रेप पीड़िता ने थाने में पीया जहर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्याय न मिलने पर दुराचार पीड़िता ने बृहस्पतिवार दोपहर हांसी के सदर थाने में जहरीला स्प्रे पी लिया। महिला को पुलिस ने सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां से उसे प्राथमिक उपचार के बाद हिसार रेफर कर दिया गया। महिला ही हालत गंभीर बनी हुई है। महिला ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने दुराचार पीड़ितों को गिरफ्तार करने की बजाय केस को ही निरस्त कर दिया। पीड़िता ने थाने के एक एएसआई पर आरोपियों से मिलीभगत के आरोप जड़े हैं।
दुराचार मामले की एक पीड़िता बृहस्पतिवार को स्प्रे की शीशी हाथ में लेकर सदर थाने में पहुंची। वह सीधे एएसआई कैलाश के कमरे में गई और पुलिस पर उसकी सुनवाई न करने का आरोप लगाया। महिला ने कहा कि वह थाने में ही जान दे देगी और उसने स्प्रे पी लिया।
महिला ने कहा कि दिसंबर 2013 में गंगनखेड़ी में उसके साथ दुराचार हुआ था और पुलिस ने एक व्यक्ति व दो महिलाओं के खिलाफ मामला दर्ज भी किया था। उसने आरोप लगाया कि पुलिस ने बाद में घूस लेकर मामले को रद कर दिया।
अस्पताल की बजाय पुलिस वाले घरेलू नुस्खे करते रहे
पीड़िता ने कहा कि अब वह जीना नहीं चाहती है। पुलिस ने उसे इंसाफ नहीं दिया। इसलिए उसने थाने में ही जान देने का फैसला लिया है। महिला ने सदर थाने में एएसआई के कमरे में ही उल्टियां भी की। काफी देर तक पुलिस कर्मी महिला को अस्पताल पहुंचाने की बजाय थाने में ही उसे घरेलू उपचार देने में जुटे रहे। मौके पर पहुंचे मीडिया कर्मियों ने जब महिला को अस्पताल ले जाने की नसीहत दी तो आनन-फानन में एक कार में महिला को अस्पताल ले जाया गया।
मामला था झूठा, इसलिए रद किया: कैलाश चंद्र
पुलिस ने सफाई दी कि चूंकि थाने में कोई गाड़ी नहीं थी और पीसीआर पहुंच नहीं सकी थी, इसलिए देरी हो गई। उधर, इस मामले में जिस पुलिस अधिकारी कैलाश चंद्र पर आरोप लग रहे हैं, उनका कहना है कि दुराचार का मामला उन्होंने जांच के दौरान झूठा पाया था। उन्होंने उच्चाधिकारियों के निर्देश के मुताबिक उसे रद कर दिया था। कैलाश ने कहा कि महिला का अपने रिश्तेदारों से रुपयों के लेनदेन का विवाद है। इसी विवाद में दुराचार के आरोप लगाए गए थे। एएसआई ने कहा कि घूस लेकर मामला निरस्त करने के आरोप बेबुनियाद हैं।
थाने में नहीं थी कोई महिला पुलिस कर्मी
जिस वक्त महिला हाथ में जहर की शीशी लेकर थाने में दाखिल हुई, उस समय गेट पर कोई संतरी तक नहीं था। महिला ने जहर निगल लिया, लेकिन साथ के कमरे में मौजूद पुलिसकर्मी अपने काम में व्यस्त रहे। थाने का मुंशी सुरेंद्र उठकर जरूर आया और एक-दो पुलिस कर्मी भी आए, लेकिन कुछ पुलिस कर्मचारियों ने नजदीक आना भी मुनासिब नहीं समझा। मुंशी फोन कर दूसरे कर्मियों से मदद मांगता रहा। कमाल की बात यह है कि पूरे थाने में इस कांड के दौरान एक भी महिला पुलिस कर्मी मौजूद नहीं थी। यही वजह रही कि पुरुष पुलिस कर्मियों को ही पीड़ित महिला को लेकर अस्पताल पहुंचना पड़ा।
उपचार की बजाय मीडिया की चिंता सताती रही
पीड़ित महिला को अस्पताल में ले जाने की बजाय पुलिस कर्मियों को इस बात की चिंता सताती रही कि कहीं अखबारों में इसकी सुर्खियां न बन जाए। पुलिस महिला की मदद करने की बजाए मीडिया कर्मियों से उलझते नजर आए।