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Rewari News: धार्मिक स्थलों का पर्यटन स्थल के रूप में हो विकास
Wed, 05 Mar 2025 12:13 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 05 Mar 2025 12:13 AM IST
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फोटो: 13रेवाड़ी। पंचकूला में आयोजित पूर्व बजट परामर्श कार्यक्रम में भाग लेते रेवाड़ी विधायक
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। पंचकूला में बजट के पहले आयोजित परामर्श कार्यक्रम में रेवाड़ी विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ के धार्मिक व पौराणिक स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की। उन्होंने दोनों जिलों के ऐतिहासिक धरोहरों की प्रमाणिकता भी बताई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं है, जिससे न केवल इस वीर भूमि को पहचान मिलेगी बल्कि सरकार को भी राजस्व का बड़ा लाभ होगा।
रेवाड़ी विधायक ने बताया कि रेवाड़ी क्षेत्र में ऐतिहासिक बड़ा तालाब, सोलह राही, पुराने शहर को अपने अंदर बसाए हुए दिल्ली, जगन, भाड़ावास व गोकल गेटों, वैदिक काल की साक्षी साहबी नदी, भगवान कृष्ण के भाई दाऊ की ससुराल समेत अनेक स्थल हैं, जिनका बहुत पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व है। इन्हें पर्यटल स्थल के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने बताया कि सरस्वती और साहबी नदी के बीच का लगभग समस्त हरियाणा वेद उपनिषद काल का तात्कालिक ज्ञान का मुख्य केंद्र रहा है। यहां ऋषि वशिष्ठ, विश्वामित्र, दधीचि, मार्कन्डेय, गौतम, पराशर, जमदग्नि, परशुराम, कपिल, पिप्पलाद, उद्दालक, कहोड़, अष्टावक्र, वेदव्यास, दुर्वासा और च्यवन आदि ऋषियों के तपस्थल आश्रम या उपआश्रम रहे है। महेंद्रगढ़ में बाघोत का बाघेश्वर धाम, स्याणा का उद्दालक आश्रम और कुलताजपुर-ढोसी का च्यवन आश्रम वेद उपनिषद कालीन तीर्थस्थल हैं। इनका महत्व देश के अन्य बड़े तीर्थस्थलों की भांति धार्मिक और आस्था के केंद्र के रूप में रहा है।
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रेवाड़ी। पंचकूला में बजट के पहले आयोजित परामर्श कार्यक्रम में रेवाड़ी विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ के धार्मिक व पौराणिक स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की। उन्होंने दोनों जिलों के ऐतिहासिक धरोहरों की प्रमाणिकता भी बताई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं है, जिससे न केवल इस वीर भूमि को पहचान मिलेगी बल्कि सरकार को भी राजस्व का बड़ा लाभ होगा।
रेवाड़ी विधायक ने बताया कि रेवाड़ी क्षेत्र में ऐतिहासिक बड़ा तालाब, सोलह राही, पुराने शहर को अपने अंदर बसाए हुए दिल्ली, जगन, भाड़ावास व गोकल गेटों, वैदिक काल की साक्षी साहबी नदी, भगवान कृष्ण के भाई दाऊ की ससुराल समेत अनेक स्थल हैं, जिनका बहुत पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व है। इन्हें पर्यटल स्थल के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं।
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उन्होंने बताया कि सरस्वती और साहबी नदी के बीच का लगभग समस्त हरियाणा वेद उपनिषद काल का तात्कालिक ज्ञान का मुख्य केंद्र रहा है। यहां ऋषि वशिष्ठ, विश्वामित्र, दधीचि, मार्कन्डेय, गौतम, पराशर, जमदग्नि, परशुराम, कपिल, पिप्पलाद, उद्दालक, कहोड़, अष्टावक्र, वेदव्यास, दुर्वासा और च्यवन आदि ऋषियों के तपस्थल आश्रम या उपआश्रम रहे है। महेंद्रगढ़ में बाघोत का बाघेश्वर धाम, स्याणा का उद्दालक आश्रम और कुलताजपुर-ढोसी का च्यवन आश्रम वेद उपनिषद कालीन तीर्थस्थल हैं। इनका महत्व देश के अन्य बड़े तीर्थस्थलों की भांति धार्मिक और आस्था के केंद्र के रूप में रहा है।
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