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देवोत्थान एकादशी से शुभ और मांगलिक कार्य होंगे शुरू

Tue, 01 Nov 2022 11:51 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 01 Nov 2022 11:51 PM IST
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Auspicious and auspicious work will start from Devotthan Ekadashi
रेवाड़ी। कार्तिक मास की देवोत्थान (देवउठनी) एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा का त्याग करते हैं। इसको देव प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस बार देवउठनी एकादशी का अबूझ सावा होने के कारण विवाह मुहूर्त शुरू हो जाएंगे।
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जानकारों का कहना है कि एकादशी के दिन बहुत कम विवाह मुहूर्त होंगे। इसकी वजह एकादशी के दिन भी शुक्र ग्रह का अस्त होना बताया गया है। इसलिए विवाह की शहनाई बजने के लिए लोगों को 29 दिन बाद तक इंतजार करना होगा। यानी मुहूर्त 2 दिसंबर से शुरू होंगे। दिसंबर में केवल 6 दिन ही विवाह मुहूर्त रहेंगे। इसके बाद लोगों को मकर संक्रांति तक इंतजार करना होगा। देवउठनी एकादशी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। यही कारण है कि कई लोग विवाह मुहूर्त नहीं होने के बावजूद भी इस दिन शादियां कर लेते हैं।
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ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार देव उठनी एकादशी के दिन भगवान शालिग्राम और तुलसी का विवाह कराया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा करने की परंपरा है, तुलसी भगवान विष्णु को अत्यधिक प्रिय है। इस दिन से विवाह संस्कार, यज्ञोपवीत, गृहप्रवेश आदि शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है।
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विवाह मुहूर्त 04 नवंबर अबूझ सावा व 28 नवंबर
दिसंबर 2,3,7,8,9 व 14 दिसंबर को अंतिम सावा होगा। फिर 16 दिसंबर से मकर संक्रांति रहेगा खरमास में विवाह वर्जित है। फिर मकर संक्रांति के बाद शुरु होंगे विवाह मुहूर्त।
8 नवंबर को वर्ष का अंतिम चंद्रग्रहण
महाविद्याक्षरा ज्योतिष संस्थान के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री ने बताया कि 8 नवंबर को चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा। चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले से मान्य होगा। सूतक में बालक, वृद्ध, रोगी को छोड़कर सभी लोगों के लिए भोजन निषिद्ध है।
गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतनी चाहिए
कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा मंगलवार खग्रास चंद्रग्रहण भारतीय समयानुसार 2:39 से शाम 6:19 तक होगा। लेकिन रेवाड़ी शहर में चंद्रोदय के साथ शाम 5:30 शुरू होगा चंद्रग्रहण मोक्ष शाम 6:19 पर होगा।

शास्त्री के अनुसार चंद्रग्रहण मेषराशि भरणी नक्षत्र में होने वाला है। इसलिए इन राशि नक्षत्र वाले जातकों को हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुंदरकांड, महामृत्युंजय मंत्र आदि का जप करना चाहिए। ग्रहणकाल में जपा गया मंत्र सिद्धप्रद होता है। धर्म शास्त्रीय बचनों अनुसार धार्मिक कृत्य दान आदि करना चाहिए।
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