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Rewari News: ट्रेड डील के विरोध में भड़के किसान, 30 अप्रैल को बड़े आंदोलन का ऐलान
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किसान भवन में बैठक करते किसान नेता। स्रोत: यूनियन
रेवाड़ी। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) की जिलास्तरीय बैठक किसान भवन में आयोजित की गई। बैठक में यूनियन पदाधिकारियों ने भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील को लेकर गहरी चिंता जताई और इसे किसान, मजदूर व व्यापारियों के हितों के खिलाफ बताया।
जिला प्रधान समय सिंह ने इस समझौते की निंदा करते हुए चेतावनी दी कि यदि यह ट्रेड डील रद्द नहीं की गई तो किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने 30 अप्रैल को रेवाड़ी में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इस दौरान उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।
यूनियन के नेताओं का कहना है कि इस डील से देश के कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान हो सकता है। अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पाद आटा, सोयाबीन, चावल और गेहूं भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर बेचे जाएंगे जिससे स्थानीय किसानों को नुकसान झेलना पड़ेगा।
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उन्होंने आशंका जताई कि यह नीति लंबे समय में भारतीय कृषि व्यवस्था को कमजोर कर सकती है। यह भी कहा कि विदेशी पशुधन के आने से डेयरी सेक्टर पर भी असर पड़ेगा। अमेरिका का पशुधन अधिक उत्पादन क्षमता वाला है जिससे स्थानीय पशुपालकों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
बैठक में बारिश से सरसों की फसल को हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया गया। उनका कहना है कि फसल का रंग खराब होने के कारण मंडियों में सरसों के भाव गिर गए हैं और कलर फेड के नाम पर ट्रैक्टर वापस लौटाए जा रहे हैं।
यूनियन ने सरकार से क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने की मांग दोहराई। इस बैठक में राजेंद्र कुमार गेरा, ओपी लोहाणा, रोशन लाल, शीशराम, महिला जिला प्रधान मुन्नी बुढ़पुर, मनीषा यादव, विपिन गंगायचा, मोनिका, अनूप राव, राजकुमार, कुलदीप सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
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जिला प्रधान समय सिंह ने इस समझौते की निंदा करते हुए चेतावनी दी कि यदि यह ट्रेड डील रद्द नहीं की गई तो किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने 30 अप्रैल को रेवाड़ी में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इस दौरान उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।
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यूनियन के नेताओं का कहना है कि इस डील से देश के कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान हो सकता है। अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पाद आटा, सोयाबीन, चावल और गेहूं भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर बेचे जाएंगे जिससे स्थानीय किसानों को नुकसान झेलना पड़ेगा।
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उन्होंने आशंका जताई कि यह नीति लंबे समय में भारतीय कृषि व्यवस्था को कमजोर कर सकती है। यह भी कहा कि विदेशी पशुधन के आने से डेयरी सेक्टर पर भी असर पड़ेगा। अमेरिका का पशुधन अधिक उत्पादन क्षमता वाला है जिससे स्थानीय पशुपालकों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
बैठक में बारिश से सरसों की फसल को हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया गया। उनका कहना है कि फसल का रंग खराब होने के कारण मंडियों में सरसों के भाव गिर गए हैं और कलर फेड के नाम पर ट्रैक्टर वापस लौटाए जा रहे हैं।
यूनियन ने सरकार से क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने की मांग दोहराई। इस बैठक में राजेंद्र कुमार गेरा, ओपी लोहाणा, रोशन लाल, शीशराम, महिला जिला प्रधान मुन्नी बुढ़पुर, मनीषा यादव, विपिन गंगायचा, मोनिका, अनूप राव, राजकुमार, कुलदीप सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।