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Rewari News: कॉलेजों में अब विद्यार्थियों की प्रगति और समस्याओं पर होगा चिंतन
Wed, 30 Oct 2024 12:31 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 30 Oct 2024 12:31 AM IST
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कोसली राजकीय महाविद्यालय।
रेवाड़ी। स्कूलों के तर्ज पर कॉलेजों में भी अभिभावक शिक्षक बैठक (पीटीएम) का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए उच्चतर शिक्षा विभाग ने कॉलेजों को आदेश जारी कर दिया है। कॉलेजों में प्रोफेसर अभिभावकों से विद्यार्थियों की प्रगति और समस्याओं पर चिंतन करेंगे।
वहीं महाविद्यालय अपने स्तर पर अभिभावकों और विद्यार्थियों का सेमिनार का आयोजन करेगा। इसमें विद्यार्थियों से जुड़ी विभिन्न शैक्षिक पहलुओं पर मंथन किया जाएगा। अभी तक केवल स्कूलों में अभिभावकों व शिक्षकों की बैठक होती थी, लेकिन अब कॉलेजों में भी यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
दरअसल स्कूलों से कॉलेज कई मामलों में भिन्न है। कॉलेज में आने के बाद विद्यार्थी के विचार परिपक्व हो जाते हैं और मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक और संवेगात्मक विकास भी कुछ हद तक हो जाता है। साथ ही तर्क एवं चिंतन शक्ति भी बढ़ जाती है। ऐसे में विद्यार्थी को औपचारिक एवं अनौपचारिक दोनों ही प्रकार की शिक्षा जरूरी होती है। इसलिए उनके बीच समय-समय पर समस्याओं पर विचार विमर्श होना जरूरी होता है।
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60 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य
बता दें कि कॉलेजों में विद्यार्थियों की औसतन उपस्थिति 60 प्रतिशत रहती है जोकि चिंता का विषय है। इसके कारण भी विद्यार्थियों के अभिभावकों से बात करना जरूरी हो गया है। बदलते परिवेश में अभिभावकों की सोच भी बदल रही है। अभिभावकों को यह लगता है कि बच्चे का दाखिले लेने के बाद उसे कॉलेज न भेज कर किसी कोचिंग संस्थान भेजें, ताकि बच्चा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सके। इन सभी बिंदुओं को देखते हुए उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने सभी कॉलेजों को निर्देश जारी किए हैं कि वे कॉलेजों में विद्यार्थियों की समस्याओं पर चिंतन करें।
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वर्जन
कॉलेज में सेमिनार से विद्यार्थियों की समस्याओं पर चिंतन किया जाएगा। इसमें अभिभावकों की भी उपस्थिति अनिवार्य होगी। इससे काफी फायदा होगा।- डॉ. विवेक कुमार, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय कोसली
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वहीं महाविद्यालय अपने स्तर पर अभिभावकों और विद्यार्थियों का सेमिनार का आयोजन करेगा। इसमें विद्यार्थियों से जुड़ी विभिन्न शैक्षिक पहलुओं पर मंथन किया जाएगा। अभी तक केवल स्कूलों में अभिभावकों व शिक्षकों की बैठक होती थी, लेकिन अब कॉलेजों में भी यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
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दरअसल स्कूलों से कॉलेज कई मामलों में भिन्न है। कॉलेज में आने के बाद विद्यार्थी के विचार परिपक्व हो जाते हैं और मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक और संवेगात्मक विकास भी कुछ हद तक हो जाता है। साथ ही तर्क एवं चिंतन शक्ति भी बढ़ जाती है। ऐसे में विद्यार्थी को औपचारिक एवं अनौपचारिक दोनों ही प्रकार की शिक्षा जरूरी होती है। इसलिए उनके बीच समय-समय पर समस्याओं पर विचार विमर्श होना जरूरी होता है।
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60 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य
बता दें कि कॉलेजों में विद्यार्थियों की औसतन उपस्थिति 60 प्रतिशत रहती है जोकि चिंता का विषय है। इसके कारण भी विद्यार्थियों के अभिभावकों से बात करना जरूरी हो गया है। बदलते परिवेश में अभिभावकों की सोच भी बदल रही है। अभिभावकों को यह लगता है कि बच्चे का दाखिले लेने के बाद उसे कॉलेज न भेज कर किसी कोचिंग संस्थान भेजें, ताकि बच्चा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सके। इन सभी बिंदुओं को देखते हुए उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने सभी कॉलेजों को निर्देश जारी किए हैं कि वे कॉलेजों में विद्यार्थियों की समस्याओं पर चिंतन करें।
वर्जन
कॉलेज में सेमिनार से विद्यार्थियों की समस्याओं पर चिंतन किया जाएगा। इसमें अभिभावकों की भी उपस्थिति अनिवार्य होगी। इससे काफी फायदा होगा।- डॉ. विवेक कुमार, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय कोसली