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हरियाणा में पीटीआई टीचरों के लिए बुरी खबर
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 01 Oct 2013 12:15 AM IST
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हरियाणा में जून 2010 में भरती किए गए 1983 फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टरों (पीटीआई) के भविष्य पर तलवार लटक गई है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को इन पीटीआई की भरती को रद्द करने के सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराया।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस सुरेंद्र गुप्ता की बेंच ने इसके साथ ही इस मामले में सभी एलपीए याचिकाओं को निरस्त करते हुए याचियों पर दस-दस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।
इस मामले में हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन पर भी उसकी दो याचिकाओं के लिए कुल एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
हाईकोर्ट ने सभी को एक महीने के भीतर जुर्माना राशि हाईकोर्ट में जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 11 सितंबर 2012 को आदेश जारी कर 1983 पीटीआई की नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। सिंगल बेंच के इस आदेश को हाईकोर्ट की डबल बेंच के समक्ष चुनौती दी गई थी।
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सोमवार को डबल बेंच ने अपने फैसले में कहा कि हरियाणा शिक्षा विभाग द्वारा पीटीआई की नियुक्तियों में की गई जल्दबाजी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
हाईकोर्ट ने कहा कि हरियाणा सरकार को नियुक्तियों के मामले में गंभीर होना होगा और भविष्य में सावधानीपूर्वक नौकरी के आवेदनों पर विचार करना होगा।
डबल बेंच ने कहा, भरती में हुई लापरवाही
हाईकोर्ट की डबल बेंच ने अपने फैसले में कहा कि संदेहास्पद शैक्षणिक रिकार्ड वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने में सीधे-सीधे शिक्षा विभाग की लापरवाही सामने आई है।
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इस पूरे मामले के गहन अध्ययन से यह बात सामने आई है कि जरूरी शैक्षणिक दस्तावेजों की भी वेरिफिकेशन नहीं की गई। लिहाजा, हाईकोर्ट इस बड़े कारण को ध्यान में रखते हुए सिंगल बेंच के फैसले को सही मानती है
यह है मामला
हरियाणा सरकार ने राज्य में पीटीआई टीचरों की खाली पद भरने के लिए जुलाई 2006 में विज्ञापन जारी किया था। इस भरती प्रक्रिया के तहत हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन कमीशन ने जून 2010 में 1983 पीटीआई टीचरों की नियुक्तियां भी कर दीं।
लेकिन नियुक्ति में असफल रहे अभ्यर्थियों में हिसार निवासी जिले राम और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ियों का आरोप लगाया। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि भरती प्रक्रिया में कई ऐसे उम्मीदवारों को भी नियुक्ति दे दी गई, जिनके शैक्षणिक दस्तावेज ही फरजी हैं।
हाईकोर्ट के जस्टिस एजी मसीह की सिंगल बेंच ने याचिका पर सुनवाई करने के बाद पीटीआई टीचरों की भरती को रद्द कर दिया और सरकार को पांच महीने में नए सिरे से भरती करने के निर्देश दिए।
सिंगल बेंच ने अपने आदेश में यह भी साफ किया कि इस मामले में पाया गया है कि हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन के तत्कालीन चेयरमैन ने सुपर अथॉरिटी की तरह भरती प्रक्रिया में निर्णय लिए। सिंगल बेंच के इसी आदेश को हाईकोर्ट की डबल बेंच में चुनौती दी गई थी।