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-विभाग का दावा, पुख्ता हैं सभी इंतजाम
Updated Tue, 03 Oct 2017 01:23 AM IST
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शहर में सीवर लाइन प्वाइंट बने गैस चैंबर, ले न लें जान
अमित विश्वकर्मा
रेवाड़ी।
गुरुग्राम में एक कंपनी के सीवर में बनी गैस से दम घुटने से तीन कर्मियों की मौत ने सीवर सफाई के दौरान बरती जाने वाली लापरवाही की पोल खोल दी है। गुरुग्राम से पहले फरीदाबाद में भी सीवर में उतरने से एक कर्मचारी की मौत हुई थी। इसके बावजूद जिला प्रशासन व जन स्वास्थ्य विभाग ने कोई सबक नहीं लिया। शहर की कई कॉलोनियों में जहां डेयरियां हैं वहां गोबर को सीवर में बहा दिया जाता है। जिसके चलते ये सीवर गैंस चैंबर में बदल गए हैं। वहीं औद्योगिक क्षेत्रों के हालात भी कुछ अच्छे नहीं हैं। शहर में भी कई बार कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर में उतरकर सफाई करते देखे गए हैं। ऐसे में थोड़ी से लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं जन स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उन्होंने कर्मचारियों के साथ ठेकेदारों को भी सभी सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए हुए हैं।
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मैथेन, प्रोपेन और अमोनिया जैसी जहरीली गैस से खतरा
कई दिनों तक सीवर साफ नहीं होने पर सीवर टैंक में गंदगी के नीचे मैथेन, प्रोपेन और अमोनिया जैसी जहरीली गैस बन जाती है। यदि बिना सुरक्षा उपकरणों के सफाई कर्मचारी टैंक में चला जाता है तो गैस के कारण वह बेहोश हो सकता है। यहां तक की जान जाने की भी आशंका रहती है।
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सीवर सफाई के दौरान न बरते लापरवाही
जन स्वास्थ्य विभाग ने सीवर सफाई के लिए नीचे उतरने से पहले कुछ नियम बनाए हुए हैं। नियमानुसार सीवर की सफाई से पहले उसे करीब तीन घंटे पहले खोल देना चाहिए। इसी के साथ चूना पाउडर भी डालना जरूरी है। वहीं सीवर में उतरते समय मौके पर कनिष्ठ अभियंता का होना जरूरी होता है। इसी के साथ कर्मचारी के पास मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर एवं अन्य उपकरणों का होना जरूरी है। लेकिन अधिकतर केसों में कर्मचारियों के पास ये उपकरण नहीं दिखाई देते हैं। जिससे हादसे का अंदेशा बढ़ जाता है।
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बावल औद्योगिक क्षेत्र अति संवेदनशील
शहरी क्षेत्र की अपेक्षा औद्योगिक क्षेत्र में बिछी लाइन ज्यादा खतरनाक होती है। फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल के चलते सीवर लाइन में 90 फीसदी तक जहरीली गैस बनने की संभावना बढ़ जाती है। यदि यहां की सीवर लाइन में कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरण के घुस जाए तो दुर्घटना होना निश्चित है। लेकिन कई बार आईएमटी बावल में भी सफाई कर्मचारियों को बिना सुरक्षा उपकरणों के सफाई करते हुए देखा गया है। औद्योगिक क्षेत्र में सीवर-पानी की व्यवस्था देखने का काम एचएसआईआईडीसी का होता है। लेकिन व्यवस्था की सुध लेने का समय किसी अधिकारी के पास नहीं है। हादसा होने पर मामले में सुधार की बात की जाती है।
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सीवर लाइन में घुसने से पहले सुरक्षा उपकरणों को साथ रखना जरूरी है। जेई की उपस्थिति में सीवर को अंदर जाया जा सकता है। हर सप्ताह सीवर सफाई कर्मचारियों को सुरक्षा संबधी हिदायतें दी जाती हैं। सभी उपकरण भी मुहैया कराए गए हैं। यदि कोई कर्मचारी इसके बाद भी बिना सुरक्षा उपकरण सीवर में जा रहा है तो इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
डीएस दहिया, कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग, रेवाड़ी।
