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Rewari News: सिविल अस्पताल के डेंटल विभाग में संसाधनों की कमी से हो रही परेशानी
Sun, 02 Mar 2025 01:05 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 02 Mar 2025 01:05 AM IST
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फोटो: 21रेवाड़ी। नागरिक अस्पताल में रेवाड़ी। संवाद
- फोटो : udhampur
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। सिविल अस्पताल की डेंटल ओपीडी में उपकरणों की कमी से मरीजों को परेशानी होती है। डेंटल ओपीडी में चार 4 डेंटल सर्जन है, लेकिन डेंटल चेयर सिर्फ दो हैं। यहां पर प्रतिदिन करीब 150 ओपीडी होती है। डेंटल चेयर कम होने से मरीजों को आरसीटी और फिलिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है।
डेंटर चेयर की कमी के चलते आरसीटी और फिलिंग के लिए एक-दो दिन बाद की तारीख मिलती है। इस प्रोसेस में करीब आधे घंटे का समय लगता है, जिससे एक दिन में ज्यादा की आरसीटी नहीं कर सकते हैं। इस कारण अगले दिन की तारीख मिल रही है। मरीजों ने कहा कि यहां पर डेंटल चेयर की संख्या बढ़नी चाहिए, ताकि समय पर उपचार हो सके।
यहां पर दांत इंप्लांट की भी सुविधा नहीं है। क्योंकि मशीनों का अभाव है। ओपीडी के दौरान इंप्लांट वाले पीड़ित भी आते हैं, लेकिन उपकरण न होने से उनको हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में बहुत से लोगों को निजी अस्पतालों में उपचार कराना पड़ता है, जो महंगा होता है। बाहर दांत इंप्लांट कराने पर कम से कम 20 हजार रुपये खर्च होते हैं। अगर अस्पताल में यह सुविधा मिले तो न्यूनतम दर पर यह इलाज करवाया जा सकता है।
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यहां पर डेंटल की ओपीडी एक दिन में 150 के लगभग है। अभी डेंटल चेयर दो होने के कारण काफी मरीजों को दवाई देकर ही भेज दिया जाता है।जिन्हें अधिक जरूरत होती है, उनकी ही आरसीटी व फिलिंग की जाती है। चेयर बढ़ने पर ही इनकी संख्या बढ़ सकती है। एक दिन में 4 से ज्यादा आरसीटी व 10 से ज्यादा फिलिंग होती है।
ऑर्थोडॉन्टिक क्लीनिक भी नहीं
दांतों को सीधा करने या हिलाने का तरीका ऑर्थोडॉन्टिक उपचार कहलाता है। इस उपचार में ब्रेसिज, विलयर एलाइनर और रिटेनर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल होता है। इस उपचार की जरूरत तब पड़ती है, जब आपके दांत टेढ़े, ओवरलैप, मुड़े हुए या गैप वाले हैं तो डेंटिस्ट इस उपचार की सलाह देते हैं। इस उपचार से दांतों की बनावट और काम करने के तरीके में सुधार होता है। दांतों, मसूड़ों और जबड़े के जोड़ों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। फिलहाल यह उपचार उपलब्ध न होने से बाहर इसमें लगभग 30 हजार रुपये का खर्चा लगता है। सरकारी में शुरू हो जाए तो इसमें कम पैसे में यह उपचार हो सकता है।
पिछले दिनों निदेशक ने किया था निरीक्षण
कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग हरियाणा के निदेशक (डेंटल) ने भी सिविल अस्पताल में डेंटल ओपीडी का निरीक्षण किया था। इस दौरान सभी जगह ओपीडी सर्विस बढ़ाने के साथ ही सिविल अस्पताल में ऑर्थोडान्टिक क्लीनिक और दंत इंप्लांट सेंटर के लिए प्रोसेस शुरू करने के निर्देश दिए थे। ऐसे में निकट भविष्य में ये दोनों उपचार पीड़ितों को सिविल अस्पताल में मिल सकता है। फिलहाल इनके लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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वर्जन:
