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शतकवीरों ने युवाओं की तरह जोश के साथ किया मतदान
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रेवाड़ी। जिले के बुजुर्गों ने युवाओं की तरह जोश के साथ मतदान किया। जिले में सबसे अधिक आयु के 106 साल के भवानी सिंह अपने बेटे के कंधों का सहारा लेकर मतदान केंद्र पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के समय से वोट डाल रहा हूं। जब तक जिंदा रहूंगा वोट डालूंगा। चाहे इसके लिए मुझे व्हील चेयर पर ही क्यों न आना पड़े।
जिले में 100 साल से अधिक आयु 178 वोटर हैं। इन मतदाताओं ने पूरे उत्साह के साथ वोटिंग की। कोई अपने बेटे के साथ पहुंचा तो कोई अपने पोते के साथ आया। बुजुर्ग महिलाएं भी अपनी बहुओं के साथ मतदान केंद्रों तक पहुंची। कुछ बुजुर्ग लोग पैदल चलने में असमर्थ होने पर व्हील चेयर पर बैठकर बूथ तक पहुंचे। बुजुर्गों ने कहा कि हम अपने अधिकार को प्रयोग करने में पीछे नहीं रहेंगे। हर एक मतदाता को अपना फर्ज निभाना चाहिए।
मैंने देश ही आजादी के बाद हुए पहले चुनाव से लेकर आज तक सभी वोट डाला है। मेरा बेटा भी 71 साल का हो गया। मैं हर बार वोट डालने आता हूं। हर एक व्यक्ति को वोट डालने आना चाहिए। भवानी सिंह ने कहा कि जो व्यक्ति वोट नहीं डाल रहा वह देश के लोकतंत्र का कमजोर कर रहा है। भवानी सिंह, 106 वर्षीय बुजुर्ग, भगवानपुर , रेवाड़ी
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मैं तो हर वार अपनी वोट डालने आता हूं। इस बार भी आया हूूं। देश के प्रति पहले भी फर्ज निभाया है। हर एक व्यक्ति को वोट डालनी चाहिए। जो लोग वोट नहीं डालते उनको अपने हक को खो रहे हैं। अपने फर्ज को निभाते हुए मैंने अच्छी सरकार चुनने के लिए मतदान किया।श्रीराम यादव, 105 वर्षीय बुजुर्ग, गांव भगवानपुर
मैं तो जीउंगा तब तक हर बार वोट डालूंगा। वोट डालने के लिए कोई नहीं लाया। खुद मैंने बच्चों से कहा था कि मुझे वोट के लिए ले चलो। वोट डालना हमारी जिम्मेदारी है। मैं गांव के सभी लोगों को वोट डालने के लिए प्रेरित करता रहा हूं। सभी लोगों को वोट डालना चाहिए।
मामन सिंह, 104 वर्षीय बुजुर्ग, रसूलपुर
बेटा बोट तो सबनै गैरनी चाहिए। मैं तो गैर आई ईब थाम भी गैर आओ। अर म्हारे तो पूरे कुणबे ने बोट डाल गैर दी। घरक्यां तैं पहल्यां ही कह दी थी कि सारे चालियो। हमने तो अपने गाम में बोट गैरन खातर सबेरे ही लाइन लगा ली थी।
ग्यारसी देवी, 92 वर्षीय बुजुर्ग , रामपुरा
हमने तो वोट डाल दी। पहले भी वोट डाल दी थी। वोट के लिए हम बार आते हैं। किसी का साथ लेकर आना पड़े तो भी दिक्कत नहीं। पांच साल में एक बार आना हो तो क्या परेशानी है। अगर हमारी वोट से देश में तरक्की होगी तो हर एक वोट डालनी चाहिए।
सोनी देवी,90 वर्षीय बुजुर्ग, मंदोला
पैदल को नहीं चला जाता। व्हील चेयर पर ही इधर उधर टहल लेती हूं। वोट डालना जरूरी थी। इसलिए बेटों को कहकर यहां आई। बेटे- पोते व्हील चेयर को चलाकर यहां तक लाए हैं। वोट की मशीन तक जाकर वोट डालूंगी। इसके बाद मुझे राहत मिलेगी।
तुलसी बाई, 88 वर्षीय , मॉडल टाउन रेवाड़ी