नोट:::: इसकी तीनों फोटो कल चली दी हैं। वहीं से उठा लें।
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अमित विश्वकर्मा
रेवाड़ी।
गुरुग्राम में एक कंपनी के सीवर में बनी गैस से दम घुटने से तीन कर्मियों की मौत ने सीवर सफाई के दौरान बरती जाने वाली लापरवाही की पोल खोल दी है। गुरुग्राम से पहले फरीदाबाद में भी सीवर में उतरने से एक कर्मचारी की मौत हुई थी। इसके बावजूद जिला प्रशासन व जन स्वास्थ्य विभाग ने कोई सबक नहीं लिया। शहर की कई कॉलोनियों में जहां डेयरियां हैं वहां गोबर को सीवर में बहा दिया जाता है। जिसके चलते ये सीवर गैंस चैंबर में बदल गए हैं। वहीं औद्योगिक क्षेत्रों के हालात भी कुछ अच्छे नहीं हैं। शहर में भी कई बार कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर में उतरकर सफाई करते देखे गए हैं। ऐसे में थोड़ी से लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं जन स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उन्होंने कर्मचारियों के साथ ठेकेदारों को भी सभी सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए हुए हैं।
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मैथेन, प्रोपेन और अमोनिया जैसी जहरीली गैस से खतरा
कई दिनों तक सीवर साफ नहीं होने पर सीवर टैंक में गंदगी के नीचे मैथेन, प्रोपेन और अमोनिया जैसी जहरीली गैस बन जाती है। यदि बिना सुरक्षा उपकरणों के सफाई कर्मचारी टैंक में चला जाता है तो गैस के कारण वह बेहोश हो सकता है। यहां तक की जान जाने की भी आशंका रहती है।
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सीवर सफाई के दौरान न बरते लापरवाही
जन स्वास्थ्य विभाग ने सीवर सफाई के लिए नीचे उतरने से पहले कुछ नियम बनाए हुए हैं। नियमानुसार सीवर की सफाई से पहले उसे करीब तीन घंटे पहले खोल देना चाहिए। इसी के साथ चूना पाउडर भी डालना जरूरी है। वहीं सीवर में उतरते समय मौके पर कनिष्ठ अभियंता का होना जरूरी होता है। इसी के साथ कर्मचारी के पास मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर एवं अन्य उपकरणों का होना जरूरी है। लेकिन अधिकतर केसों में कर्मचारियों के पास ये उपकरण नहीं दिखाई देते हैं। जिससे हादसे का अंदेशा बढ़ जाता है।
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बावल औद्योगिक क्षेत्र अति संवेदनशील
शहरी क्षेत्र की अपेक्षा औद्योगिक क्षेत्र में बिछी लाइन ज्यादा खतरनाक होती है। फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल के चलते सीवर लाइन में 90 फीसदी तक जहरीली गैस बनने की संभावना बढ़ जाती है। यदि यहां की सीवर लाइन में कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरण के घुस जाए तो दुर्घटना होना निश्चित है। लेकिन कई बार आईएमटी बावल में भी सफाई कर्मचारियों को बिना सुरक्षा उपकरणों के सफाई करते हुए देखा गया है। औद्योगिक क्षेत्र में सीवर-पानी की व्यवस्था देखने का काम एचएसआईआईडीसी का होता है। लेकिन व्यवस्था की सुध लेने का समय किसी अधिकारी के पास नहीं है। हादसा होने पर मामले में सुधार की बात की जाती है।
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सीवर लाइन में घुसने से पहले सुरक्षा उपकरणों को साथ रखना जरूरी है। जेई की उपस्थिति में सीवर को अंदर जाया जा सकता है। हर सप्ताह सीवर सफाई कर्मचारियों को सुरक्षा संबधी हिदायतें दी जाती हैं। सभी उपकरण भी मुहैया कराए गए हैं। यदि कोई कर्मचारी इसके बाद भी बिना सुरक्षा उपकरण सीवर में जा रहा है तो इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
डीएस दहिया, कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग, रेवाड़ी।
नोट:::: इसकी तीनों फोटो कल चली दी हैं। वहीं से उठा लें।