{"_id":"76751df3bc6934985099d61d2494efe4","slug":"facilities-is-not-available-in-hospital-from-swain-flu-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नागरिक अस्पताल में स्वाइन फ्लू से जांच की सुविधा नहीं ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नागरिक अस्पताल में स्वाइन फ्लू से जांच की सुविधा नहीं
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
Updated Thu, 21 Jan 2016 12:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वाइल फ्लू वायरस से निपटने के लिए नागरिक अस्पताल में आवश्यक उपकरण का अभाव है। इससे जहां मरीज को परेशानी हो रही है वहीं उनको निजी लैब में टेस्ट कराने के लिए मनमानी फीस अदा करनी पड़ रही है। लोगों ने अस्पताल प्रशासन से स्वाइन फ्लू से जांच की सुविधा दुरुस्त कराने की मां की है।
जानकारी के अनुसार जिले में पिछले कई दिनों से कड़ाके की ठंड पड़ भी रही है। इसके साथ खांसी-जुकाम सहित विभिन्न प्रकार के फ्लू से पीड़ित अस्पताल पहुंच भी रहे हैं। स्वाइन फ्लू व अन्य साधारण फ्लू के लक्षण लगभग एक जैसे होते हैं, जिसके चलते स्वाइन फ्लू मरीज की पहचान करने के लिए उसका टेस्ट करना होता है।
जिसका खर्चा लगभग पांच से छह हजार होता है। इधर स्वाइन फ्लू का कहर सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं होता है। लेकिन विडंबना देखिए कि इस बीमारी के टेस्ट करने तक की सुविधा नागरिक अस्पताल में नहीं है।
विज्ञापन
नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों का दावा है कि अस्पताल में अभी तक कोई स्वाइन का मामला नहीं आया है। इधर एक चिकित्सक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि अस्पताल में प्रति दिन दो से तीन मामले आ रहे हैं, लेकिन जांच की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें बाहर जांच के लिए भेज दिया जाता है।
--------------------------
बाहर देने पड़ते पांच से छह हजार
नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या बढ़ी तो प्रतिदिन की ओपीडी भी हजारों की संख्या में पहुंच गई। लेकिन जब अस्पताल में किसी रोग की जांच करने तक की सुविधा नहीं हो तो उस स्थिति में चिकित्सकों के पास मरीजों को बाहर भेजने के अलावा कोई चारा नहीं है। यही हाल ठंड में पनपने वाले स्वाइन फ्लू वायरस से प्रभावित रोगियों का है। किसी बीमारी के उपचार से पहले उसके लक्षणों के साथ उसकी जांच की जाती है, लेकिन रेवाड़ी नागरिक अस्पताल में स्वाइन फ्लू से प्रभावित आने वाले मरीजों को जांच सुविधा के अभाव के कारण बैरंग लौटना पड़ता है और निजी लैब में जाकर पांच से छह हजार देकर टेस्ट कराने को मजबूर होना पड़ता है।
-----------------
गर्भवती महिलाएं होती हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित
एक ओर सरकार गर्भवती महिलाओं की देखरेख के लिए करोड़ों रुपये का बजट खर्च करती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के जिन लोगों की रोग रोधक क्षमता अर्थात इम्युनिटी कम होती है, वह स्वाइन फ्लू के प्रभाव में सबसे ज्यादा आते हैं। चिकित्सकों का मानना है कि महिला के गर्भवती होने के कारण उसकी रोध रोधक क्षमता बहुत कम हो जाती है, इसलिए यह महिलाएं स्वाइन फ्लू की चपेट में सबसे ज्यादा आती हैं। वहीं एक रिपोर्ट के अनुसार जहां स्वाइन फ्लू से प्रभावित अन्य लोगों की मौत पांच फीसदी होती है, वहीं गर्भवती महिलाओं में यह आंकडा नब्बे फीसदी तक पहुंच सकता है।
------------------
लक्षण और बचाव...
