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Rewari News: डकैती और जानलेवा हमले के मामले में पांच आरोपी बरी

Wed, 10 Sep 2025 12:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Wed, 10 Sep 2025 12:10 AM IST
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Five accused acquitted in robbery and murder case
रेवाड़ी। शहर के कुतुबपुर मोहल्ले में सितंबर 2019 में डकैती और जानलेवा हमले के एक मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विकास गुप्ता की अदालत ने साक्ष्य साबित नहीं होने पर पांच आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की पहचान और बरामद हथियार और लूटे गए पैसे को अपराध से जोड़ने में नाकाम रहा।
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न्यायाधीश विकास गुप्ता ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी की पहचान और सबूतों की विश्वसनीयता साबित करने में विफल रहा। पुलिस ने न तो टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड कराई और न ही स्वतंत्र गवाहों को जांच में शामिल किया। यही वजह है कि पूरा मामला संदेह के घेरे में रहा।
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अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने का मानक संदेह से परे होना चाहिए। चूंकि इस मामले में यह कसौटी पूरी नहीं हुई। इसलिए सभी आरोपी नितिन उर्फ डब्लू, पवन उर्फ झाबली, सोनू, मोनू सैनी और रोहित को बरी किया जाता है।
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11 सितंबर 2019 का है मामला : रामपुरा थाना पुलिस को 18 सितंबर 2019 को दी गई शिकायत में पीड़ित नरेंद्र कहा था कि 11 सितंबर 2019 की रात कुतुबपुर में जागरण कार्यक्रम चल रहा था। उनका भाई सुरेंद्र वहां पहुंचा था। स्कूटी लौटाने के बहाने जैसे ही वह आगे बढ़ा।
चार-पांच युवकों ने उसके ऊपर पीछे से हमला कर दिया। सुरेंद्र पर चाकू से कई वार किए गए। उसके रुपये भी छीन लिए गए। गंभीर रूप से घायल सुरेंद्र को पहले बिरेंद्र अस्पताल ले जाया गया।
पुलिस ने इस मामले में नितिन उर्फ डब्लू, पवन उर्फ झाबली, मोनू सैनी, सोनू, अनुज और रोहित उर्फ टटिया को आरोपी बनाया। धारा 395 और 397 (डकैती और जानलेवा हमला) के तहत मामला दर्ज हुआ। इसमें एक आरोपी अनुज की सुनवाई के दौरान मौत हो गई और उसके खिलाफ कार्यवाही खत्म कर दी गई थी।

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कोर्ट में घटना से मुकरे दोनों गवाह

अदालत में यह मामला पांच साल छह महीने तक चला। अभियोजन पक्ष ने 18 गवाह पेश किए। सबसे अहम गवाह पीड़ित सुरेंद्र की 2020 में मौत हो गई थी। इससे उसका सीधा बयान अदालत में दर्ज नहीं हो पाया। घटनास्थल पर मौजूद बताए गए गवाह राजू और नरेंद्र ने अदालत में विरोधाभासी बयान दिए। राजू ने पहले दो आरोपियों की पहचान की लेकिन बाद में अपने ही बयान से मुकर गया। नरेंद्र ने भी सिर्फ एक आरोपी की पहचान करने का दावा किया, मगर जिरह में उसने माना कि उसने किसी को हमला करते नहीं देखा।


हथियार और रुपये की बरामदगी पर सवाल

पुलिस ने आरोपियों से चाकू और कुछ रुपये बरामद करने का दावा किया था लेकिन अदालत में यह साबित नहीं हो पाया कि यही हथियार और पैसे घटना से जुड़े थे। बरामद चाकू पर न तो खून के धब्बे मिले और न ही किसी प्रकार की वैज्ञानिक जांच से उनका अपराध से संबंध जुड़ा। अदालत ने कहा कि ऐसे चाकू बाजार में आसानी से उपलब्ध होते हैं। बरामद रुपये भी आम चलन के नोट थे, जिन्हें किसी खास पहचान से नहीं जोड़ा जा सका।
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