मैं तो हर बार वोट डालने के लिए आती हूं। सरपंची से लेकर एमपी तक की सारी वोट डाली हैं। इस बार भी वोट डालकर जाउंगी। लोगों को अपने फर्ज को निभाना चाहिए। वोट डालने से अच्छे लोग चुनकर आएंगे। अच्छे लोग ही देश के विकास के लिए काम करेंगे।
अंजना देवी, 85 वर्षीय बुजुर्ग, मंदोला
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जिले में 100 साल से अधिक आयु 178 वोटर हैं। इन मतदाताओं ने पूरे उत्साह के साथ वोटिंग की। कोई अपने बेटे के साथ पहुंचा तो कोई अपने पोते के साथ आया। बुजुर्ग महिलाएं भी अपनी बहुओं के साथ मतदान केंद्रों तक पहुंची। कुछ बुजुर्ग लोग पैदल चलने में असमर्थ होने पर व्हील चेयर पर बैठकर बूथ तक पहुंचे। बुजुर्गों ने कहा कि हम अपने अधिकार को प्रयोग करने में पीछे नहीं रहेंगे। हर एक मतदाता को अपना फर्ज निभाना चाहिए।
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मैंने देश ही आजादी के बाद हुए पहले चुनाव से लेकर आज तक सभी वोट डाला है। मेरा बेटा भी 71 साल का हो गया। मैं हर बार वोट डालने आता हूं। हर एक व्यक्ति को वोट डालने आना चाहिए। भवानी सिंह ने कहा कि जो व्यक्ति वोट नहीं डाल रहा वह देश के लोकतंत्र का कमजोर कर रहा है। भवानी सिंह, 106 वर्षीय बुजुर्ग, भगवानपुर , रेवाड़ी
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मैं तो हर वार अपनी वोट डालने आता हूं। इस बार भी आया हूूं। देश के प्रति पहले भी फर्ज निभाया है। हर एक व्यक्ति को वोट डालनी चाहिए। जो लोग वोट नहीं डालते उनको अपने हक को खो रहे हैं। अपने फर्ज को निभाते हुए मैंने अच्छी सरकार चुनने के लिए मतदान किया।श्रीराम यादव, 105 वर्षीय बुजुर्ग, गांव भगवानपुर
मैं तो जीउंगा तब तक हर बार वोट डालूंगा। वोट डालने के लिए कोई नहीं लाया। खुद मैंने बच्चों से कहा था कि मुझे वोट के लिए ले चलो। वोट डालना हमारी जिम्मेदारी है। मैं गांव के सभी लोगों को वोट डालने के लिए प्रेरित करता रहा हूं। सभी लोगों को वोट डालना चाहिए।
मामन सिंह, 104 वर्षीय बुजुर्ग, रसूलपुर
बेटा बोट तो सबनै गैरनी चाहिए। मैं तो गैर आई ईब थाम भी गैर आओ। अर म्हारे तो पूरे कुणबे ने बोट डाल गैर दी। घरक्यां तैं पहल्यां ही कह दी थी कि सारे चालियो। हमने तो अपने गाम में बोट गैरन खातर सबेरे ही लाइन लगा ली थी।
ग्यारसी देवी, 92 वर्षीय बुजुर्ग , रामपुरा
हमने तो वोट डाल दी। पहले भी वोट डाल दी थी। वोट के लिए हम बार आते हैं। किसी का साथ लेकर आना पड़े तो भी दिक्कत नहीं। पांच साल में एक बार आना हो तो क्या परेशानी है। अगर हमारी वोट से देश में तरक्की होगी तो हर एक वोट डालनी चाहिए।
सोनी देवी,90 वर्षीय बुजुर्ग, मंदोला
पैदल को नहीं चला जाता। व्हील चेयर पर ही इधर उधर टहल लेती हूं। वोट डालना जरूरी थी। इसलिए बेटों को कहकर यहां आई। बेटे- पोते व्हील चेयर को चलाकर यहां तक लाए हैं। वोट की मशीन तक जाकर वोट डालूंगी। इसके बाद मुझे राहत मिलेगी।
तुलसी बाई, 88 वर्षीय , मॉडल टाउन रेवाड़ी
मैं तो हर बार वोट डालने के लिए आती हूं। सरपंची से लेकर एमपी तक की सारी वोट डाली हैं। इस बार भी वोट डालकर जाउंगी। लोगों को अपने फर्ज को निभाना चाहिए। वोट डालने से अच्छे लोग चुनकर आएंगे। अच्छे लोग ही देश के विकास के लिए काम करेंगे।
अंजना देवी, 85 वर्षीय बुजुर्ग, मंदोला