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कुर्सी पर विवाद के बाद हुई विकास पर बात
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
Updated Tue, 09 Feb 2016 12:14 AM IST
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छह महीने बाद हुई नगर परिषद में हाउस की मीटिंग हंगामे के साथ शुरू हुई। नए सिटिंग प्लान को देखकर मीटिंग की शुरूआत में ही वार्ड पार्षद अशोक राव ने सिटिंग प्लान के हिसाब से अपनी सीट पीछे देखी तो भड़क उठे।
अनुभवी और पुराने पार्षद होने की बात कहते हुए आगे ही बैठने की बात पर अड़ गये। उधर, महिला पार्षद पूनम सतीजा और प्रमिला भार्गव ने इसका विरोध किया। इस पर पार्षद ओमप्रकाश सैनी भी पार्षद अशोक राव के विरोध में हो गए। इस बीच कई पार्षदों ने मीटिंग का वॉक आउट कर दिया।
हालांकि मान-मुनव्वल के बीच मीटिंग किसी तरह दोबारा शुरू हुई। बैठक की शुरूआत में हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एसडीएम कैप्टन मनोज कुमार को भी कहना पड़ा कि आप जनता के प्रतिनिधि हैं, लेट्स ग्रो अप। अगर मुझे जमीन पर भी बैठना पड़ेगा तो भी मैं एसडीएम ही रहूंगा।
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आखिर कुर्सी के विवाद को लेकर शुरू हुई यह अहम बैठक विकास के मुद्दों पर गहन मंथन के साथ समाप्त हुई। मीटिंग के दौरान उप प्रधान पवन बठला मौजूद नहीं थे। वहीं पार्षद गुरुदयाल नंबरदार, इंदरमुरली, पार्षद प्रेमलता सैनी, पार्षद गोपाल कर्दम, पार्षद अल्का मेहंदीरत्ता मौजूद नहीं थे। वहीं पार्षद बबीता बैठक की शुरूआत में ही चली गई थीं। जबकि पार्षद अमृतकला टिकानियां दोपहर 01:44 पर हाउस मीटिंग में पहुंचीं।
सोने के गिलास में पीते हैं चाय, यह क्या है
मीटिंग शुरू ही हुई थी कि चाय के दौरान डिस्पोजल देखकर पार्षद अशोक राव फिर भड़क उठे। गिलास दिखाते हुए बोले-सोने-चांदी के गिलास में चाय पीने वाले घर में पैदा हुए हैं, प्रधान जी ये क्या है। चीनी मिट्टी तक के कप नहीं हैं क्या। पैसा नहीं तो हम मंगवा दें। वहीं पिछली बार पांच पैसे के पेन की बात पर गौर करते हुए इस बार पहले की तुलना में ज्यादा अच्छा पैन एजेंडे की कॉपी के साथ दिये गए।
6 माह बाद मीटिंग में 6 काम की बात: सिरे चढ़ीं तो होगा शहर में विकास
1. अनुदान के 18 करोड़ रुपये: सभी वार्डों के पार्षद अपने क्षेत्र में विकास के लिए जरूरी कामों की लिस्ट बना सौंपेंगे। जिसके आधार पर विकास के लिए आई राशि कहां कितनी लगनी है, उसका निर्धारण होगा। ऐसे में एक साल से बंद पड़े काम फिर गति पकड़ सकते हैं।
2. 12 पब्लिक शौचालय: स्वच्छ भारत मिशन स्कीम के तहत नप क्षेत्र में ऐसी कालोनी जहां बाहर शौच के लिए जाना पड़ता है, वहां के लिए पब्लिक टॉयलेट बनाए जाएंगे। नई आबादी, तकिया सराय में ऐसे टॉयलेट होंगे। इसके अलावा नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क, जगन गेट, ऑटो मार्केट, बस स्टैैंड, आदि कुल 12 जगह चिह्नित हैं।
3. 8+5 हाईमास्ट लाइट: नप क्षेत्र के ऐसे एरिया जो बड़े चौराहे हैं और अंधेरे में हैं। वहां इस एजेंडे में शामिल 8 हाईमास्ट लाइट लगेंगी। इसके अलावा पहले से ही पास 5 हाईमास्ट लाइट भी संबंधित वार्डों में लगेंगी।
