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Rewari News: छात्राध्यापक का मूल्यांकन शिक्षक बनने की अहम कड़ी
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फोटो : 8मूल्यांकन कार्यक्रम के दौरान रजिस्ट्रेशन करवाते। स्रोत : विभाग
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) हुसैनपुर सहित जिले के कुल 28 स्वयं पोषित संस्थानों में डीएलएड प्रथम वर्ष (2024-26) एवं द्वितीय वर्ष (2023-25) के छात्राध्यापकों का विद्यालय अनुभव मूल्यांकन कार्यक्रम बुधवार को संपन्न हुआ।
वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. बीर सिंह ने बताया कि इस मूल्यांकन का उद्देश्य भावी शिक्षकों को विद्यालय की गतिविधियों, कक्षा संचालन, बच्चों की सीखने की प्रक्रिया, पाठ्यक्रम, विद्यालय रिकॉर्ड तथा फंड प्रबंधन जैसी बारीकियों से जोड़ना है। उन्होंने सभी संस्थानों के प्राचार्यों का सहयोग के लिए धन्यवाद किया और कहा कि छात्राध्यापकों का यह मूल्यांकन शिक्षक बनने की अहम कड़ी है।
वरिष्ठ प्राध्यापिका डॉ. सुनीता यादव ने जानकारी दी कि मूल्यांकन के दौरान विद्यार्थियों की पाठ योजनाएं, शिक्षक एवं सहकर्मी अवलोकन रिकॉर्ड, उपचारात्मक शिक्षण, पत्रिका लेखन, छात्र प्रोफाइल तथा क्रियात्मक अनुसंधान जैसी तैयारियों का आकलन किया गया।
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पीएसटीई विंग प्रभारी डॉ. विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि जिन छात्राध्यापकों की उपस्थिति 90 प्रतिशत से कम होगी, उन्हें वार्षिक प्रायोगिक परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
गौरतलब है कि 14 और 18 अगस्त को आयोजित उन्मुखीकरण कार्यक्रम के बाद छात्राध्यापकों को चार सप्ताह के लिए विभिन्न सरकारी व निजी विद्यालयों में विद्यालय अनुभव हेतु भेजा गया था। संख्या अधिक होने और सुविधाओं की दृष्टि से डाइट की ओर से वरिष्ठ व अनुभवी शिक्षकों की टीमें गठित कर मूल्यांकन कार्य कराया गया।
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वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. बीर सिंह ने बताया कि इस मूल्यांकन का उद्देश्य भावी शिक्षकों को विद्यालय की गतिविधियों, कक्षा संचालन, बच्चों की सीखने की प्रक्रिया, पाठ्यक्रम, विद्यालय रिकॉर्ड तथा फंड प्रबंधन जैसी बारीकियों से जोड़ना है। उन्होंने सभी संस्थानों के प्राचार्यों का सहयोग के लिए धन्यवाद किया और कहा कि छात्राध्यापकों का यह मूल्यांकन शिक्षक बनने की अहम कड़ी है।
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वरिष्ठ प्राध्यापिका डॉ. सुनीता यादव ने जानकारी दी कि मूल्यांकन के दौरान विद्यार्थियों की पाठ योजनाएं, शिक्षक एवं सहकर्मी अवलोकन रिकॉर्ड, उपचारात्मक शिक्षण, पत्रिका लेखन, छात्र प्रोफाइल तथा क्रियात्मक अनुसंधान जैसी तैयारियों का आकलन किया गया।
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पीएसटीई विंग प्रभारी डॉ. विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि जिन छात्राध्यापकों की उपस्थिति 90 प्रतिशत से कम होगी, उन्हें वार्षिक प्रायोगिक परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
गौरतलब है कि 14 और 18 अगस्त को आयोजित उन्मुखीकरण कार्यक्रम के बाद छात्राध्यापकों को चार सप्ताह के लिए विभिन्न सरकारी व निजी विद्यालयों में विद्यालय अनुभव हेतु भेजा गया था। संख्या अधिक होने और सुविधाओं की दृष्टि से डाइट की ओर से वरिष्ठ व अनुभवी शिक्षकों की टीमें गठित कर मूल्यांकन कार्य कराया गया।