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अतिपूंजीवाद से अर्थव्यवस्था का हो रहा नुकसान : प्रो. एडीएन बाजपेयी
Updated Thu, 29 Mar 2018 11:55 PM IST
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अतिपूंजीवाद से अर्थव्यवस्था का हो रहा नुकसान : प्रो. एडीएन बाजपेयी
रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था के समसामयिक मुद्दे व चुनौतियां विषय पर वीरवार को एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस मौके पर कुलपति प्रो. एसपी बंसल ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की संरचना में बहुत व्यापक परिवर्तन हुए हैं और विश्व की विकसित देशों के तरह हमारी अर्थव्यवस्था का भी वैश्विक महत्व बढ़ा है। नए शोध, अविष्कार तथा व्यवसाय में भारत अग्र देशों में शामिल हो रहा है। मुख्यातिथि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के पूर्व कुलपति प्रो. एडीएन बाजपेयी ने कहा कि हमें व्याप्त गरीबी तथा असमानता को दूर करना है। अतिपूंजीवाद तथा अतिशहरीकरण से समाज व अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है। हमें एक नई सोच व दर्शन की आवश्यकता है, जो समानता को बढ़ा सके।
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र के सेवानिवृत्त शिक्षक प्रो. एसबी दहिया ने कहा कि नोटबंदी व वस्तु तथा सेवा कर के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन होना चाहिए। उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि डॉ. नीलम चौधरी ने वित्त, बैंकिंग व राजस्व से जुड़ी हुई वर्तमान चुनौतियों के बारे में बताया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के प्रो. कविता चक्रवर्ती ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में संस्थाओं को अधिक पारदर्शी बनाने का सुझाव दिया। इसके अतिरिक्त उन्होंने कृषि संकट को दूर करने के भी सुझाव दिए। विशिष्ट अतिथि चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा के अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. मनोज सिवाच ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं की चर्चा की साथ ही अधोसंरचना के विकास पर जोर दिया। इस राष्ट्रीय सेमिनार में देश के कई राज्यों के 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस राष्ट्रीय सेमिनार के आयोजन में डॉ. विकास बत्रा, डॉ. सोनू मदान, डॉ. देवेंद्र सिंह, डॉ. सतीश कुमार, डॉ. सीमा महलावत, डॉ. विजय सिंह, डॉ. अदिति शर्मा तथा डॉ. रीना हुडा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था के समसामयिक मुद्दे व चुनौतियां विषय पर वीरवार को एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस मौके पर कुलपति प्रो. एसपी बंसल ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की संरचना में बहुत व्यापक परिवर्तन हुए हैं और विश्व की विकसित देशों के तरह हमारी अर्थव्यवस्था का भी वैश्विक महत्व बढ़ा है। नए शोध, अविष्कार तथा व्यवसाय में भारत अग्र देशों में शामिल हो रहा है। मुख्यातिथि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के पूर्व कुलपति प्रो. एडीएन बाजपेयी ने कहा कि हमें व्याप्त गरीबी तथा असमानता को दूर करना है। अतिपूंजीवाद तथा अतिशहरीकरण से समाज व अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है। हमें एक नई सोच व दर्शन की आवश्यकता है, जो समानता को बढ़ा सके।
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र के सेवानिवृत्त शिक्षक प्रो. एसबी दहिया ने कहा कि नोटबंदी व वस्तु तथा सेवा कर के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन होना चाहिए। उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि डॉ. नीलम चौधरी ने वित्त, बैंकिंग व राजस्व से जुड़ी हुई वर्तमान चुनौतियों के बारे में बताया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के प्रो. कविता चक्रवर्ती ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में संस्थाओं को अधिक पारदर्शी बनाने का सुझाव दिया। इसके अतिरिक्त उन्होंने कृषि संकट को दूर करने के भी सुझाव दिए। विशिष्ट अतिथि चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा के अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. मनोज सिवाच ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं की चर्चा की साथ ही अधोसंरचना के विकास पर जोर दिया। इस राष्ट्रीय सेमिनार में देश के कई राज्यों के 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस राष्ट्रीय सेमिनार के आयोजन में डॉ. विकास बत्रा, डॉ. सोनू मदान, डॉ. देवेंद्र सिंह, डॉ. सतीश कुमार, डॉ. सीमा महलावत, डॉ. विजय सिंह, डॉ. अदिति शर्मा तथा डॉ. रीना हुडा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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