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60 लाख रुपये खर्च कर लगाए सोलर ऊर्जा से संचालित 9 भूमिगत डस्टबिन हुए खराब
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6 शहर में सफाई व्यवस्था को स्मार्ट सिटी की तर्ज पर दुरुस्त करने के लिए नगर परिषद की ओर से करीब एक साल पहले शहर के विभिन्न मुख्य चौक-चौराहों पर सोलर ऊर्जा से संचालित भूमिगत हाईड्रोलिक कूड़ादान करीब 60 लाख रुपये खर्च कर लगाए गए थे। 6 महीने तक तो इन डस्टबिन की सुध किसी ने नहीं ली, बाद में इक्का-दुक्का चले वह भी अब खराब हो गए हैं। ऐसे में सवाल है कि आखिर लाखों रुपये की लागत से लगाए गए डस्टबिन ठीक से चलने से पहले ही खराब क्यों हो गए, इसका जिम्मेदार कौन है।
जानकारी के अनुसार शहर के जिला सचिवालय के पास, रेवाड़ी-बावल रोड स्थित आईओसी चौक, सेक्टर-4 राजीव नगर लिंक रोड सहित 9 स्थानों पर डस्टबिन लगाने का प्रस्ताव था। आईओसी चौक व सचिवालय के पास तो ये डस्टबिन दिखाई देते हैं, लेकिन शायद कचरे में ही दब गए हैं। क्योंकि राजीव नगर के पास तो कई महीनों तक आधुनिक डस्टबिन भूमिगत करने की बजाय कचरे के बीच में ही रखा गया है।
सुंदरता बढ़ाने के लिए कचरा बाहर न फैले इसलिए लगे थे डस्टबिन
नगर परिषद की ओर से अलग-अलग समय पर शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिए डस्टबिन लगाने का काम किया गया है। सांसद निधि से करीब 10 लाख रुपये की लागत से लगाए प्लास्टिक के डस्टबिन डेढ़ साल के अंदर कहां चले गए, किसी को नहीं पता। वहीं लोहे के कूड़ादानों से बाहर फैले कचरे से होने वाली हानियों को देखते हुए भूमिगत डस्टबिन लगाने का फैसला हुआ था, अब इन कूूड़ादानों की हालत भी कचरे जैसी ही हो गई है। इसका एक और लाभ था कि कचरा खाकर बेसहारा पशु बीमार नहीं पड़ेंगे।
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सफाई व्यवस्था पर हर माह एक करोड़ से ज्यादा खर्च.. सुधार बेहद कम
नगर परिषद की ओर से शहर के 31 वार्ड में डोर-डू-डोर कचरा कलेक्शन से लेकर झाडू़ लगवाने पर 1.17 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं, वहीं शहर की सड़कों पर डिवाइडर के दोनों तरफ जमा मिट्टी को सोखने के लिए डेढ़ करोड़ की मशीन के डीजल पर ही हर माह लाखों खर्च हो रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी हालात में ज्यादा सुधार नहीं है। शहर में 195 स्थायी व 190 सफाई कर्मचारी अनुबंध पर काम कर रहे हैं। प्रत्येक माह इनके वेतन पर ही 90 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे हैं। वहीं डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए निजी कंपनी को 27 लाख रुपये की पेमेंट की जाती है। बावजूद इसके शहर की सड़कों व गलियों में सफाई व्यवस्था पूर्व पार्षदों व अधिकारियों के घर तक सिमट कर रह जाती है।
जो खराब हैं उसे कराएंगे ठीक : सीएसआई
नगर परिषद के मुख्य सफाई निरीक्षक (सीएसआई) संदीप कुमार ने कहा कि मशीनों को चालू कर दिया गया था, यदि कोई मशीन खराब है तो उसको ठीक कराया जाएगा। लिंक रोड पर पर शुक्रवार को जांच कराई जाएगी। जहां पर सफाई कर्मचारी काम नहीं कर रहे हैं, लोग शिकायत दें कार्रवाई की जाएगी।
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जानकारी के अनुसार शहर के जिला सचिवालय के पास, रेवाड़ी-बावल रोड स्थित आईओसी चौक, सेक्टर-4 राजीव नगर लिंक रोड सहित 9 स्थानों पर डस्टबिन लगाने का प्रस्ताव था। आईओसी चौक व सचिवालय के पास तो ये डस्टबिन दिखाई देते हैं, लेकिन शायद कचरे में ही दब गए हैं। क्योंकि राजीव नगर के पास तो कई महीनों तक आधुनिक डस्टबिन भूमिगत करने की बजाय कचरे के बीच में ही रखा गया है।
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सुंदरता बढ़ाने के लिए कचरा बाहर न फैले इसलिए लगे थे डस्टबिन
नगर परिषद की ओर से अलग-अलग समय पर शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिए डस्टबिन लगाने का काम किया गया है। सांसद निधि से करीब 10 लाख रुपये की लागत से लगाए प्लास्टिक के डस्टबिन डेढ़ साल के अंदर कहां चले गए, किसी को नहीं पता। वहीं लोहे के कूड़ादानों से बाहर फैले कचरे से होने वाली हानियों को देखते हुए भूमिगत डस्टबिन लगाने का फैसला हुआ था, अब इन कूूड़ादानों की हालत भी कचरे जैसी ही हो गई है। इसका एक और लाभ था कि कचरा खाकर बेसहारा पशु बीमार नहीं पड़ेंगे।
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सफाई व्यवस्था पर हर माह एक करोड़ से ज्यादा खर्च.. सुधार बेहद कम
नगर परिषद की ओर से शहर के 31 वार्ड में डोर-डू-डोर कचरा कलेक्शन से लेकर झाडू़ लगवाने पर 1.17 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं, वहीं शहर की सड़कों पर डिवाइडर के दोनों तरफ जमा मिट्टी को सोखने के लिए डेढ़ करोड़ की मशीन के डीजल पर ही हर माह लाखों खर्च हो रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी हालात में ज्यादा सुधार नहीं है। शहर में 195 स्थायी व 190 सफाई कर्मचारी अनुबंध पर काम कर रहे हैं। प्रत्येक माह इनके वेतन पर ही 90 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे हैं। वहीं डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए निजी कंपनी को 27 लाख रुपये की पेमेंट की जाती है। बावजूद इसके शहर की सड़कों व गलियों में सफाई व्यवस्था पूर्व पार्षदों व अधिकारियों के घर तक सिमट कर रह जाती है।
जो खराब हैं उसे कराएंगे ठीक : सीएसआई
नगर परिषद के मुख्य सफाई निरीक्षक (सीएसआई) संदीप कुमार ने कहा कि मशीनों को चालू कर दिया गया था, यदि कोई मशीन खराब है तो उसको ठीक कराया जाएगा। लिंक रोड पर पर शुक्रवार को जांच कराई जाएगी। जहां पर सफाई कर्मचारी काम नहीं कर रहे हैं, लोग शिकायत दें कार्रवाई की जाएगी।