4. पार्क डवलपमेंट और निर्माण: अमृत योजना के तहत एक अन्य एजेंडे में क्षेत्र के 11 पार्कों का सौंदर्यीकरण करने और 11 ही नए पार्कों के निर्माण की योजना है। इसके अलावा वार्ड पार्षद विनीता पीपल ने नागरिक अस्पताल परिसर में खाली जगह का पार्क की तरह उपयोग कराने का सुझाव दिया। जिसे एसडीएम ने स्वीकार किया।
5. नो पार्किंग और पेड पार्किंग जोन: इसके अलावा शहर को अतिक्रमण मुक्त करने की कड़ी में बस अड्डा रोड, नाईवाली चौक, पुराना कोर्ट रोड को पूरी तरह नो पार्किंग जोन बनाये जाने का सुझाव रखा गया। वहीं पेड पार्किंग में महाराणा प्रताप ग्राउंड, शिव चौक से महाराणा प्रताप चौक रोड, कंप्यूटर मार्केट रोड को रखा गया है।
6. एलईडी व सीएफएल: स्ट्रीट लाइट्स पर एलईडी व सीएफएल सैट खरीदने पर कुछ पार्षदों ने पहले लगी लाइटों में दोयम दर्जे की क्वालिटी व सामान गायब होने की बात उठाई। इस पर नए माल के फिजिकल वेरिफिकेशन के एसडीएम के प्रस्ताव पर सहमति बन गई।लाइट लगने से शहर के कई इलाकों का अंधेरा दूर होगा।
मुद्दे: जो जरूरी पर रहे अधर में
धारा-35: नप प्रधान शकुंतला भांडोरिया के कार्यकाल में विशेष अधिकारों के तहत धारा-35 में हुए कामों पर अनुमोदन करने से पार्षदों ने मना कर दिया। पार्षदों ने कहा कि जो काम पहले ही हाउस की मीटिंग में रखे जाने थे, उसे दो साल तक क्यों नहीं दिखाया गया।
10 सालों की जांच: नगर परिषद में पिछले दो सालों के घोटालों की जांच पर लंबे समय से हायतौबा मची थी। एजेंडे में पिछले दस साल के कार्यकाल की जांच पर मौजूद लगभग सभी पार्षदों ने सहमति जताई।
करोड़ो की देनदारी: नगर परिषद की 2015-16 वित्तीय वर्ष में कुल देनदारी लगभग 60 करोड़ रुपये है। इनमें बिजली निगम को ही 58 करोड़ रुपये से ज्यादा अभी देना है। ऐेसे में इतना व्यय और आय के बीच सामंजस्य न होना भी योजनाओं को अधर में लटका रहा है।
कॉमर्शियल और रेजीडेंसियल नक्शे: एजेंडे में संलग्न पिछले और इस साल के प्रस्तावित रेजीडेंसियल और कॉमर्शियल नक्शों को लेकर भी बैठक में फाइनल डिसिजन नहीं हो सका। हालांकि एसडीएम ने कहा कि सभी रेजीडेंसियल नक्शों को फाइल उनके पास आने के बाद चेक कर अनुमोदित कर दिया जाएगा। लेकिन ये वो होंगे जिनकी सभी जरूरी फार्मेलिटी पूरी होंगी।
वर्जन
अपनी मौजूदगी में मीटिंग सही ढंग से कराने के साथ ही विकास के मुद्दों पर चर्चा करवाई गई है। उम्मीद है कि आगे भी भ्रष्टाचार मुक्त विकास कार्यों को ही मुद्दा बनाकर बैठक होगी।
-कैप्टन मनोज कुमार, एसडीएम, रेवाड़ी
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बैठक में बैठने को लेकर विवाद हुआ था। लेकिन इसे सुलझा लिया गया। लगभग सभी मुद्दों पर पार्षद एकमत रहे हैं। उम्मीद है कि विकास कार्यों पर काम शुरू हो सकेगा।
-शकुंतला भांडोरिया, प्रधान, नगर परिषद
बैठक महज खानापूर्ति, प्रोसीडिंग रजिस्टर तक में कुछ नहीं
छह महीने बाद भी हाउस की मीटिंग महज खानापूर्ति रही है। अधिकारियों ने पेपरवर्क तक पूरे नहीं कर रखे थे। प्रोसीडिंग रजिस्टर हाथों हाथ तैयार कर साइन कराए जाते हैं। जो नहीं हुआ। नियम में हो तो दस साल तक की जांच से इंकार नहीं है।
