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Rewari News: नैनो डीएपी के इस्तेमाल से किसान लें अधिक उपज
Thu, 17 Oct 2024 01:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 17 Oct 2024 01:32 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। नैनो डीएपी का इस्तेमाल कर किसान कम लागत में अधिक उपज ले सकते हैं। इफ्को नैनो डीएपी की लागत परंपरागत डीएपी से कम है। इसका दुष्प्रभाव नहीं है। यह पर्यावरण के अनुकूल है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि नैनो डीएपी पौधों को नाइट्रोजन एंव फास्फोरस प्रदान करता है। यह तरल पदार्थ है। इससे क्लोरोफिल चार्ज होती है। इसके इस्तेमाल से उच्च एवं गुणवत्तापूर्ण उपज होती हैं। रासायनिक उर्वरक उपयोग में कमी आती हैं। छोटी बोटल रखरखाव और परिवहन में आसानी प्रदान करती हैं। इफको नैनो डीएपी को तीन प्रमुख तरीके से उपयोग किया जा सकता हैं। इसका उपयोग बीजोपचार, जड़/कंद उपचार और पत्तों पर छिड़काव करके किया जा सकता है। बीजोपचार करने के लिए इफको नैनो डीएपी का 3-5 मिली प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपयोग करें। जड़ और कंद के उपचार के लिए इफको नैनो डीएपी का 3-5 मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से उपयोग करे। पत्तो पर छिड़काव फसल में 2 बार किया जा सकता हैं। पहला छिड़काव पत्ते आने की अवस्था में (जुताई का समय- शाखांए आने पर) 2-4 मिली प्रति लीटर पानी में और दूसरा छिड़काव फूल आने से पहले की अवस्था में करें।
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रेवाड़ी। नैनो डीएपी का इस्तेमाल कर किसान कम लागत में अधिक उपज ले सकते हैं। इफ्को नैनो डीएपी की लागत परंपरागत डीएपी से कम है। इसका दुष्प्रभाव नहीं है। यह पर्यावरण के अनुकूल है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि नैनो डीएपी पौधों को नाइट्रोजन एंव फास्फोरस प्रदान करता है। यह तरल पदार्थ है। इससे क्लोरोफिल चार्ज होती है। इसके इस्तेमाल से उच्च एवं गुणवत्तापूर्ण उपज होती हैं। रासायनिक उर्वरक उपयोग में कमी आती हैं। छोटी बोटल रखरखाव और परिवहन में आसानी प्रदान करती हैं। इफको नैनो डीएपी को तीन प्रमुख तरीके से उपयोग किया जा सकता हैं। इसका उपयोग बीजोपचार, जड़/कंद उपचार और पत्तों पर छिड़काव करके किया जा सकता है। बीजोपचार करने के लिए इफको नैनो डीएपी का 3-5 मिली प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपयोग करें। जड़ और कंद के उपचार के लिए इफको नैनो डीएपी का 3-5 मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से उपयोग करे। पत्तो पर छिड़काव फसल में 2 बार किया जा सकता हैं। पहला छिड़काव पत्ते आने की अवस्था में (जुताई का समय- शाखांए आने पर) 2-4 मिली प्रति लीटर पानी में और दूसरा छिड़काव फूल आने से पहले की अवस्था में करें।
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