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Rewari News: निजी स्कूलों में एडमिशन जेब पर भारी, फीस पर नहीं कोई नियंत्रण
Sun, 29 Mar 2026 02:56 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 29 Mar 2026 02:56 AM IST
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अभिभावक बिजेंद्र यादव
रेवाड़ी। जिले के निजी स्कूलों की मनमानी फीस और एडमिशन प्रक्रिया अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रही है। नए सत्र में एडमिशन के नाम पर हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं। री-एडमिशन के नाम पर हर साल अतिरिक्त शुल्क लेकर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। फीस पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है।
अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल 10 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक एडमिशन फीस, डेवलपमेंट चार्ज और अन्य वसूल रहे हैं। इसके साथ ही ट्यूशन फीस, बस शुल्क, किताबें और यूनिफॉर्म का खर्च अलग से देना पड़ता है। ऐसे में मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट बिगड़ रहा है।
अभिभावकों के मुताबिक स्कूल प्रबंधन बिना किसी निर्धारित प्रक्रिया के हर साल फीस बढ़ा देते हैं और री-एडमिशन को अनिवार्य कर देते हैं। बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए अभिभावकों को मजबूरी में यह राशि चुकानी पड़ती है। शिक्षा विभाग के नियमानुसार फीस बढ़ाने से पहले स्कूलों को सूचित करना होता है, लेकिन ऐसा है नहीं है।
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अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण लगाया जाए और मनमानी वसूली पर सख्त कार्रवाई की जाए।
री-एडमिशन के नाम पर वसूली से अभिभावक परेशान
खर्च लाख के पार, बढ़ी परेशानी
अभिभावक महेश यादव का कहना है कि उनके दो बच्चे नौवीं और चौथी कक्षा में पढ़ते हैं। निजी स्कूल हर साल 10 से 20 हजार रुपये एडमिशन के समय ले लेते हैं जिससे कुल खर्च लाख रुपये के पार पहुंच जाता है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई कराना मुश्किल हो रहा है लेकिन इस पर प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
हर साल एडमिशन बना व्यापार
अभिभावक हरीश शर्मा ने बताया कि एक ही स्कूल में हर साल बार-बार एडमिशन लेना निजी स्कूलों का व्यापार बन गया है। एक ही बच्चे का हर साल री-एडमिशन लेकर शुल्क वसूला जा रहा है जबकि इसका कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। उन्होंने इसे पूरी तरह गलत बताते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की।
री-एडमिशन के नाम पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
अभिभावक हरिओम वशिष्ट का कहना है कि हर साल री-एडमिशन के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लेकर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि री-एडमिशन शुल्क वृद्धि पर नियंत्रण लगाया जाए और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।
फीस बढ़ोतरी, सुविधाएं जस की तस
अभिभावक बिजेंद्र यादव ने बताया कि हर साल मनमाने तरीके से फीस बढ़ाई जाती है लेकिन सुविधाओं में कोई खास सुधार नहीं होता। शिक्षा के नाम पर लगातार आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
फीस बढ़ोतरी और एडमिशन प्रक्रिया को लेकर विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी स्कूल निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकता। फीस बढ़ाने से पहले स्कूल प्रबंधन को विभाग को सूचित करना अनिवार्य है और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। यदि कोई स्कूल नियमों की अनदेखी करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों से अपील की है कि यदि उनसे किसी प्रकार की अनियमित वसूली की जा रही है तो वे इसकी शिकायत विभाग में दर्ज कराएं ताकि जांच कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
- बिजेंद्र हुड्डा, जिला शिक्षा अधिकारी, रेवाड़ी
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अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल 10 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक एडमिशन फीस, डेवलपमेंट चार्ज और अन्य वसूल रहे हैं। इसके साथ ही ट्यूशन फीस, बस शुल्क, किताबें और यूनिफॉर्म का खर्च अलग से देना पड़ता है। ऐसे में मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट बिगड़ रहा है।
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अभिभावकों के मुताबिक स्कूल प्रबंधन बिना किसी निर्धारित प्रक्रिया के हर साल फीस बढ़ा देते हैं और री-एडमिशन को अनिवार्य कर देते हैं। बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए अभिभावकों को मजबूरी में यह राशि चुकानी पड़ती है। शिक्षा विभाग के नियमानुसार फीस बढ़ाने से पहले स्कूलों को सूचित करना होता है, लेकिन ऐसा है नहीं है।
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अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण लगाया जाए और मनमानी वसूली पर सख्त कार्रवाई की जाए।
री-एडमिशन के नाम पर वसूली से अभिभावक परेशान
खर्च लाख के पार, बढ़ी परेशानी
अभिभावक महेश यादव का कहना है कि उनके दो बच्चे नौवीं और चौथी कक्षा में पढ़ते हैं। निजी स्कूल हर साल 10 से 20 हजार रुपये एडमिशन के समय ले लेते हैं जिससे कुल खर्च लाख रुपये के पार पहुंच जाता है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई कराना मुश्किल हो रहा है लेकिन इस पर प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
हर साल एडमिशन बना व्यापार
अभिभावक हरीश शर्मा ने बताया कि एक ही स्कूल में हर साल बार-बार एडमिशन लेना निजी स्कूलों का व्यापार बन गया है। एक ही बच्चे का हर साल री-एडमिशन लेकर शुल्क वसूला जा रहा है जबकि इसका कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। उन्होंने इसे पूरी तरह गलत बताते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की।
री-एडमिशन के नाम पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
अभिभावक हरिओम वशिष्ट का कहना है कि हर साल री-एडमिशन के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लेकर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि री-एडमिशन शुल्क वृद्धि पर नियंत्रण लगाया जाए और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।
फीस बढ़ोतरी, सुविधाएं जस की तस
अभिभावक बिजेंद्र यादव ने बताया कि हर साल मनमाने तरीके से फीस बढ़ाई जाती है लेकिन सुविधाओं में कोई खास सुधार नहीं होता। शिक्षा के नाम पर लगातार आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
फीस बढ़ोतरी और एडमिशन प्रक्रिया को लेकर विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी स्कूल निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकता। फीस बढ़ाने से पहले स्कूल प्रबंधन को विभाग को सूचित करना अनिवार्य है और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। यदि कोई स्कूल नियमों की अनदेखी करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों से अपील की है कि यदि उनसे किसी प्रकार की अनियमित वसूली की जा रही है तो वे इसकी शिकायत विभाग में दर्ज कराएं ताकि जांच कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
- बिजेंद्र हुड्डा, जिला शिक्षा अधिकारी, रेवाड़ी

अभिभावक बिजेंद्र यादव

अभिभावक बिजेंद्र यादव

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