-पार्षद विजय राव, पूर्व प्रधान और नेता प्रतिपक्ष, नगर परिषद
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अनुभवी और पुराने पार्षद होने की बात कहते हुए आगे ही बैठने की बात पर अड़ गये। उधर, महिला पार्षद पूनम सतीजा और प्रमिला भार्गव ने इसका विरोध किया। इस पर पार्षद ओमप्रकाश सैनी भी पार्षद अशोक राव के विरोध में हो गए। इस बीच कई पार्षदों ने मीटिंग का वॉक आउट कर दिया।
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हालांकि मान-मुनव्वल के बीच मीटिंग किसी तरह दोबारा शुरू हुई। बैठक की शुरूआत में हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एसडीएम कैप्टन मनोज कुमार को भी कहना पड़ा कि आप जनता के प्रतिनिधि हैं, लेट्स ग्रो अप। अगर मुझे जमीन पर भी बैठना पड़ेगा तो भी मैं एसडीएम ही रहूंगा।
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आखिर कुर्सी के विवाद को लेकर शुरू हुई यह अहम बैठक विकास के मुद्दों पर गहन मंथन के साथ समाप्त हुई। मीटिंग के दौरान उप प्रधान पवन बठला मौजूद नहीं थे। वहीं पार्षद गुरुदयाल नंबरदार, इंदरमुरली, पार्षद प्रेमलता सैनी, पार्षद गोपाल कर्दम, पार्षद अल्का मेहंदीरत्ता मौजूद नहीं थे। वहीं पार्षद बबीता बैठक की शुरूआत में ही चली गई थीं। जबकि पार्षद अमृतकला टिकानियां दोपहर 01:44 पर हाउस मीटिंग में पहुंचीं।
सोने के गिलास में पीते हैं चाय, यह क्या है
मीटिंग शुरू ही हुई थी कि चाय के दौरान डिस्पोजल देखकर पार्षद अशोक राव फिर भड़क उठे। गिलास दिखाते हुए बोले-सोने-चांदी के गिलास में चाय पीने वाले घर में पैदा हुए हैं, प्रधान जी ये क्या है। चीनी मिट्टी तक के कप नहीं हैं क्या। पैसा नहीं तो हम मंगवा दें। वहीं पिछली बार पांच पैसे के पेन की बात पर गौर करते हुए इस बार पहले की तुलना में ज्यादा अच्छा पैन एजेंडे की कॉपी के साथ दिये गए।
6 माह बाद मीटिंग में 6 काम की बात: सिरे चढ़ीं तो होगा शहर में विकास
1. अनुदान के 18 करोड़ रुपये: सभी वार्डों के पार्षद अपने क्षेत्र में विकास के लिए जरूरी कामों की लिस्ट बना सौंपेंगे। जिसके आधार पर विकास के लिए आई राशि कहां कितनी लगनी है, उसका निर्धारण होगा। ऐसे में एक साल से बंद पड़े काम फिर गति पकड़ सकते हैं।
2. 12 पब्लिक शौचालय: स्वच्छ भारत मिशन स्कीम के तहत नप क्षेत्र में ऐसी कालोनी जहां बाहर शौच के लिए जाना पड़ता है, वहां के लिए पब्लिक टॉयलेट बनाए जाएंगे। नई आबादी, तकिया सराय में ऐसे टॉयलेट होंगे। इसके अलावा नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क, जगन गेट, ऑटो मार्केट, बस स्टैैंड, आदि कुल 12 जगह चिह्नित हैं।
3. 8+5 हाईमास्ट लाइट: नप क्षेत्र के ऐसे एरिया जो बड़े चौराहे हैं और अंधेरे में हैं। वहां इस एजेंडे में शामिल 8 हाईमास्ट लाइट लगेंगी। इसके अलावा पहले से ही पास 5 हाईमास्ट लाइट भी संबंधित वार्डों में लगेंगी।
