारा पानी छोड़ा गया तो उनकी बची-खुची फसल भी डूब जाएगी। वर्ष 2023 में भी इसी तरह हालात बिगड़ गए थे।



प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है, लेकिन खेतों में पानी भरे होने के कारण पटवारी व कानूनगो सही आकलन नहीं कर पा रहे हैं। किसानों को उम्मीद है कि गिरदावरी पूरी होने पर उन्हें शीघ्र राहत राशि और मुआवजा मिलेगा।



मकानों व स्कूलों की दीवारों में आईं दरारें

फसलों के साथ-साथ ग्रामीणों के मकान भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई घर पूरी तरह ढह गए, जबकि अधिकांश मकानों और सरकारी स्कूलों की दीवारों में गहरी दरारें आ गई हैं। मनौली टोंकी गांव का सरकारी स्कूल पानी भरने के कारण बंद है, जिससे बच्चों की पढ़ाई ठप हो गई है।

प्रशासन और संगठन जुटे राहत कार्य में

प्रशासन के साथ करणी सेना जैसे सामाजिक संगठन भी पीड़ितों की मदद में जुटे हैं। करणी सेना के प्रदेश महामंत्री दीपक चौहान ने कहा कि गरीब परिवार दिहाड़ी पर निर्भर हैं, ऐसे में मकानों की मरम्मत व फसलों की भरपाई संभव नहीं। उन्होंने सरकार से राहत राशि और मुआवजे की मांग की। संगठन की युवा टीम गांव-गांव जाकर खाद्य सामग्री व सहायता उपलब्ध करा रही है।


पोर्टल पर मुआवजा पंजीकरण

प्रशासन ने प्रभावित गांवों के किसानों के नुकसान दर्ज करने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल शुरू कर दिया है। हालांकि अन्य गांवों में भी फसलों को नुकसान हुआ है, लेकिन वहां के किसानों के लिए पोर्टल खोलने की व्यवस्था नहीं की गई। फिलहाल हथिनी कुंड बैराज से छोड़ा गया पानी कम हो रहा है। इससे जिले की करीब 43 किलोमीटर लंबी यमुना सीमा के आसपास बसे 15 से अधिक गांवों में राहत महसूस की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed