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Rewari News: धान के अवशेषों को मिट्टी में मिलाने पर 1200 रुपये मिलेगी प्रोत्साहन राशि, जलाई तो कार्रवाई होगी
Sat, 24 Oct 2026 11:17 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 24 Oct 2026 11:17 PM IST
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रेवाड़ी। फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत धान की फसल कटाई उपरांत धान फसल अवशेषों को मशीनों की सहायता से मिट्टी में मिलाने पर किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करवाई जाएगी। प्रोत्साहन राशि को प्राप्त करने के लिए किसानों का मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण होना अनिवार्य है।
डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं की निगरानी एवं रोकथाम के लिए जिला स्तर, ब्लॉक स्तर एवं गांव स्तर पर टीमें गठित की गई है।
यदि कोई किसान पराली जलाता हुआ पाया जाता है या उसके खेत में पराली जलने की घटना पाई जाती है तो राष्ट्रीय हरित अधिकरण के द्वारा जारी निर्देशों के तहत कार्रवाई की जाएगी व इसके अतिरिक्त मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर भूमि रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज की जाएगी।
उन्होंने बताया कि रेवाड़ी में 132 गांवों में किसानों द्वारा धान की फसल बोई गई है तथा इन गांवों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए है।
उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि कोई भी किसान खेतों में पराली न जलाए व इसके लिए दूसरे किसानों को भी जागरूक करें। खेतों में पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है जिससे सांस व फेफड़ों से संबंधित बीमारियां होती है।
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खेतों में आग लगाने से खेतों में छोटे-छोटे कणों से पीएम 2.5 का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है। इससे सिर दर्द व सांस लेने में तकलीफ होती है। सहायक कृषि अभियंता दिनेश शर्मा ने बताया कि किसान सुपर सीडर, रिर्वसीबल एम बी प्लाउ, जीरो टिल सीड ड्रिल, रोटावेटर व हैरो आदि कृषि यंत्रों की सहायता से धान की फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाएं।
उन्होंने बताया कि गांव के संबंधित नोडल अधिकारी द्वारा किसान के खेत का विभागीय मोबाइल एप द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन का सत्यापन किया जाएगा, इसके उपरांत मुख्यालय द्वारा किसानों के बैंक खातों में 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि सीधे डाल दी जाएगी।
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डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं की निगरानी एवं रोकथाम के लिए जिला स्तर, ब्लॉक स्तर एवं गांव स्तर पर टीमें गठित की गई है।
यदि कोई किसान पराली जलाता हुआ पाया जाता है या उसके खेत में पराली जलने की घटना पाई जाती है तो राष्ट्रीय हरित अधिकरण के द्वारा जारी निर्देशों के तहत कार्रवाई की जाएगी व इसके अतिरिक्त मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर भूमि रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज की जाएगी।
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उन्होंने बताया कि रेवाड़ी में 132 गांवों में किसानों द्वारा धान की फसल बोई गई है तथा इन गांवों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए है।
उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि कोई भी किसान खेतों में पराली न जलाए व इसके लिए दूसरे किसानों को भी जागरूक करें। खेतों में पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है जिससे सांस व फेफड़ों से संबंधित बीमारियां होती है।
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खेतों में आग लगाने से खेतों में छोटे-छोटे कणों से पीएम 2.5 का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है। इससे सिर दर्द व सांस लेने में तकलीफ होती है। सहायक कृषि अभियंता दिनेश शर्मा ने बताया कि किसान सुपर सीडर, रिर्वसीबल एम बी प्लाउ, जीरो टिल सीड ड्रिल, रोटावेटर व हैरो आदि कृषि यंत्रों की सहायता से धान की फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाएं।
उन्होंने बताया कि गांव के संबंधित नोडल अधिकारी द्वारा किसान के खेत का विभागीय मोबाइल एप द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन का सत्यापन किया जाएगा, इसके उपरांत मुख्यालय द्वारा किसानों के बैंक खातों में 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि सीधे डाल दी जाएगी।