4. पार्क डवलपमेंट और निर्माण: अमृत योजना के तहत एक अन्य एजेंडे में क्षेत्र के 11 पार्कों का सौंदर्यीकरण करने और 11 ही नए पार्कों के निर्माण की योजना है। इसके अलावा वार्ड पार्षद विनीता पीपल ने नागरिक अस्पताल परिसर में खाली जगह का पार्क की तरह उपयोग कराने का सुझाव दिया। जिसे एसडीएम ने स्वीकार किया।
5. नो पार्किंग और पेड पार्किंग जोन: इसके अलावा शहर को अतिक्रमण मुक्त करने की कड़ी में बस अड्डा रोड, नाईवाली चौक, पुराना कोर्ट रोड को पूरी तरह नो पार्किंग जोन बनाये जाने का सुझाव रखा गया। वहीं पेड पार्किंग में महाराणा प्रताप ग्राउंड, शिव चौक से महाराणा प्रताप चौक रोड, कंप्यूटर मार्केट रोड को रखा गया है।
6. एलईडी व सीएफएल: स्ट्रीट लाइट्स पर एलईडी व सीएफएल सैट खरीदने पर कुछ पार्षदों ने पहले लगी लाइटों में दोयम दर्जे की क्वालिटी व सामान गायब होने की बात उठाई। इस पर नए माल के फिजिकल वेरिफिकेशन के एसडीएम के प्रस्ताव पर सहमति बन गई।लाइट लगने से शहर के कई इलाकों का अंधेरा दूर होगा।
मुद्दे: जो जरूरी पर रहे अधर में
धारा-35: नप प्रधान शकुंतला भांडोरिया के कार्यकाल में विशेष अधिकारों के तहत धारा-35 में हुए कामों पर अनुमोदन करने से पार्षदों ने मना कर दिया। पार्षदों ने कहा कि जो काम पहले ही हाउस की मीटिंग में रखे जाने थे, उसे दो साल तक क्यों नहीं दिखाया गया।
10 सालों की जांच: नगर परिषद में पिछले दो सालों के घोटालों की जांच पर लंबे समय से हायतौबा मची थी। एजेंडे में पिछले दस साल के कार्यकाल की जांच पर मौजूद लगभग सभी पार्षदों ने सहमति जताई।
करोड़ो की देनदारी: नगर परिषद की 2015-16 वित्तीय वर्ष में कुल देनदारी लगभग 60 करोड़ रुपये है। इनमें बिजली निगम को ही 58 करोड़ रुपये से ज्यादा अभी देना है। ऐेसे में इतना व्यय और आय के बीच सामंजस्य न होना भी योजनाओं को अधर में लटका रहा है।
कॉमर्शियल और रेजीडेंसियल नक्शे: एजेंडे में संलग्न पिछले और इस साल के प्रस्तावित रेजीडेंसियल और कॉमर्शियल नक्शों को लेकर भी बैठक में फाइनल डिसिजन नहीं हो सका। हालांकि एसडीएम ने कहा कि सभी रेजीडेंसियल नक्शों को फाइल उनके पास आने के बाद चेक कर अनुमोदित कर दिया जाएगा। लेकिन ये वो होंगे जिनकी सभी जरूरी फार्मेलिटी पूरी होंगी।
वर्जन
अपनी मौजूदगी में मीटिंग सही ढंग से कराने के साथ ही विकास के मुद्दों पर चर्चा करवाई गई है। उम्मीद है कि आगे भी भ्रष्टाचार मुक्त विकास कार्यों को ही मुद्दा बनाकर बैठक होगी।
-कैप्टन मनोज कुमार, एसडीएम, रेवाड़ी
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बैठक में बैठने को लेकर विवाद हुआ था। लेकिन इसे सुलझा लिया गया। लगभग सभी मुद्दों पर पार्षद एकमत रहे हैं। उम्मीद है कि विकास कार्यों पर काम शुरू हो सकेगा।
-शकुंतला भांडोरिया, प्रधान, नगर परिषद
बैठक महज खानापूर्ति, प्रोसीडिंग रजिस्टर तक में कुछ नहीं
छह महीने बाद भी हाउस की मीटिंग महज खानापूर्ति रही है। अधिकारियों ने पेपरवर्क तक पूरे नहीं कर रखे थे। प्रोसीडिंग रजिस्टर हाथों हाथ तैयार कर साइन कराए जाते हैं। जो नहीं हुआ। नियम में हो तो दस साल तक की जांच से इंकार नहीं है।
-पार्षद विजय राव, पूर्व प्रधान और नेता प्रतिपक्ष, नगर परिषद