अभी दो डेंटल चेयर और दंतक इंप्लांट व ऑर्थोडान्टिक क्लीनिक के लिए जरूरी उपकरणों की डिमांड भेजी गई है। उम्मीद है कि जल्द ये मिल सकती है। इससे ज्यादा लोग फायदा उठा सकेंगे।- डॉ. समीम अलि, डेंटल सर्जन, सिविल अस्पताल
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रेवाड़ी। सिविल अस्पताल की डेंटल ओपीडी में उपकरणों की कमी से मरीजों को परेशानी होती है। डेंटल ओपीडी में चार 4 डेंटल सर्जन है, लेकिन डेंटल चेयर सिर्फ दो हैं। यहां पर प्रतिदिन करीब 150 ओपीडी होती है। डेंटल चेयर कम होने से मरीजों को आरसीटी और फिलिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है।
डेंटर चेयर की कमी के चलते आरसीटी और फिलिंग के लिए एक-दो दिन बाद की तारीख मिलती है। इस प्रोसेस में करीब आधे घंटे का समय लगता है, जिससे एक दिन में ज्यादा की आरसीटी नहीं कर सकते हैं। इस कारण अगले दिन की तारीख मिल रही है। मरीजों ने कहा कि यहां पर डेंटल चेयर की संख्या बढ़नी चाहिए, ताकि समय पर उपचार हो सके।
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यहां पर दांत इंप्लांट की भी सुविधा नहीं है। क्योंकि मशीनों का अभाव है। ओपीडी के दौरान इंप्लांट वाले पीड़ित भी आते हैं, लेकिन उपकरण न होने से उनको हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में बहुत से लोगों को निजी अस्पतालों में उपचार कराना पड़ता है, जो महंगा होता है। बाहर दांत इंप्लांट कराने पर कम से कम 20 हजार रुपये खर्च होते हैं। अगर अस्पताल में यह सुविधा मिले तो न्यूनतम दर पर यह इलाज करवाया जा सकता है।
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यहां पर डेंटल की ओपीडी एक दिन में 150 के लगभग है। अभी डेंटल चेयर दो होने के कारण काफी मरीजों को दवाई देकर ही भेज दिया जाता है।जिन्हें अधिक जरूरत होती है, उनकी ही आरसीटी व फिलिंग की जाती है। चेयर बढ़ने पर ही इनकी संख्या बढ़ सकती है। एक दिन में 4 से ज्यादा आरसीटी व 10 से ज्यादा फिलिंग होती है।
ऑर्थोडॉन्टिक क्लीनिक भी नहीं
दांतों को सीधा करने या हिलाने का तरीका ऑर्थोडॉन्टिक उपचार कहलाता है। इस उपचार में ब्रेसिज, विलयर एलाइनर और रिटेनर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल होता है। इस उपचार की जरूरत तब पड़ती है, जब आपके दांत टेढ़े, ओवरलैप, मुड़े हुए या गैप वाले हैं तो डेंटिस्ट इस उपचार की सलाह देते हैं। इस उपचार से दांतों की बनावट और काम करने के तरीके में सुधार होता है। दांतों, मसूड़ों और जबड़े के जोड़ों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। फिलहाल यह उपचार उपलब्ध न होने से बाहर इसमें लगभग 30 हजार रुपये का खर्चा लगता है। सरकारी में शुरू हो जाए तो इसमें कम पैसे में यह उपचार हो सकता है।
पिछले दिनों निदेशक ने किया था निरीक्षण
कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग हरियाणा के निदेशक (डेंटल) ने भी सिविल अस्पताल में डेंटल ओपीडी का निरीक्षण किया था। इस दौरान सभी जगह ओपीडी सर्विस बढ़ाने के साथ ही सिविल अस्पताल में ऑर्थोडान्टिक क्लीनिक और दंत इंप्लांट सेंटर के लिए प्रोसेस शुरू करने के निर्देश दिए थे। ऐसे में निकट भविष्य में ये दोनों उपचार पीड़ितों को सिविल अस्पताल में मिल सकता है। फिलहाल इनके लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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वर्जन:
अभी दो डेंटल चेयर और दंतक इंप्लांट व ऑर्थोडान्टिक क्लीनिक के लिए जरूरी उपकरणों की डिमांड भेजी गई है। उम्मीद है कि जल्द ये मिल सकती है। इससे ज्यादा लोग फायदा उठा सकेंगे।- डॉ. समीम अलि, डेंटल सर्जन, सिविल अस्पताल