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लाला गांव का सामाजिक बहिष्कार

Fri, 22 Apr 2016 12:39 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
ब्यूरो /अमर उजाला Updated Fri, 22 Apr 2016 12:39 AM IST
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social bycott of lala village
स्कूल में बच्चे नही भेजेंगे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
कोसली। तीन दिन पहले एक गांव की नाबालिग छात्रा के अपहरण और दुष्कर्म के आरोपियों पर कार्रवाई करने और गांव में सरकारी स्कूल का दर्जा बढ़ाने की मांग को लेकर वीरवार को पंचायत हुई। पंचायत की अध्यक्षता अमर सिंह दहिया ने की। पंचायत में गांव लाला के सामाजिक बहिष्कार का निर्णय लेकर एकमत से भाईचारा खत्म करने पर सहमति हुई।
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पंचायत में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा से मिलकर स्कूल अपग्रेड कराने पर भी चर्चा हुई। साथ ही फैसला लिया गया कि यदि सरकार सुनवाई नहीं करती है तो ग्रामीण अपने खर्चे पर शिक्षा का प्रबंध करेंगे। पंचायत में पुरुषों के अलावा महिलाएं भी शामिल हुईं। गांव की सरपंच ने कहा कि इज्जत से खिलवाड़ नहीं होने देंगे। महिलाओं ने तो यहां तक कहा कि जो इज्जत पर हाथ डालेगा, उसका हाथ काट देंगे।
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गौरतलब है कि गांव में केवल प्राइमरी स्कूल होने के कारण पांचवीं के बाद कई गांवों के छात्र-छात्राओं को चार किलोमीटर दूर गांव लाला के सरकारी स्कूल में जाना पड़ता है। सोमवार को जब गांव की नौवीं की छात्रा सुबह स्कूल जा रही थी तो बीच रास्ते में गांव लाला के तीन युवकों ने अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद छात्रा को जाटूसाना स्थित सरकारी स्कूल के पास छोड़कर फरार हो गए। तीनों में से पुलिस ने एक आरोपी अनिल को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो आरोपी फरार हैं।  
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यह पहली घटना नहीं है: सरपंच
वीरवार को पंचायत की अध्यक्षता अमर सिंह दहिया ने की। उन्होंने कहा कि वे अपने बच्चों को गांव लाला के स्कूल में किसी कीमत पर नहीं भेजेंगे। सरकार से गांव में प्राइमरी स्कूल को अपग्रेड करने की मांग करते हैं, अगर सरकार ने उनकी मांग पर गौर नहीं किया तो गांव में अपने स्तर पर कन्याओं की शिक्षा का प्रबंध करेंगे। गांव लाला के स्कूल में बच्चे नही भेजेेंगे यह अंतिम फैसला है। गांव के सभी महिलाओं और पुरुषों ने एक मत से पंचायत के फैसले को मानने पर सहमति जताई।

पंचायत में कहा गया कि दूसरे गांव कतोपरी के बच्चों को भी लाला गांव का स्कूल नहीं भेजने के बारे में एक दो दिन में उनसे बातचीत की जाएगी। गांव के मास्टर विक्रम सिंह ने पंचायत में कहा कि यह हमारे बच्चों के साथ पहली घटना नहीं है कि इन्हें माफ कर दिया जाए। कई बार गांव लाला के असामाजिक तत्वों ने बच्चों को परेशान किया है।

प्रशासन ने उन्हें ही दबाया है। डीएसपी पूजा डाबला आकर चली गईं जबकि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। पंचायत में सरपंच उर्मिला ने कहा कि उनके गांव कि छोटी-छोटी बच्चियों के साथ यह पहली घटना नहीं है, कुछ बेटियां तो स्कूल छोड़ चुकी हैं। कुछ अपनी इज्जत के मारे नहीं बोल रही हैं जबकि हालात यह हैं कि गांव लाला के कुछ आवारा लोग स्कूल के समय रास्ते में बाइक लेकर खड़े हो जाते हैं। बच्चों पर ना केवल फब्तियां कसते हैं बल्कि छेड़छाड़ करने से भी नहीं हिचकते हैं।

वे अपनी बेटियों को अनपढ़ रख लेंगे लेकिन इज्जत से खिलवाड़ नहीं होने देंगे। ग्रामीण बीर सिंह ने कहा कि यदि पुलिस ने अन्य दो आरोपियों को जल्द गिरफ्तार नहीं किया तो इलाके की महापंचायत बुलाकर आंदोलन छेड़ दिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो वे मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे।

महिलाएं भी पंचायत में खुलकर बोलीं
महिला सुशीला ने कहा कि एक तरफ तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा की सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना चला रही है, लेकिन उनके यहां यह मात्र ढकोसला साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि छोटी छोटी बच्चियों के साथ अक्सर छेड़छाड़ की घटनाएं होती रहती हैं, मगर अब इस हादसे के बाद वे लड़कियों को स्कूल नहीं भेजेंगे, बेशक उन्हें अनपढ़ रखना पड़े।

बिमला ने कहा कि हम गरीब जरूर हैं लेकिन इज्जत नहीं बेच रखी। जो हमारी इज्जत पर हाथ डालेगा उसका हाथ काटना हम जानते हैं। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि गांव की बच्ची के साथ दुष्कर्म मामले में शामिल दो और आरोपी जल्द गिरफ्तार नही हुए तो वे प्रदर्शन करने को बाध्य होंगी।

कोट
आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। इसके लिए दो टीमें बनाकर भेजी गई हैं। इसके अलावा यदि गांव के बच्चे स्कूल आते हैं तो उनकी जिम्मेदारी पुलिस की होगी कि इस प्रकार की कोई घटना दोबारा न हो।     - जयचंद, थाना इंचार्ज


कोट
वे कल गांव में गये थे। गांव के लोगों में लाला गांव के उन लोगों के खिलाफ काफी गुस्सा है जो बार बार बच्चों के साथ इस प्रकार कि घिनौनी हरकत करते हैं। इस सारे मामले से आला अधिकारियों को भी अवगत करवा दिया है।   - धर्मवीर बल्डोदिया, जिला शिक्षा अधिकारी
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