स्वाइन फ्लू वायरस ठंड में पनपने वाला वायरस है। राजस्थान एवं गुजरात में इसके रोगी अधिक संख्या में पाए जाते हैं। सामान्य फ्लू की तरह स्वाइन फ्लू में भी रोगी को खांसी-जुकाम व सर दर्द जैसे लक्षण पाए जाते हैं। इधर स्वाइन फ्लू पीड़ित लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। वहीं पांच साल तक बच्चे व 65 साल से ऊपर के बूढ़े भी इसकी चपेट में इम्युनिटी कम होने के चलते जल्दी आ जाते हैं। लेकिन स्वाइन फ्लू का पता इसकी जांच करने के बाद ही पता चलता है। स्वाइन फ्लू से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि भीड़भाड़ वाली जगहों पर अपने मुहं पर मास्क लगा कर जाएं, वहीं खांसी-जुकाम जैसे लक्षणों को देखते ही चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
------------------------------
वर्जन-स्वाइन फ्लू के प्रभाव में सबसे पहले गर्भवती महिलाओं के साथ पांच साल के बच्चे एवं बुजुर्ग आते हैं। लक्ष्ण दिखने पर चिकित्सक की सलाह जरूर लें, ताकि समय पर उपचार हो पाए।
-डॉ. विजयपाल यादव, फिजीशियन, नागरिक अस्पताल
------------------
स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए अलग वार्ड बनाकर चार चिकित्सकों की रेपिड रेसपोंस टीम बना दी गई है। जहां तक जांच की बात है उसके लिए अस्पताल अपने खर्च पर पीड़ित का टेस्ट गुड़गांव से कराऐगा।
-डॉ. जेके सैनी, नोडल अधिकारी, स्वाइन फ्लू
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार जिले में पिछले कई दिनों से कड़ाके की ठंड पड़ भी रही है। इसके साथ खांसी-जुकाम सहित विभिन्न प्रकार के फ्लू से पीड़ित अस्पताल पहुंच भी रहे हैं। स्वाइन फ्लू व अन्य साधारण फ्लू के लक्षण लगभग एक जैसे होते हैं, जिसके चलते स्वाइन फ्लू मरीज की पहचान करने के लिए उसका टेस्ट करना होता है।
विज्ञापन
जिसका खर्चा लगभग पांच से छह हजार होता है। इधर स्वाइन फ्लू का कहर सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं होता है। लेकिन विडंबना देखिए कि इस बीमारी के टेस्ट करने तक की सुविधा नागरिक अस्पताल में नहीं है।
विज्ञापन
नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों का दावा है कि अस्पताल में अभी तक कोई स्वाइन का मामला नहीं आया है। इधर एक चिकित्सक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि अस्पताल में प्रति दिन दो से तीन मामले आ रहे हैं, लेकिन जांच की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें बाहर जांच के लिए भेज दिया जाता है।
--------------------------
बाहर देने पड़ते पांच से छह हजार
नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या बढ़ी तो प्रतिदिन की ओपीडी भी हजारों की संख्या में पहुंच गई। लेकिन जब अस्पताल में किसी रोग की जांच करने तक की सुविधा नहीं हो तो उस स्थिति में चिकित्सकों के पास मरीजों को बाहर भेजने के अलावा कोई चारा नहीं है। यही हाल ठंड में पनपने वाले स्वाइन फ्लू वायरस से प्रभावित रोगियों का है। किसी बीमारी के उपचार से पहले उसके लक्षणों के साथ उसकी जांच की जाती है, लेकिन रेवाड़ी नागरिक अस्पताल में स्वाइन फ्लू से प्रभावित आने वाले मरीजों को जांच सुविधा के अभाव के कारण बैरंग लौटना पड़ता है और निजी लैब में जाकर पांच से छह हजार देकर टेस्ट कराने को मजबूर होना पड़ता है।
-----------------
गर्भवती महिलाएं होती हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित
एक ओर सरकार गर्भवती महिलाओं की देखरेख के लिए करोड़ों रुपये का बजट खर्च करती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के जिन लोगों की रोग रोधक क्षमता अर्थात इम्युनिटी कम होती है, वह स्वाइन फ्लू के प्रभाव में सबसे ज्यादा आते हैं। चिकित्सकों का मानना है कि महिला के गर्भवती होने के कारण उसकी रोध रोधक क्षमता बहुत कम हो जाती है, इसलिए यह महिलाएं स्वाइन फ्लू की चपेट में सबसे ज्यादा आती हैं। वहीं एक रिपोर्ट के अनुसार जहां स्वाइन फ्लू से प्रभावित अन्य लोगों की मौत पांच फीसदी होती है, वहीं गर्भवती महिलाओं में यह आंकडा नब्बे फीसदी तक पहुंच सकता है।
------------------
लक्षण और बचाव...
स्वाइन फ्लू वायरस ठंड में पनपने वाला वायरस है। राजस्थान एवं गुजरात में इसके रोगी अधिक संख्या में पाए जाते हैं। सामान्य फ्लू की तरह स्वाइन फ्लू में भी रोगी को खांसी-जुकाम व सर दर्द जैसे लक्षण पाए जाते हैं। इधर स्वाइन फ्लू पीड़ित लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। वहीं पांच साल तक बच्चे व 65 साल से ऊपर के बूढ़े भी इसकी चपेट में इम्युनिटी कम होने के चलते जल्दी आ जाते हैं। लेकिन स्वाइन फ्लू का पता इसकी जांच करने के बाद ही पता चलता है। स्वाइन फ्लू से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि भीड़भाड़ वाली जगहों पर अपने मुहं पर मास्क लगा कर जाएं, वहीं खांसी-जुकाम जैसे लक्षणों को देखते ही चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
------------------------------
वर्जन-स्वाइन फ्लू के प्रभाव में सबसे पहले गर्भवती महिलाओं के साथ पांच साल के बच्चे एवं बुजुर्ग आते हैं। लक्ष्ण दिखने पर चिकित्सक की सलाह जरूर लें, ताकि समय पर उपचार हो पाए।
-डॉ. विजयपाल यादव, फिजीशियन, नागरिक अस्पताल
------------------
स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए अलग वार्ड बनाकर चार चिकित्सकों की रेपिड रेसपोंस टीम बना दी गई है। जहां तक जांच की बात है उसके लिए अस्पताल अपने खर्च पर पीड़ित का टेस्ट गुड़गांव से कराऐगा।
-डॉ. जेके सैनी, नोडल अधिकारी, स्वाइन फ्लू